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आंखोंदेखी: पेड़ से टकरा कर आग का गोला बन गया था सीडीएस रावत का हेलिकॉप्टर, लपटों के साथ भागते अफसर कुछ ही कदम बाद जमीन पर गिर पड़े थे

एक चश्मदीद ने जानकारी दी कि सीडीएस जनरल रावत ने बताया कि उनके शरीर के निचले हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं। इसके बाद उन्हें चादर में लपेट कर एम्बुलेंस में ले जाया गया।

Bipin rawat, helicopter crashed
लैंडिंग स्थल से 10 किलो मीटर पहले ही हेलीकॉप्टर अचानक से क्रैश कर गया(फोटो सोर्स: PTI)।

देश के सबसे बड़े सैन्य अफसर और पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की बुधवार को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस हादसे में उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 सेना के जवानों की जान चली गई। बता दें कि जनरल रावत जिस हेलिकॉप्टर Mi-17V5 में सवार थे, वो दुनिया के बेहतरीन सैन्य हेलिकॉप्टर्स में शामिल है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हेलिकॉप्टर के क्रैश होने के बाद तक जनरल बिपिन रावत जीवित थे। घटनास्थल पर Mi-17V5 के मलबे से बाहर निकाले जाने पर उन्होंने धीमी आवाज में हिंदी में अपना नाम भी बताया था। बचाव दल में शामिल एक सदस्य ने इसकी जानकारी दी है। जनरल रावत के साथ ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को भी निकाला गया। जिनका अभी इलाज चल रहा है। गौरतलब है कि ग्रुप कैप्टन हादसे में जिंदा बचे एकमात्र व्यक्ति है। इस हेलिकॉप्टर में कुल 14 लोग सवार थे, जिसमें से 13 की मृत्यु हो चुकी है।

चश्मदीद ने बताई आंखदेखी: हादसे के पास वाले क्षेत्र में रहने वाली चित्रा स्वामी ने आंखोदेखी बताते हुए कहा कि, हमने देखा कि हेलिकॉप्टर नीचे आया और एक बड़े पेड़ से टकराया और तेज धमाका हुआ। हेलिकॉप्टर से आग की लपटे निकलने लगी। मैंने अपने पड़ोसी को बुलाया और घटनास्थल की तरफ गये।

वहां हमने देखा कि हेलिकॉप्टर से एक शख्स आग की लपटों के साथ बाहर की तरफ भागने की कोशिश कर रहा था। लेकिन वह जमीन पर गिर पड़ा। चित्रा ने बताया कि हेलिकॉप्टर से 3-4 और लोग बाहर निकले, वो सभी आग में बुरी तरह झुलसे हुए थे।

हिंदी में की थी बात: बचाव दल का हिस्सा रहे वरिष्ठ फायरमैन और बचावकर्मी एनसी मुरली ने जानकारी दी है कि उन्होंने दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला। इनमें से एक सीडीएस बिपिन रावत भी थे। मुरली ने बताया कि बाहर निकालने के बाद उन्होंने रक्षा कर्मियों से हिंदी में धीमे स्वर में बात की और अपना नाम बताया। हालांकि अस्पताल ले जाने के दौरान ही रास्ते में उनकी मौत हो गई।

मुरली ने बताया कि बाहर निकाले गये दोनों गंभीर रूप से झुलस गए थे। सीनियर फायरमैन ने कहा कि मलबे के बीच हथियार पड़े होने की वजह से सावधानी बरतनी पड़ रही थी। जिससे राहत कार्य में देरी हो रही थी।

वहीं बीबीसी हिंदी के एक आर्टिकल के मुताबिक 68 साल के कृष्णास्वामी हादसे की जगह के क़रीब रहते हैं। उन्होंने बताया “मैं घर के लिए लकड़ी लेने बाहर निकला था। तभी हमें ज़ोर की आवाज़ सुनाई दी।” उन्होंने कहा, “धमाका इतना तगड़ा था कि बिजली के खंबे तक हिल गए। पेड़ उखड़ गए। हमें धमाके के बाद तेज धुआं दिखाई दिया।

कृष्णास्वामी ने कहा, “धुएं की वजह से अंधेरा छा गया। पेड़ के ऊपर आग की लपटें उठ रही थीं। एक आदमी को जलते हुए देखा फिर वो नीचे गिर गया। इसे देख मैं पूरी तरह से हिल गया। मेरे लिए यह बहुत भयावह था। मैं घबरा गया था और दौड़ता हुआ घर वापस आया। और बाकी लोगों को इसकी जानकारी दी। उनसे मैंने कहा कि वो दमकल और पुलिस को बुलाएं। कुछ देर बाद वहां अधिकारी भी आ गए।”

बता दें कि सीडीएस बिपिन रावत अन्य सैन्य अफसरों के साथ वेलिंगटन में डिफेंस स्टाफ कॉलेज एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जा रहे थे। उनके साथ चालक दल के सदस्य सहित 14 लोग हेलीकॉप्टर में सवार थे। लैंडिंग स्थल से 10 किलो मीटर पहले ही उनका हेलीकॉप्टर अचानक से क्रैश कर गया। जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई। 

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