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सीबीआई ने नोएडा के पूर्व अभियंता यादव सिंह के खिलाफ दर्ज किए दो मामले

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के तत्कालीन मुख्य अभियंता यादव सिंह और उनके परिवार के सदस्यों के..

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के तत्कालीन मुख्य अभियंता यादव सिंह और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार व आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति अर्जित करने को लेकर मंगलवार को दो अलग-अलग मामले दर्ज किए। जांच एजंसी ने नोएडा में सिंह के निवास एवं दफ्तर समेत 14 ठिकानों की मंगलवार को तलाशी ली।

सीबीआइ सूत्रों ने बताया कि पहला मामला सिंह, उनकी पत्नी कुसुम लता, बेटी गरिमा भूषण और बेटे सन्नी यादव व राजेंद्र मिनोचा के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति अर्जित करने को लेकर आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है। आरोप है कि नवंबर 2014 में आयकर विभाग को तलाशी के दौरान सिंह के कई परिसरों से विसंगतिपूर्ण कई दस्तावेज एवं आयकर रिटर्न कथित रूप से मिले थे।

सीबीआइ प्रवक्ता के मुताबिक आईटीआर और अन्य संबंधित दस्तावेजों को खंगालने से कथित रूप से खुलासा हुआ है कि 2009-2014 की अवधि के दौरान तत्कालीन मुख्य अभियंता की कुल संभावित बचत 1.70 करोड़ (करीब) थी जबकि उनके पास 3.60 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति थी। इसके अलावा उनके एक सहयोगी के पास से 10 करोड़ रुपए मिले थे और वे भी कथित रूप से सिंह के ही थे।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के निर्देश पर मामले दर्ज किए गए हैं। लखनऊ पीठ ने सीबीआइ को आरोपियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों व सभी लेन-देन के सिलसिले में उनके द्वारा कथित रूप से अर्जित बिना हिसाब-किताब वाले धन व तत्संबंधित व्यक्तियों एवं निकायों की जांच करने को कहा था। दूसरा मामला सिंह के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत है। आरोपियों ने अज्ञात निजी कंपनियों के साथ कथित आपराधिक साजिश की और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बगैर ही ठेके दिए व उन्हें एवं खुद को करोड़ों रुपए का अनुचित लाभ पहुंंचाया।

प्रवक्ता ने बताया कि स्थानीय पुलिस ने भी 13 जून 2012 को नोएडा (उत्तरप्रदेश) के सेक्टर 39 के थाने में प्राथमिकी (नंबर 371) दर्ज की थी। प्राथमिकी का समापन मामले को बंद करने के रूप में हुआ और स्थानीय पुलिस ने 30 जनवरी 2014 को निचली अदालत में अंतिम रिपोर्ट दायर की। जिसे अदालत ने 27 नवंबर 2014 को स्वीकार कर लिया।

हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के निलंबित महानिरीक्षक अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर की याचिका पर सीबीआइ जांच का आदेश दिया था। नूतन ठाकुर ने आरोप लगाया था कि यादव सिंह मुलायम सिंह यादव, मायावती और वर्तमान अखिलेश यादव के शासनकालों में मलाईदार पदों पर रहे और सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है।

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