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इमिग्रेशन ने बताया- कल आएगा माल्या, सीबीआई बोली- पकड़िएगा मत, बस सूचित कर दीजिएगा

सीबीआई अधिकारियों से इस मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने बताया कि सीबीआई के पास उस वक्त विजय माल्या के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं थे।

विजय माल्या के खिलाफ जारी लुक आउट नोटिस के स्तर को कम कर दिया गया था (file pic)

विजय माल्या द्वारा भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात के खुलासे के बाद अब इस मामले में कई और खुलासे भी हुए हैं। पता चला है कि 3 साल पहले सीबीआई ने विजय माल्या के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया था, जिसमें सीबीआई ने इमीग्रेशन डिपार्टमेंट को कहा था कि यदि विजय माल्या देश से बाहर जाने की कोशिश करे तो उसे हिरासत में ले लिया जाए। लेकिन बाद में इस लुक आउट नोटिस को कमजोर कर दिया गया। नए नोटिस के अनुसार, सीबीआई ने इमीग्रेशन डिपार्टमेंट को विजय माल्या को हिरासत में लेने के बजाए सिर्फ उसकी गतिविधियों पर ध्यान देने और सीबीआई को सूचित करने की बात कही थी। इंडियन एक्सप्रेस ने जब सीबीआई अधिकारियों से इस मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने बताया कि सीबीआई के पास उस वक्त विजय माल्या के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं थे।

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने 29 जुलाई, 2015 को माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी और अपराधिक साजिश रचने की तहत मामला दर्ज किया था। सीबीआई के अनुसार, उस वक्त एफआईआर सिर्फ सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर दर्ज की गई थी और तब तक किसी भी बैंक ने इस मामले में शिकायत दर्ज नहीं करायी थी। सूत्रों के अनुसार, 16 अक्टूबर, 2015 को सीबीआई ने माल्या के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया था और इमीग्रेशन अधिकारियों को माल्या को हिरासत में लेने के कहा था। उस वक्त माल्या ब्रिटेन में था। बाद में 23 नवंबर को इमीग्रेशन के अधिकारियों ने सीबीआई को बताया कि माल्या अगले दिन आने वाला है। लेकिन तब सीबीआई अधिकारियों ने लुक आउट नोटिस को कमजोर करते हुए इमीग्रेशन अधिकारियों को सिर्फ माल्या की गतिविधियों पर नजर रखने और सीबीआई को सूचित करने के लिए कहा। सीबीआई का कहना है कि माल्या उस वक्त तक उनके साथ जांच में पूरा सहयोग कर रहा था और उसके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत भी उनके पास नहीं थे। हालांकि उस वक्त सीबीआई को इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं था कि माल्या देश छोड़कर जा सकता है।

बता दें कि विजय माल्या 2 मार्च, 2016 को देश छोड़कर फरार हो गया था। अब भारत सरकार ब्रिटेन से उसके प्रत्यर्पण की कोशिशों में जुटी है। बुधवार को विजय माल्या ने अपने एक बयान में कहा कि उसने भारत छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी। माल्या के इस बयान के बाद विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरना शुरु कर दिया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अरुण जेटली के इस्तीफे की मांग कर दी है। हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विजय माल्या के बयान को झूठ करार दिया है।

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