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तकरार के चार दिन बाद ममता के पूर्व सांसद को CBI का समन, शारदा घोटाले में करोड़ों डकारने के हैं आरोप

तृणमूल कांग्रेस केे पूर्व सांसद कुणाल घोष को सीबीआई द्वारा समन जारी किया गया है। उनेक उपर शारदा चिटफंड घोटाले में करोड़ों रुपये डकारने का आरोप है।

तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद कुणाल घोष। (Express photo)

पश्चिम बंगाल में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने पहुंची सीबीआई टीम को हिरासत में लिए जाने और उसके बाद शुरू हुए विवाद के चार दिन बाद ममता के पूर्व सांसद कुणाल घोष को सीबीआई का समन मिला है। उनके उपर शारदा घोटाले में करोड़ों रुपये डकारने का आरोप है। यह समन सीबीआई द्वारा 10 अफसरों की टीम के गठन के तुरंत बाद जारी किया गया है। उन्हें रविवार (10 फरवरी) को पूछताछ के लिए सीबीआई के समक्ष शिलांग में हाजिर होने को कहा गया है। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यही वही पूर्व टीएमसी सांसद कुणाल घोष हैं, जिन्होंने मुकुल रॉय और 12 अन्य लोगों को शारदा घोटाले में उनकी भूमिका के लिए फंसाया था। इसके बाद मुकुल रॉय को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच एजेंसी को केस ट्रांसफर किए जाने के बाद मात्र एक बार ही सीबीआई ने उनसे पूछताछ की।

सीबीआई ने शारदा चिटफंड स्कैम की जांच के लिए 10 अधिकारियों की टीम गठित की है, जो गुरुवार को दिल्ली से कोलकाता के लिए रवाना हुए। इस टीम में एक एसपी रैंक के ऑफिसर जगरुप गुसिन्हा, दो डिप्टी एसपी, तीन एएसपी और चार इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी हैं। इनमें से कुछ ऑफिसर शिलांग जाएंगे और कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ में शामिल होंगे। कुमार के उपर शारदा और रोज वैली चिटफंड स्कैम से जुड़े कुछ दस्तावेजों को गायब करने का आरोप लगा है। सीबीआई ने राजीव कुमार पूछताछ के लिए 9 फरवरी को बुलाया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि ममता बनर्जी की पार्टी के कई सांसद-विधायक शारदा घोटाले में शामिल रहे हैं। आरोप तो यहां तक हैं कि ममता के एक तत्कालीन सांसद ने शारदा समूह से दो करोड़ सालाना ली और करीब 1500 पत्रकारों को नौकरियां बांटी। उस आरोपी पूर्व सांसद का नाम कुणाल घोष है। कुणाल घोष को एक मीडिया समूह का सीईओ नियुक्त किया था। तब घोष को प्रति माह 16 लाख रुपये का मासिक भत्ता दिया गया था। इस मीडिया हाउस में शारदा ने 988 करोड़ रुपये का निवेश किया था 1,500 पत्रकारों को काम पर रखा था। साल 2013 तक यह मीडिया हाउस पांच भाषाओं में आठ समाचार पत्र छाप रहा था।

शारदा समूह की कहानी साल 2000 के आसपास शुरू हुई थी। तब राज्य के एक व्यवसायी सुदीप्तो सेन ने शारदा समूह की स्थापना की थी और कंपनी को सिक्योरिटी मार्केट रेग्यूलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के तहत सूचीबद्ध करा उसे सामूहिक निवेश योजना के रूप में वर्गीकृत करवाया था। इसके बाद शारदा समूह ने छोटे-छोटे निवेशकों से कम निवेश में मोटा रिटर्न देने के नाम पर पैसे की उगाही की। इसके लिए शारदा समूह ने कंपनियों का एक समूह बनाया और पोंजी योजना की तरह, एजेंटों के बड़े नेटवर्क के सहारे कम समय में 2500 करोड़ रुपये जमा कर लिए। इस काम के एवज में एजेंटों को 25% से भी ज्यादा कमीशन दिए गए थे।

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