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किसानों के अच्‍छे दिन? संसद में मोदी सरकार ने आंकड़े देकर बताया- कम हुईं आत्‍महत्‍या की घटनाएं, खेतिहर मजदूरों की हालत हुई खराब

कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने लोकसभा में किसानों की आत्महत्या के मामले में गिरावट आने की जानकारी दी। खेतिहर मजदूरों द्वारा जान देने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। बिहार और पश्चिम बंगाल में किसान अत्महत्या का एक भी मामला सामने नहीं आया।

Author नई दिल्ली | March 22, 2018 7:11 PM
मुंबई कूच करते किसान। फोटो- एएनआई

देश में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। देश भर में किसानों द्वारा जान देने की घटनाओं में 21 फीसद तक की कमी दर्ज की गई है। कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने लोकसभा में इसकी जानकारी दी। उन्होंने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के प्रोविजनल आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी है। मोदी सरकार द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में 8,007 किसानों ने आत्महत्या की थी। साल 2016 में 6,351 किसानों ने जान दी थी। इस तरह आत्महत्या के मामलों में 21 फीसद तक की कमी दर्ज की गई। पहले जहां प्रतिदिन 22 किसान अपनी जान दे रहे थे, वहीं एक साल बाद यह आंकड़ा 17 तक पहुंच गया। कृषि क्षेत्र में आत्महत्या के मामलों में 10 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2015 में कृषि क्षेत्र से जुड़े 12,602 लोगों ने आत्महत्या की थी। एनसीआरबी गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है, जबकि किसानों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं एक्सिडेंटल डेथ एंड सूसाइड इन इंडिया (एडीएसआई) के तहत आती हैं। कृषि क्षेत्र में आत्महत्या की घटनाएं 1996 के बाद 2016 में सबसे कम रहीं। केंद्रीय मंत्री ने दिवालिया और कर्ज को आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण बताया। बता दें कि कुछ दिनों पहले ही महाराष्ट्र के हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर मुंबई पहुंच गए थे।

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खेतिहर मजदूरों की स्थिति दयनीय: सरकार द्वारा पेश आंकड़ों खेतिहर मजदूरों की दयनीय स्थिति का पता चलता है। उनकी हालत पहले के मुकाबले खराब हुई है। केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में खेतिहर मजदूरों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाओं में 9.2 फीसद की वृद्धि हुई। वर्ष 2015 में ऐसे 4,595 मजदूरों ने जान दी थी। साल 2016 में ऐसी 5,019 घटनाएं सामने आईं। इसका मतलब यह हुआ कि वर्ष 2016 में हर दिन 14 मजदूरों ने आत्महत्या की। खेतिहर मजूदरों द्वारा जान देने की सबसे बड़ी वजह बीमारी के कारण पैदा पारिवारिक समस्याओं को बताया गया है।

चार राज्यों में तीन चौथाई आत्महत्याएं: किसानों द्वारा आत्महत्या की तकरीबन तीन चौथाई (70 फीसद) घटनाएं देश के चार राज्यों में सामने आई हैं। इनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। वहीं, बिहार और पश्चिम बंगाल में वर्ष 2016 में किसानों द्वारा जान देने की एक भी घटना सामने न आने की बात कही गई है। बता दें कि कई राज्य सरकारों ने पिछले कुछ महीनों में किसानों का कर्जा माफ करने की घोषणा की थी।

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