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चार राज्यों की राजमार्ग परियोजनाओं को गति देगा केंद्र, कोरोना महामारी के कारण ठप थीं; कई राज्यों में है तकनीकी बाधा

केंद्रीय सड़क व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 10 के तहत दिल्ली-हरियाणा राजमार्ग योजना के तहत 63.49 किलोमीटर लंबे राजमार्ग का सुधार होगा।

NHAIनई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सड़क व राजमार्ग मंत्री नीतिन गड़करी, डॉ. हर्षवर्धन और बाबा रामदेव। (फोटो- पीटीआई)

कोरोना विषाणु महामारी और तकनीकी बाधाओं के चलते देश के चार राज्यों में सुस्त पड़े राजमार्ग निर्माण कार्य अब तेजी से पूरे होंगे। इन योजनाओं के शुरू होने के बाद देश में दिल्ली बार्डर से हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के बीच आवागमन और बेहतर होगा। लोकसभा में केंद्रीय सड़क व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सांसद प्रवेश वर्मा द्वारा पूछे गए एक सवाल में यह जानकारी दी। गडकरी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 10 के तहत दिल्ली-हरियाणा राजमार्ग योजना के तहत 63.49 किलोमीटर लंबे राजमार्ग का सुधार होगा। इस योजना पर करीब 486 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च होने का अनुमान है।

अभी तक इस राजमार्ग पर 96.98 फीसद कार्य पूरा किया गया है। इस मार्ग में फगवाड़ा में 9.1 किलोमीट की शेष लंबाई में से 2.75 किलोमीटर की परियोजना का कार्य स्वतंत्र (स्टैंड अलोन) परियोजना के तहत सौंपा गया है। अभी इस मार्ग पर मंत्रालय ने रियायतीग्राही द्वारा टोल संग्रहण को निलंबित कर दिया है।

इसी प्रकार 2748 करोड़ रुपए की राजमार्ग 44 पर पानीपत-जांलधर की 288.55 किलोमीटर लंबाई की परियोजना पर भी मंत्रालय काम कर रहा है। इसका 96.73 फीसद कार्य पूरा हो चुका है। इस मार्ग पर भी टोल संग्रहण निलंबित है और परियोजना के आखिरी चरण का कार्य किया जा रहा है। मुकरबाचौक-पानीपत योजना का काम 67 फीसद पूरा हो चुका है। इसके तहत मुकरबा चौक से पानीतक तक के खंड को आठ लेन में तब्दील किया जाना है। 67 फीसद पूरी हो चुकी 70.50 किलोमीटर लंबाई की इस योजना पर करीब 2129 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए भी मंत्रालय प्राथमिकता के आधार पर बाकी काम कर रहा है।

मंत्रालय के मुताबिक राजमार्ग सुधार की ऐसी ही योजनााओं पर हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान में भी काम हो रहा है। कोरोनाकाल में पूर्णबंदी के कारण परियोजनाओं की प्रगति बाधित हुई थी। हालांकि सरकार ने महामारी काल में भी निर्माण की उच्च दर बनाए रखने की पहल की। इसके तहत निर्माण गति को बनाए रखने के लिए समय सीमा तीन से छ: माह बढ़ाने, नकदी प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए अनुबंध छूट समेत अन्य प्रावधान किए गए हैं। अब परियोजनाओं की निगरानी डिजिटल संवाद के जरिए की जा रही है।

यूपी-राजस्थान की परियोजनाओं पर हैं केंद्र की नजर
– गाजियाबाद-अलीगढ़ परियोजना : 126.3 किमी लंबाई। 1026 करोड़ रुपए अनुमानित लागत। फिलहाल एनएचआइ मुख्यालय के सीसीआई के पास विचाराधीन।

– बरेली-सितारगंज परियोजना : 74.46 किमी लंबाई। अनुमानित लागत 145 करोड़। काम उपयोगी सुविधाओं के स्थानांतरण से लटका।
-राज मार्ग 27 पर उत्तरी कोटा बाइपास : लंबाई 10.30 किमी। अनुमानित लागत 98 करोड़। लोक निर्माण विभाग इस पर काम कर रहा है। भूमि अधिग्रहण दरों के लिए मामला फंसा है।

– राजमार्ग 48 पर गुडगांव-कोटपुतली-जयपुर : लंबाई 225.60 किमी। अनुमानित लागत 3270 करोड़। वन भूमि, सिंचाई भूमि सौंपने की वजह से लटकी।

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