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कोरोना की उत्पत्ति के केंद्र को लेकर मचा राजनीतिक रार

एक शोध पत्र के मुताबिक हो सकता है वुहान का हुआनन सीफूड बाजार कोरोना विषाणु का केंद्र ना हो। इसमें 58 नए विषाणु के हैप्लोटाइप्स को एच1-एच58 नंबर दिए गए। इन्हें पांच समूहों- अ, इ, उ, ऊ और ए में बांटा गया है, जिनमें अ सबसे बड़ा और ए सबसे छोटा विषाणु है। हालांकि, ह्युवेई में सिर्फ समूह उ के कोरोना विषाणु का ही पता लगा है। अमेरिका में इन पांचों समूहों के विषाणु को देखा गया है।

दुनिया भर में इस विषाणु को लेकर कई शोध चल रहे हैं।

कोरोना विषाणु की उत्पत्ति के केंद्र को लेकर दुनिया में राजनयिक खींचतान शुरू हो गई है। अमेरिका और चीन इस मुद्दे पर गुत्थम-गुत्था नजर आ रहे हैं। अमेरिका ने इजराइल के एक पूर्व सैन्य अधिकारी की

कोरोना विषाणु को लेकर अमेरिका और चीन में भिड़ंत दिख रही है। चीन में कोरोना विषाणु के संक्रमण के मामलों में कमी आ रही है, वहीं अमेरिका समेत तमाम देशों में यह तेजी से फैल रहा है। कोरोना विषाणु को चीनी विषाणु कहे जाने और इसके लिए वुहान को कसूरवार ठहराने को लेकर चीन नाराज हो गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने शुक्रवार को दूसरी बार कोरोना वायरस को ‘वुहान विषाणु’ कहा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विषाणु से होने वाली बीमारी का आधिकारिक नाम कोविड-19 और विषाणु का नाम सार्स-कोवी-2 रखा था। बेजिंग व दुनिया भर के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोविड-19 के लिए अन्य किसी नाम इस्तेमाल करने से बचने के लिए कहा है। तर्क है कि वुहान से जोड़ने से चीन के नागरिकों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव भी बढ़ सकता है।

हाल में सिंगापुर में चीनी मूल के एक छात्र के साथ कोरोना विषाणु की वजह से नस्लीय हिंसा की घटना भी सामने आई थी। सीएनबीसी और फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में पोम्पियो ने कहा कि पहली बात यह है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने खुद कहा है कि विषाणु वुहान शहर से फैलना शुरू हुआ है। मेरे शब्दों को छोड़ दीजिए, उन्हीं के शब्दों पर गौर करिए।

इस बयान पर विवाद शुरू हुआ। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने इसे लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह महामारी वैश्विक चुनौती है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस विषाणु का जन्म चीन में ही हुआ है। दरअसल, फॉक्स न्यूज के टॉक शो ‘द फाइव’ में मांग की गई कि कोरोना विषाणु के लिए चीन आधिकारिक तौर पर पूरी दुनिया से माफी मांगे। इस मांग को लेकर चीनी मीडिया में नाराजगी जताई गई और विवाद शुरू हुआ।

दुनिया भर में इस विषाणु को लेकर कई शोध चल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस विषाणु की उत्पत्ति की जगह का पता लगाने के लिए ठोस व प्रामाणिक शोध किए जाने की जरूरत है। चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कोरोना से जुड़ी एक रिपोर्ट छापी है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में अभी तक कोविड-19 के कम से कम चार मामले मिले हैं, जिनकी उत्पत्ति का पता नहीं चला है।
हाल ही में ताइवान में एक लोकल टीवी शो में औषधि वैज्ञानिक पैन हुवेई जॉन्ग ने कहा कि अमेरिका में कोविड-19 के मामले देखें तो यहां चीन के मुकाबले नए कोरोना विषाणु के ज्यादा मल्टीपल जेनेटिक टाइप देखने को मिले हैं।

वुहान के वायरोलॉजिस्ट यांग झैंनक्यू के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने छापा है कि अमेरिका में इंफ्लुऐंजा से हुई मौत के कारणों का पता लगाने के लिए अभी और ज्यादा शोध की जरूरत है।

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