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विजय माल्‍या पर CBI का शिकंजा, 1 लाख ई-मेल जब्‍त, बढ़ सकती है मनमोहन सरकार के मंत्रियों की मुश्किलें

जांच एजेंसी, संयुक्त प्रगतिशील संगठन (यूपीए) के कार्यकाल में वित्त मंत्रालय से किंगफिशर को दी गई मदद की जांच कर रही है। वह इसके जरिए नई चार्जशीट दाखिल करना चाहती है।

लंदन स्थित कोर्ट के बाहर भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या। (फोटोःरॉयटर्स)

भारतीय बैंकों से 9000 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज लेकर ब्रिटेन भागे शराब कारोबारी विजय माल्या पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का शिकंजा कसता जा रहा है। जांच-पड़ताल के दौरान सीबीआई ने माल्या से जुड़े तकरीबन एक लाख ई-मेल जब्त किए हैं, जो कि 2008 से 2013 के बीच भेजे गए थे। सीबीआई ने इसके अलावा मामले में एक नया एंगल भी निकाला है। जांच एजेंसी, संयुक्त प्रगतिशील संगठन (यूपीए) के कार्यकाल में वित्त मंत्रालय से किंगफिशर को दी गई मदद के पहलू पर जांच कर रही है। वह इसके जरिए नई चार्जशीट दाखिल करना चाहती है। ऐसे में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तत्कालीन सरकार के मंत्रियों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

‘इकनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई ने इसी क्रम में वित्त मंत्रालय से पूछताछ भी की थी, जबकि उसने मामले से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज भी जुटाए हैं। सूत्रों की मानें तो फिलहाल इन फाइलों की जांच की जा रही है, जिसके आधार पर आगे अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी।

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बिजनेस अखबार की वेबसाइट को इस मामले से जुड़े अंदरखाने के लोगों ने बताया कि कुछ अधिकारियों से तो पूछताछ की जा चुकी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे और लोग से सवाल किए जाएंगे। सीबीआई जांच में माल्या के घर से किया गया पत्र व्यवहार और उनके द्वारा भेजे गए लोगों को ई-मेल सबसे अहम माने जा रहे हैं। ज्यादातर ई-मेल्स माल्या और उनकी कंपनी के सलाहकार एके आडवाणी, हरीश भट्ट और ए रघुनाथन के बीच हैं। सीबीआई इसके अलावा तत्काल संयुक्त सचिव (बैंकिंग) अमिताभ वर्मा को लेकर भी जांच कर रही है।

सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसी ने माल्या से जुड़े जो एक लाख ई-मेल जब्त किए हैं, उनमें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), वित्त मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय से बातचीत के भी कुछ दस्तावेज शामिल हैं। इन मेल्स में ज्यादातर बातचीत बैंक लोन और हवाई जहाजों के लिए उधार पर ईंधन पाने को लेकर की गई थी।

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