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CDS बिपिन रावत ने बताया, कहां भारत से आगे है चीन, बोले- कर सकता है साइबर अटैक

सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि देश परोक्ष युद्ध से लेकर हाइब्रिड और गैर-संपर्क पारंपरिक युद्ध जैसे विभिन्न सुरक्षा खतरों तथा चुनौतियों का सामना कर रहा है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: April 8, 2021 9:26 AM
CDS General, Bipin Rawatसीडीएस जनरल बिपिन रावत। (एक्सप्रेस फोटो)

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने बुधवार को कहा कि चीन भारत के खिलाफ साइबर हमला करने में सक्षम है और प्रौद्योगिकी के मामले में दोनों देशों की क्षमता में बड़ा फर्क है। रावत ने विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में अपने संबोधन में कहा कि भारत के नेतृत्व ने देश की सुरक्षा और गरिमा पर अकारण हमले के मद्देनजर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हितों को बरकरार रखने में राजनीतिक इच्छाशक्ति एवं दृढ़ निश्चय का प्रदर्शन किया है।

सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच क्षमताओं के बीच अंतराल बढ़ा है और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में चीन भारत के मुकाबले अग्रणी हो गया है। सीडीएस जनरल ने कहा, “हम जानते हैं कि चीन हम पर साइबर हमला करने में सक्षम है और वह हमारे सिस्टम को बड़े पैमाने पर तबाह कर सकता है। हम ऐसा सिस्टम तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं जिससे साइबर प्रतिरक्षा सुनिश्चित होगी।”

‘भारत को भी विकसित करनी होगी साइबर क्षमताएं’: उनकी इस टिप्पणी को पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा गतिरोध के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। सीडीएस ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत और चीन के बीच सबसे बड़ा अंतराल साइबर क्षेत्र में हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश ने नयी प्रौद्योगिकी पर काफी निवेश किया है।

उन्होंने कहा कि देश परोक्ष युद्ध से लेकर हाइब्रिड और गैर-संपर्क पारंपरिक युद्ध जैसे विभिन्न सुरक्षा खतरों तथा चुनौतियों का सामना कर रहा है। जनरल रावत ने कहा कि भारत को अपने मित्रों में किसी तरह की असुरक्षा उत्पन्न किए बिना इस तरह की चुनौतियों से सख्ती एवं प्रबलता से निपटने की क्षमताएं विकसित करनी होंगी।

‘सुरक्षा समाधानों के लिए पश्चिम की तरफ देखने से बचें’: उन्होंने अपने संबोधन में भारत की सेना के विकास का जिक्र किया और कहा, “हमें देश को सुरक्षा समाधानों के लिए पश्चिमी जगत की तरफ देखने से बचना चाहिए। इसकी जगह विश्व को बताना चाहिए कि वह आए और विविध चुनौतियों से निपटने में भारत के व्यापक अनुभव से सीखें।”

जनरल रावत ने कहा कि भारत के बाहरी खतरों से प्रभावी कूटनीति और पर्याप्त रक्षा क्षमता से निपटा जा सकता है। साथ ही कहा कि मजबूत राजनीतिक संस्थान, आर्थिक वृद्धि, सामाजिक सौहार्द, प्रभावी कानून व्यवस्था तंत्र, त्वरित न्यायिक राहत एवं सुशासन आंतरिक स्थिरता के लिए पहली आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा, “हमारे नेतृत्व ने देश की सुरक्षा, मूल्यों और गरिमा पर अकारण हमले के मद्देनजर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हितों को बरकरार रखने में राजनीतिक इच्छाशक्ति एवं दृढ़ निश्चय का प्रदर्शन किया है।”

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