ताज़ा खबर
 

कोयला घोटाले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिलीप रे को हुई 3 साल की सजा, तुरंत जमानत पर हुए रिहा

कोयला ब्लॉक आवंटन का यह मामला साल 1999 का है। दिलीप रे के अलावा सीबीआई की विशेष अदालत ने दो अन्य दोषियों को भी 3-3 साल जेल की सजा सुनायी है।

dilip ray, coal scam, cbi,पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिलीप रे। (फाइल फोटो)

कोयला ब्लॉक आवंटन में हुई गड़बड़ी के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिलीप रे को 3 साल जेल की सजा सुनायी है। दिलीप रे को बीते दिनों कोर्ट ने दोषी करार दिया था। कोयला ब्लॉक आवंटन का यह मामला साल 1999 का है। दिलीप रे के अलावा सीबीआई की विशेष अदालत ने दो अन्य दोषियों को भी 3-3 साल जेल की सजा सुनायी है।

वहीं अब खबर आयी है कि सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिलीप रे समेत अन्य दोषियों को जमानत भी दे दी है। कोर्ट ने सभी को 1-1 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी है। कोर्ट ने 25 नवंबर तक हाईकोर्ट में भी अपील करने की इजाजत दे दी है।

जिस वक्त यह घोटाला हुआ था, तब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार सत्ता में थी और दिलीप रे कोयला राज्य मंत्री के पद पर थे। इससे पहले सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने अक्टूबर माह में दिलीप रे को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में दोषी करार दिया था और उनकी सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। रे को दोषी करार देते हुए कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि रे ने नीतियों में बिना किसी कानूनी आधार के काफी छूट दीं और अपने पद की ताकत का गलत इस्तेमाल किया।

कोयला ब्लॉक आवंटन का यह मामला झारखंड, गिरीडीह के बृहमदिहा कोल ब्लॉक से जुड़ा है। दिलीप रे के अलावा इस मामले में कोर्ट ने कोयला ब्लॉक पाने वाली कंपनी केस्ट्रोन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के निदेशक महेंद्र कुमार, केस्ट्रोन माइनिंग लिमिटेड, तत्कालीन अतिरिक्त कोयला सचिव, 14वीं स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन प्रदीप कुमार बनर्जी और कोयला मंत्रालय के तत्कालीन सलाहकार नित्यानंद गौतम भी शामिल हैं।

कोर्ट ने रे समेत अन्य आरोपियों को आईपीसी की धारा 120बी, 409, 420 और धारा 13(1) (c) और 13 (1) के तहत दोषी ठहराया था। हालांकि दिलीप रे के वकील अभिषेक सिंघवी ने अपने बचाव में कोर्ट को बताया था कि रे का कोयला ब्लॉक आवंटन में कोई भूमिका नहीं है और ना ही स्क्रीनिंग कमेटी में उनका कोई रोल है। स्क्रीनिंग कमेटी ने ही बृहमादिहा कोयला ब्लॉक आवंटन के बारे में फैसला किया था।

दिलीप रे ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल के संस्थापक सदस्य हैं और राज्य के पूर्व सीएम बीजू पटनायक के काफी करीबी माने जाते थे। हालांकि बाद में वह पार्टी बदलकर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2019 के आम चुनाव से पहले रे ने भाजपा का भी साथ छोड़ दिया था। दिलीप रे 2014 में ओडिसा के राउरकेला से विधायक भी रह चुके हैं।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 Coronavirus के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर सकता है वायु प्रदूषण, वैज्ञानिकों ने जताई आशंका
2 J&K में महबूबा का विरोध! लाल चौक पर नहीं लहरा पाए तिरंगा, तो PDP दफ्तर जाकर फहराया
3 Amazon को अंतरिम राहत, RIL-Future सौदे पर लगी रोक
ये पढ़ा क्या?
X