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पूर्व मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त बोले- नोटबंदी से काले धन पर नहीं लगी रोक, रिकॉर्ड रकम सीज

निवर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत 1 दिसंबर को अपने पद से रिटायर हो गए। आइडिया एक्सचेंज प्रोग्राम के दौरान उन्होंने ईवीएम, कालेधन, सोशल मीडिया जैसे मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

op rawatनिवर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत बातचीत के दौरान। (express photo)

निवर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत 1 दिसंबर को अपने पद से रिटायर हो गए और उनकी जगह सुनील अरोड़ा को नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है, जो कि 2 दिसंबर को अपना पदभार ग्रहण करेंगे। ओपी रावत का मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर कार्यकाल एक साल रहा और इस दौरान उन्होंने त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, कर्नाटक और अब के मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव कराए। हालांकि तेलंगाना और राजस्थान में अभी जल्द ही चुनाव होने हैं। इस दौरान द इंडियन एक्सप्रेस ने आइडिया एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत ओपी रावत से कई मुद्दों पर बातचीत की। जिनमें कालाधन, ईवीएम की धांधली, सोशल मीडिया का चुनावों पर प्रभाव आदि के मुद्दे प्रमुख हैं।

चुनावों में कालेधन का इस्तेमाल: चुनावों के दौरान कालेधन के इस्तेमाल की खूब चर्चा होती है। ऐसे में द इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा ने सवाल पूछा कि नोटबंदी को 2 साल पूरे हो चुके हैं। क्या इससे चुनावों के दौरान कालेधन के इस्तेमाल पर कोई प्रभाव पड़ा है? इस सवाल के जवाब में निवर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि नोटबंदी का चुनावों के दौरान कालेधन के इस्तेमाल पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। हमने हाल ही में 5 राज्यों के चुनावों के दौरान भी 200 करोड़ रुपए की रिकॉर्ड रकम सीज की है। इसका मतलब ये है कि चुनावों के दौरान जिस सोर्स से पैसा चुनावों में आ रहा है, वह बेहद प्रभावी है और नोटबंदी का उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा है।

ईवीएम में धांधलीः ईवीएम में धांधली की कथित खबरों को लेकर जब ओपी रावत से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हम सार्वजिक जगहों, जैसे मॉल्स, म्यूजियम आदि पर मतदाताओं को जागरुक करने के लिए कई कैंपेन चला रहे हैं। जिसमें मतदाताओं को ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के बारे में जानकारी दी जाती है। इस पूरी कवायद से मतदाताओं के बीच ईवीएम को लेकर विश्वास बनाया जा रहा है। ओपी रावत ने बताया कि देश की 99% राजनैतिक पार्टियां ईवीएम के पक्ष में हैं। जब हमने ईवीएम को चेक करने के लिए राजनैतिक पार्टियों को बुलाया था तो सिर्फ 2 राजनैतिक पार्टियां ही सामने आयीं थी और वो भी यह कहकर आयीं थी कि वह ईवीएम के बारे में सीखना चाहते हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी ईवीएम से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए गए हैं। ओपी रावत ने कहा कि भारतीय ईवीएम मशीन यूनिक है और इसे हैक नहीं किया जा सकता।

एकसाथ चुनावः  पीएम मोदी देश में केन्द्र और राज्यों के चुनाव एक साथ कराने की बात उठा चुके हैं। इस संबंध में जब ओपी रावत से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि भारत इसके लिए तैयार है। आजादी के बाद 1952,1957,1962 और 1967 में एकसाथ चुनाव कराए भी गए थे। लेकिन अब ऐसा कराने के लिए संविधान में बदलाव कर कुछ कानून बनाने होंगे। एक बार जब कानून बन जाएंगे तो इसके बाद पोलिंग मशीनरी और सुरक्षाबलों आदि की जरुरत पर विचार किया जाएगा। एक साथ चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को करीब 34 लाख ईवीएम मशीनों की दरकार होगी, जबकि अभी हमारे पास सिर्फ 17 लाख ईवीएम मशीनें हैं। इस तरह एक साथ चुनाव कराना संभव तो है, लेकिन इसके लिए कानून बनाना होगा और चुनाव का खर्च आदि काफी बढ़ सकते हैं।

चुनावों के दौरान सोशल मीडिया का प्रभावः चुनावों में सोशल मीडिया के पड़ रहे प्रभाव के सवाल में ओपी रावत ने कहा कि सोशल मीडिया चुनावों पर बहुत बड़ा असर डाल रहा है और ये दुनियाभर में हो रहा है। भारत में चुनावों के दौरान इसके प्रभाव को कम करने के लिए सोशल मीडिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों जैसे फेसबुक, ट्विटर, गूगल आदि से बातचीत की जा रही है। कंपनियों को कहा जा रहा है कि वह चुनावों के दौरान अपने प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल होने से रोकें और वह एडवर्टाइजमेंट, स्पॉन्सर्स आदि के नाम पर चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश को रोकें। कर्नाटक चुनावों के दौरान ऐसा किया गया था और इसका काफी सकारात्मक असर भी देखने को मिला था। अब 5 राज्यों के चुनावों में भी सोशल मीडिया को असर को कम रखने की कोशिश की गई है। हम एक सोशल मीडिया हब बनाकर इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

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