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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से ऐन पहले फारूक अब्‍दुल्‍ला पर लगा PSA, बिना ट्रायल दो साल तक रखा जा सकता है नजरबंद

सरकार ने यह कदम ऐसे वक्त उठाया है, जब एमडीएमके के नेता वाइको ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर फारुख अब्दुल्ला को नजरबंदी से रिहा कर सुप्रीम कोर्ट में पेश करने की मांग की है।

farooq abdullahजम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारुख अब्दुला पर सरकार ने लगाया PSA एक्ट। (फाइल फोटो)

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला पर सरकार ने PSA (Public Safety Act) लगा दिया है। बता दें कि PSA एक्ट के तहत किसी भी व्यक्ति को सरकार अधिकतम 2 साल तक बिना किसी ट्रायल के हिरासत में रख सकती है। गौरतलब बात ये है कि सरकार ने यह कदम ऐसे वक्त उठाया है, जब एमडीएमके के नेता वाइको ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर फारुख अब्दुल्ला को नजरबंदी से रिहा कर सुप्रीम कोर्ट में पेश करने की मांग की है। रविवार की रात में फारुख अब्दुल्ला पर PSA एक्ट लगाया गया है।

बता दें कि जम्मू कश्मीर में पब्लिक सेफ्टी एक्ट साल 1978 में तत्कालीन शेख अब्दुल्ला की सरकार द्वारा लागू किया गया था। यह कानून सरकार को ताकत देता है कि वह बिना ट्रायल के किसी व्यक्ति को अधिकतम 2 साल तक हिरासत में रख सकती है। यह कानून शेख अब्दुल्ला सरकार ने तब लकड़ी तस्करों पर लगाम कसने के उद्देश्य से लागू किया था।

हालांकि काफी आलोचना के बाद भी यह कानून अभी तक लागू है। हालांकि साल 2010 में इस कानून में थोड़े बदलाव किए गए और इसकी कठोरता को कुछ कम किया गया। बदलावों के तहत पहली बार गलती करने वाले आरोपी को इस कानून के तहत अधिकतम 6 माह तक ही हिरासत में रखा जा सकता है। लेकिन ये भी प्रावधान है कि बार-बार गलती करने पर आरोपी की हिरासत को 2 साल के लिए भी बढ़ाया जा सकता है।

इसी बीच एमडीएमके नेता वाइको की याचिका पर भी उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सुनवाई की और इस पर केन्द्र और जम्मू कश्मीर सरकार से जवाब मांगा। वाइको ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि फारुख अब्दुल्ला को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए। अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा रद्द किए जाने के बाद से बीती 5 अगस्त से कथित रूप से हिरासत में हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे एवं न्यायमूर्ति एस ए नजीर की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की और अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की।

सुनवाई के दौरान वाइको ने कोर्ट में कहा कि वह पिछले चार दशकों से अब्दुल्ला के निकट मित्र हैं। वाइको ने दावा किया कि नेशनल कांफ्रेंस के नेता को ‘‘बिना किसी कानूनी अधिकार के अवैध हिरासत’’ में लेकर, उन्हें संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखा गया।

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