केंद्र सरकार ने 1966 के गन्ना नियंत्रण आदेश को एक व्यापक नए नियामक ढांचे से बदलने का प्रस्ताव किया है। इसमें पहली बार एथनाल उत्पादन, डिजिटल अनुपालन और कारखानों की मंजूरी के लिए एक औपचारिक व्यवस्था को एक साथ लाया गया है। सरकार ने इस मसविदे पर 20 मई तक लोगों से सुझाव मांगे हैं।
केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 के मसविदे में पुराने कानून की बुनियादी संरचना को बरकरार रखा गया है। इसमें उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के नियम, गन्ने की आवाजाही पर नियंत्रण, 14 दिनों के भीतर भुगतान की समय सीमा और देरी से भुगतान पर 15 फीसद सालाना ब्याज शामिल है। हालांकि, इसमें पूरी तरह बदल चुके उद्योग के अनुरूप एक नया ढांचा तैयार किया गया है।
कानून में क्या बदल जाएगा?
वर्ष 1966 के कानून से सबसे महत्वपूर्ण बदलाव एथनाल को गन्ना नियामक ढांचे में स्पष्ट रूप से शामिल करना है और मसौदे में चीनी कारखाने की परिभाषा का विस्तार कर इसमें गन्ने के रस, सिरप, चीनी और मोलासेस से एथनाल उत्पादन को भी शामिल किया गया है। इसके लिए एक ठोस रूपांतरण सूत्र पेश किया गया है, जिसके तहत उत्पादन गणना करते समय 600 लीटर एथनाल को एक टन चीनी के बराबर माना जाएगा। केवल एथनाल बनाने वाली इकाइयां, जो अपने परिसर में गन्ना नहीं पेरती हैं, उन्हें प्रदर्शन बैंक गारंटी की आवश्यकता से छूट दी गई है। यह एकीकृत चीनी-सह-एथनाल मिलों पर नियंत्रण हल्का किए बिना एकल एथनाल क्षमता बढ़ाने के लिए एक सोची-समझी नीतिगत पहल है।
मसविदे की धारा 6ए से 6जी में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो पुराने आदेश में नहीं थे। इसमें नए कारखानों के लिए औपचारिक आइईएम-आधारित मंजूरी प्रक्रिया, न्यूनतम दूरी के नियम, प्रदर्शन बैंक गारंटी को बढ़ाकर दो करोड़ रुपए करना और प्रभावी कदमों तथा व्यावसायिक उत्पादन के लिए कड़ी समय सीमा तय करना।
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