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पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में शहाबुद्दीन की भूमिका की जांच करे सीबीआई: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस को भी निर्देश दिया कि वह पत्रकार राजदेव रंजन के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराए।
Author नई दिल्ली | September 23, 2016 20:03 pm
राजद के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन (FILE PHOTO)

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार (23 सितंबर) को सीबीआई को निर्देश दिया कि वह पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड में अपनी जांच आगे बढ़ाए। न्यायालय ने बिहार पुलिस को भी निर्देश दिया कि वह रंजन के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराए। रंजन के परिवार ने दावा किया था कि उसे राजद के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन से जान का खतरा है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति सी नागप्पन की पीठ ने रंजन की पत्नी की याचिका पर शहाबुद्दीन और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े बेटे एवं बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव से जवाब भी मांगा है। रंजन की पत्नी ने अपने पति के हत्याकांड का मुकदमा बिहार के सीवान से बाहर स्थानांतरित कर दिल्ली लाने की गुहार भी न्यायालय से लगाई है।

पिछले दिनों तेज प्रताप की एक तस्वीर कुछ अखबारों में छपी थी जिसमें उसे कथित गैंग्स्टर शहाबुद्दीन के दो शार्प शूटरों में से एक के साथ देखा गया था। पीठ ने कहा, ‘इसके मद्देनजर हम निर्देश देते हैं कि सीबीआई अपनी जांच आगे बढ़ा सकती है, लेकिन इसे अंतिम रूप नहीं दे सकती और वह 17 अक्तूबर को इस अदालत के सामने अपनी जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करेगी।’ अपने निर्देश में पीठ ने यह भी कहा, ‘सीवान जिले के पुलिस अधीक्षक याचिकाकर्ता और उनके परिवार को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराएंगे।’ रंजन की पत्नी आशा रंजन ने पीठ के सामने दावा किया कि ‘राजनीतिक प्रभाव’ और ‘शहाबुद्दीन के डर’ से सीबीआई ने अब तक अपनी जांच शुरू भी नहीं की है, क्योंकि राज्य की मशीनरी इस हिस्ट्रीशीटर को बचा रही है।

साल 2014 में उच्चतम न्यायालय में बिहार सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे के मुताबिक शहाबुद्दीन के खिलाफ 58 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जब वकील ने कहा कि मुकदमा दिल्ली स्थानांतरित किया जाना चाहिए, इस पर पीठ ने कहा, ‘सीबीआई अपनी जांच वहां पूरी करेगी। आखिरकार, उनका पक्ष सुनने के बाद, हम विचार करेंगे कि मुकदमा स्थानांतरित किया जाना चाहिए कि नहीं। अभी सुनवाई तो चल नहीं रही है। उन्हें जांच करने दीजिए।’ वकील ने न्यायालय को बताया कि बिहार पुलिस ने रंजन हत्याकांड में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन शहाबुद्दीन के दोनों कथित शार्प शूटरों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘शहाबुद्दीन के डर से सीबीआई को मामले की जांच शुरू करने की भी हिम्मत नहीं हुई। दो शार्प शूटरों – मोहम्मद कैफ और मोहम्मद जावेद – को शहाबुद्दीन एवं बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के साथ देखा गया था। राज्य की पूरी मशीनरी शहाबुद्दीन को बचाने में लगी हुई है।’ गौरतलब है कि कैफ ने दो दिन पहले ही सिवान की एक अदालत में आत्मसमर्पण किया है। वकील ने कहा कि पत्रकार रहे रंजन ने शहाबुद्दीन के ‘आपराधिक कुकृत्यों’ के बारे में कई खबरें लिखी थीं और बिहार में राजद-जदयू गठबंधन के सत्ता में आने के बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुकदमे को सिवान से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा, ‘शहाबुद्दीन का खौफ इतना ज्यादा है कि एक मुकदमे में उसे दोषी करार देने वाले सुनवाई अदालत के जज ने भी अपना तबादला सिवान से पटना करने का अनुरोध किया है।’

उच्चतम न्यायालय की नोटिस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए तेज प्रताप ने शुक्रवार को पटना में कहा कि भाजपा के उन नेताओं को भी ऐसे ही नोटिस जारी करना चाहिए जिनकी तस्वीरें मामले के एक संदिग्ध और अन्य अपराधियों के साथ सामने आई थीं। आशा रंजन के वकील किसलय पांडेय ने यह भी कहा कि रंजन हत्याकांड में ‘भगोड़ा’ घोषित किए गए कैफ और जावेद को ‘पनाह’ देने को लेकर शहाबुद्दीन और तेज प्रताप के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक ‘बदकिस्मत और लाचार विधवा’ इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही है। उन्होंने कहा कि कैफ ने तो आत्मसमर्पण कर दिया, लेकिन जावेद की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है।

पांडेय ने कहा कि जेल से शहाबुद्दीन की रिहाई के बाद आशा और उनके दो बच्चे लगातार खौफ में जीने को मजबूर हैं। वकील ने कहा कि यदि जांच और सुनवाई बिहार में हुई तो शहाबुद्दीन एवं अन्य ‘गवाहों को आतंकित करेंगे’, जिसके कारण उन्हें इंसाफ नहीं मिल पाएगा। अपने आदेश में पीठ ने वकील की ओर से दी गई दलीलों का जिक्र करते हुए कहा, ‘राजनीति के अपराधीकरण पर बहुत बातें होती रही हैं और कई फैसलों में इस अदालत ने इसकी निंदा भी की है, मौजूदा मामला इस बाबत परेशान करने वाला दिखाई देता है, क्योंकि शहाबुद्दीन और तेज प्रताप, जो पार्टी पद और कार्यपालिका में पद पर बैठे हैं, फिर भी अपने आप को ऐसे असामाजिक तत्वों के साथ जोड़ने से पहले जरा भी नहीं सोचते और कभी-कभी तो उनकी मदद भी करते हैं।’

पीठ ने कहा, ‘याचिका के अध्ययन पर यह प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहने वाली याचिकाकर्ता, अपने पति को खोने और सिवान जिले में हाल में हुई घटनाओं के बाद, लगातार खौफ में है।’ न्यायालय ने कहा, ‘‘कहा गया है कि साहस ही सभी सद्गुणों की जननी है और साहसी इंसान हमेशा अपनी गरिमा बनाए रख सकता है। लेकिन, कभी-कभी चंद ताकतवर लोगों की ओर से ऐसे हालात पैदा कर दिए जाते हैं जिससे किसी नागरिक के मन में खौफ पैदा हो जाता है और उस खौफ में गरिमा की भावना को कम करने की क्षमता होती है।’ पीठ ने कहा, ‘याचिका में इस पर भी जोर दिया गया है कि ऐसे हालात में अदालत सक्षम अधिकारी को उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दे सकती है, यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह सोचना मुश्किल है कि वह किस खतरे में पड़ जाएं।’ पुलिस सुरक्षा मांगे जाने पर पीठ ने सिवान के पुलिस अधीक्षक और संबंधित पुलिस थाने को निर्देश दिया कि वे रंजन के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराएं।

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