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सीबीआई कार्यालय में है वास्‍तु दोष! तीन निदेशकों की कुर्सी जाने पर अधिकारियों की कानाफूसी

दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीबीआई मुख्यालय का उद्घाटन 2011 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था। 2011 के बाद से अब तक तीन सीबीआई निदेशक जांच के घेरे में आ चुके हैं। इनमें एपी सिंह (2010-12), रंजीत सिन्हा (2012-14) और आलोक वर्मा (2017-19) शामिल हैं। केवल अनिल सिन्हा (2014-2016) इससे अछूते रहे।

Author January 14, 2019 2:26 PM
दिल्‍ली स्थित केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो का कार्यालय (Photo : Express Archive)

आलोक वर्मा प्रकरण के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अधिकारियों के बीच कार्यालय में वास्तु दोष को लेकर कानाफूसी है। इसकी वजह है सीबीआई के तीन निदेशकों का जांच के घेरे में आना। अन्य अधिकारियों का भविष्य क्या होगा, इसे लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। दिल्ली के लोधी रोड स्थित सीबीआई मुख्यालय का उद्घाटन 2011 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था। 2011 के बाद से अब तक तीन सीबीआई निदेशक जांच के घेरे में आ चुके हैं। इनमें एपी सिंह (2010-12), रंजीत सिन्हा (2012-14) और आलोक वर्मा (2017-19) शामिल हैं। केवल अनिल सिन्हा (2014-2016) इससे अछूते रहे। बता दें कि पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच पिछले वर्ष भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोप का मामला सामने आने के बाद से सीबीआई विवाद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। वर्मा और अस्थाना के बीच संघर्ष को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने दोनों को पिछले 23-24 अक्टूबर की देर रात लंबी छुट्टियों पर भेज दिया था। वर्मा ने सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिस पर बीती 8 जनवरी को शीर्ष अदालत ने उन्हें फिर से पद पर बहाल कर दिया था।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने वर्मा को पद से हटाने का फैसला लिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्मा को भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोप के चलते पद से हटाया गया। वहीं, वर्मा को पद से हटाने का फैसला लेने वाली चयन समिति में विपक्ष के सदस्य कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने फिर सवाल उठाया कि सरकार ने समिति के साथ जस्टिस एके पटनायक की रिपोर्ट साझा नहीं की।

जस्टिस एके पटनायक ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा वर्मा पर लगे आरोपों की जांच की देखरेख की थी। खड़गे ने कहा कि सरकार ने पूछने के बावजूद रिपोर्ट साझा नहीं की जोकि गलत है। जस्टिस पटनायक ने बीते शुक्रवार को द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर कोई बड़ा सबूत नहीं था। उन्होंने कहा कि सीवीसी की बात आखिरी नहीं हो सकती है। द संडे एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक जस्टिस पटनायक की रिपोर्ट को चयन समिति में सीजेआई रंजन गोगोई के नॉमिनी जस्टिस एके सीकरी के साथ भी साझा नहीं किया गया था।

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