इस साल राजनीतिक आलोचना के केंद्र में रही सीबीआइ - Jansatta
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इस साल राजनीतिक आलोचना के केंद्र में रही सीबीआइ

राज्यों में भाजपा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के ठिकानों की तलाशियों तथा विवादास्पद मामलों पर कुछ खास कदम न उठाने को लेकर इस साल सीबीआइ राजनीतिक आलोचनाओं के केंद्र में रही..

Author नई दिल्ली | December 28, 2015 1:03 AM
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई).

राज्यों में भाजपा के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के ठिकानों की तलाशियों तथा विवादास्पद मामलों पर कुछ खास कदम न उठाने को लेकर इस साल सीबीआइ राजनीतिक आलोचनाओं के केंद्र में रही। हालांकि छोटा राजन को देश वापस लाना सीबीआइ की बड़ी उपलब्धि रही। सनसनीखेज शीना बोरा हत्याकांड की जांच सीबीआइ को सौंपे जाने से महाराष्ट्र सरकार का इस जांच एजेंसी में विश्वास जाहिर हो गया। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के घर पर उनकी बेटी की शादी वाले दिन छापा मारने को लेकर सीबीआइ को कांग्रेस के गुस्से का सामना करना पड़ा। हालांकि सीबीआइ ने दावा किया कि वह शादी का कोई बड़ा समारोह नहीं था और उस समारोह का कोई खास प्रचार भी नहीं किया गया था।

इस कदम को प्रतिशोधी बताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह ‘कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नफरत वाले और राजनीतिक प्रतिशोध के एजंडे का हिस्सा है और भारत के वरिष्ठतम मुख्यमंत्री के घर पर सीबीआइ के छापों के साथ आज यह चरम पर पहुंच गया है।’ ऐसी ही तलाशी दिल्ली सचिवालय के उस तल पर की गई, जिस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दफ्तर है। तलाशी से आप सरकार को केंद्र पर निशाना साधने मौका मिला। हालांकि सीबीआइ ने दावा किया कि भ्रष्टाचार के मामले में ली गईं तलाशी मुख्यमंत्री के सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर तक ही सीमित थीं। मुख्यमंत्री के दफ्तर की तलाशी का सीबीआइ ने खंडन किया। दूसरी ओर केजरीवाल ने आरोप लगाया कि राजेंद्र के बहाने उनके दफ्तर की फाइलें देखी गईं।

सीबीआइ ने दिल्ली सरकार के एक अन्य प्रधान सचिव एस पी सिंह के खिलाफ श्रमशक्ति अनुबंधकर्ताओं से कथित तौर पर रिश्वत लेने का मामला भी दर्ज किया। सीबीआइ ने दावा किया कि सिंह के पास से बहुत अधिक धन, शराब की 300 बोतलें, सोना और महंगी घड़ियां बरामद हुई हैं।

एजंसी ने पूर्व कपड़ा मंत्री शंकरसिंह वाघेला और छह अन्य के खिलाफ मुंबई में एक प्रमुख संपत्ति को कम दामों में एक निजी कंपनी को बेच देने के मामले में भी प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक का नाम भी शामिल है।

एजंसी ने वांछित गैंगस्टर राजन को इंडोनेशिया के बाली से लाने का श्रेय लेते हुए राजनीतिक आलोचनाओं से बचने की कोशिश की। राजन को इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर लाया गया था। उसे आॅस्ट्रेलिया से बाली लौटने पर वहां गिरफ्तार किया गया था।

सीबीआइ ने 30 नवंबर तक 978 से ज्यादा मामले दर्ज किए जो कि वर्ष 2014 में दर्ज 1174 मामलों और प्राथमिक जांचों की तुलना में कम थे। एजंसी ने 30 नवंबर तक 761 मामलों में जांच पूरी भी कर ली थी।
एजंसी ने पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन के खिलाफ जांच को गति देने की कोशिश करते हुए उनके एक अतिरिक्त निजी सचिव को और उनके परिवार द्वारा संचालित निजी टीवी चैनल के दो लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि पूछताछ हेतु मारन की हिरासत का अनुरोध उच्चतम न्यायालय ने ठुकरा दिया।

