एलएसी तक ब्रह्मोस ले जाना है, हालात नाज़ुक हैं; हमें हर संभव कोशिश करनी है- सुप्रीम कोर्ट में बोली केंद्र सरकार

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कोर्ट में यह भी कहा कि सेना को ब्रह्मोस को ले जाना है और इसके लिए एक बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होगी। यदि इसके परिणामस्वरूप भूस्खलन होता है तो सेना इससे निपटेगी।

चार धाम सड़कों को चौड़ा करने को लेकर अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए जो करना पड़े वह हम करेंगे। (एक्सप्रेस फोटो)

अनंथकृष्णन जी.

चार धाम परियोजना से जुड़ी सड़कों को चौड़ा करने को लेकर एक एनजीओ की तरफ से दायर की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि इस समय हालात बहुत नाजुक हैं और हमें एलएसी तक ब्रह्मोस ले जाना है। साथ ही केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा के लिए हमें हर संभव कोशिश करनी है।

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने एनजीओ सिटीजन फॉर ग्रीन दून की तरफ से दायर की गई याचिका पर सुनवाई की। जिसमें कहा गया कि फीडर सड़कों के चौड़ीकरण के लिए जंगलों और वन्यजीव अभ्यारण की कटाई करने का आदेश दिया गया है। इसी मामले पर केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने एलएएसी पार चीन की तरफ बनाए जाने ढांचे का उल्लेख करते हुए हमें महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों को ले जाने के लिए चार धाम इलाके में चौड़े सड़कों की जरूरत है।

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कोर्ट में यह भी कहा कि सेना को ब्रह्मोस को ले जाना है और इसके लिए एक बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होगी। यदि इसके परिणामस्वरूप भूस्खलन होता है तो सेना इससे निपटेगी। अगर सड़कें पर्याप्त चौड़ी नहीं हैं तो हम वहां कैसे जाएंगे? साथ ही वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि हमें देश की रक्षा करनी है। भूस्खलन, बर्फबारी के बावजूद एलएएसी के पास सड़कों को बनाया जाएगा। हम कमजोर हैं और हम जो भी कर सकते हैं हमें वह करना होगा।

दो दिन पहले इसी मामले पर सुनवाई करते हुए इसी पीठ ने जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ भी शामिल थे, उन्होंने कहा था कि पर्यावरणीय आधार पर रक्षा जरूरतों की अवहेलना करने को दुर्भावना से ग्रसित बताया था। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि इतनी ऊंचाई पर देश की सुरक्षा दांव पर है। क्या सर्वोच्च संवैधानिक न्यायालय यह कह सकता है कि हम रक्षा आवश्यकताओं को विशेष रूप से हाल की घटनाओं के देखते हुए इसकी अवहेलना करेंगे? क्या हम कह सकते हैं कि देश की सुरक्षा पर पर्यावरण की जीत होगी? या हम यह कहते हैं कि रक्षा संबंधी चिंताओं का भी ध्यान रखा जाए ताकि पर्यावरण का क्षरण न हो?

याचिकाकर्ता ने कोर्ट ने सामने कहा कि यह परियोजना 2016 में लाई गई थी और इसका मकसद पर्यटन को बढ़ावा देना था। इसपर के के वेणुगोपाल ने गुरुवार को कहा कि जहां तक ​​सड़कों की चौड़ाई का सवाल है तो इसमें भारतीय सड़क कांग्रेस की रिपोर्ट को ध्यान में रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि पर्यटक कारों की संख्या केवल चार धाम स्थलों के लिए है और इसका सेना से कोई लेना देना नहीं है।

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने गुरुवार को केंद्र सरकार के 2018 वाले एक आदेश को अप्रासंगिक बताते हुए कहा कि आज के हिसाब से भारतीय सेना की जरूरतों के लिए 5.5 मीटर चौड़ी सड़क पर्याप्त नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें देश की रक्षा करनी है और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सशस्त्र बलों को जो सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं, वह उन्हें जरूर मिले।  

उच्चाधिकार प्राप्त समिति(एचपीसी) की रिपोर्ट को लेकर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि क्या होता है जब आप तोपखाने और मिसाइल नहीं ले जा सकते? एचपीसी की रिपोर्ट का इससे कोई लेना-देना नहीं है। ये कहा जाए कि वहां भूस्खलन हो सकती है इसलिए कृपया ऐसा न करें। तो इससे क्या होगा? सेना को आपूर्ति कैसे मिलेगी? एचपीसी की रिपोर्ट बिल्कुल अलग माहौल के लिए  थी।

वहीं एनजीओ की तरफ से पेश हुए वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने कहा कि हम हिमालयी क्षेत्रों में मिसाइल लेने जैसे कई काम करना चाह रहे हैं। आप सड़क को जितना चाहें उतना चौड़ा कर सकते हैं, लेकिन असली मुद्दा यह है कि क्या हिमालय ऐसी स्थिति में है जहां वे इसे सहन कर सकते हैं या फिर वे टूट जाएंगे? आप हिमालय को ठीक नहीं कर सकते हैं। वे वही हैं जो पहले थे।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमारे देश की सबसे अच्छी रक्षा हिमालय कर सकता है। यदि उनके साथ छेड़छाड़ नहीं किया जाता है तो आने वाली पीढियां इसका प्रभाव देखेंगी। यदि सर्दियों में वर्षा और गंगा के प्रवाह में बाधा आती है तो जल सुरक्षा एक बड़ी समस्या होगी। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यदि आप मुझसे पूछें कि क्या चार धाम क्षेत्र में विकास रोका जाना चाहिए, तो मैं हां में जवाब दूंगा। इन स्थलों की शांति की बहाली आपके कंधों पर है।

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