शीना बोरा हत्याकांड का मामला मुंबई पुलिस से सीबीआइ के पास आया। सीबीआइ हत्या की इस पहेली से जुड़े सभी टुकड़ों को जोड़कर देखने की कोशिश कर रही है ताकि तीन साल पहले अंजाम दिए गए इस घृणित अपराध के पीछे के मकसद का पता लगाया जा सके। पूर्व मीडिया दिग्गज और शीना के सौतेले पिता पीटर मुखर्जी को सीबीआइ द्वारा गिरफ्तार किए जाने से मामले में एक नया मोड़ आ गया। शीना की मां इंद्राणी, इंद्राणी का पूर्व पति संजीव खन्ना (शीना का पिता नहीं) और चालक श्यामवर राय पहले से ही सीबीआइ की हिरासत में हैं।

इसके अलावा जो मामला सीबीआइ को चर्चा के केंद्र में लेकर आया, वह था कर्नाटक के आईएएस अधिकारी डी के रवि की आत्महत्या का मामला। सीबीआइ जांच से साबित हुआ कि उन्होंने अपने बैच की महिला अधिकारी को 44 बार फोन नहीं किया था। हालांकि इस मामले की जांच अभी जारी है। एजंसी ने अभिनेत्री जिया खान की आत्महत्या मामले में आरोपपत्र भी दायर कर दिया है। एजंसी ने जिया को आत्महत्या के लिए कथित रूप से उकसाने के लिए उसके पूर्व प्रेमी और साथी अभिनेता सूरज पंचोली को नामजद किया है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर कार्यवाही करते हुए सीबीआइ ने 400 श्रद्धालुओं के कथित बंध्याकरण के सिलसिले में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया।

सारदा मामले में तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी को उनके कार्यकाल समाप्ति से काफी पहले ही सेवा से हटने का आदेश दे दिया गया। गोस्वामी को यह आदेश इसलिए दिया गया क्योंकि उन्होंने केंद्र में कांग्रेस के मंत्री रह चुके सिंह की गिरफ्तारी को कथित तौर पर टालने की कोशिश की थी।

उच्चतम न्यायालय ने कुख्यात व्यापमं मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी, जिसके बाद एजेंसी ने राज्य की पुलिस और एसआइटी द्वारा दर्ज 100 से भी अधिक मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली।

आइडीबीआई बैंक से लिए ऋण का भुगतान कथित तौर पर न करने को लेकर किंगफिशर चर्चा में आ गई। तब सीबीआइ ने इस विमान सेवा के निदेशक विजय माल्या को पूछताछ के लिए एजंसी मुख्यालय में बुलाया। एजंसी ने मामला दर्ज करने के बाद उनके दफ्तर और आवास की तलाशी भी ली। इसी बीच सीबीआइ जांच वाले कई बड़े मामलों में दोषसिद्धियां भी हुईं।

सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज लि. के तत्कालीन अध्यक्ष बी रामलिंगा राजू को सत्यम घोटाले में दोषी ठहराया गया। कॉरपेरेट जगत के सबसे बड़े घोटालों में से एक इस घोटाले की जांच और सुनवाई आठ साल तक चली। राजू और उसके सह आरोपी को सात साल की कैद की सजा सुनाई गई। दूसरी ओर बाहुबली नेता डी पी सिंह को दादरी के तत्कालीन विधायक मोहिंदर सिंह भाटी की हत्या से जुड़े मामले में सीबीआइ की एक विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, उनके बेटे और पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला तथा राज्य के कुछ वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों को दिल्ली उच्च न्यायालय से राहत मिल गई। अदालत ने उनकी सजा को घटा दिया।

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