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नए विवाद में CBI के अंतरिम निदेशक, अपनी ही जन्‍मतिथि को लेकर दे दी यह चुनौती

नागेश्वर राव की सीबीआई में नियुक्ति साल 2015 में हुई थी। उस वक्त सीबीआई की काउंटर इंटेलीजेंस यूनिट के हेड अमिताभ सिंह ने नागेश्वर राव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उनकी नियुक्ति का विरोध किया था।

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव। (EXPRESS PHOTO)

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव की जन्मतिथि को लेकर विवाद हो गया है। दरअसल नागेश्वर राव ने अपनी ही जन्मतिथि को चुनौती दी है। एम. नागेश्वर राव का कहना है कि वह चैलेंज के साथ कह सकते हैं कि उनके पिता ने उनकी जन्मतिथि गलत दर्ज करायी है। राव के अनुसार, उनकी जन्मतिथि 6 जुलाई, 1961 है, जबकि उनके पिता ने इसे 6 जुलाई 1960 दर्ज कराया है। रोचक बात ये है कि नागेश्वर राव के पिता का अब निधन हो चुका है। एम नागेश्वर राव का जन्म तेलंगाना के वारंगल जिले के मंगपेट गांव में हुआ था।

नागेश्वर राव की पहचान एक सख्त अधिकारी की है। नागेश्वर राव को बेहतरीन काम के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार, स्पेशल ड्यूटी मेडल सहित ओडिशा राज्यपाल मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। ओसमानिया यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में परास्नातक नागेश्वर राव ने 1986 में आईपीएस बनने से पहले आईआईटी मद्रास में बतौर रिसर्चर भी काम किया था। नागेश्वर राव को कई भाजपा नेताओं और संघ का करीबी माना जाता है। बता दें कि नागेश्वर राव का नाम कई विवादों में भी आ चुका है। नागेश्वर राव की सीबीआई में नियुक्ति साल 2015 में हुई थी। उस वक्त सीबीआई की काउंटर इंटेलीजेंस यूनिट के हेड अमिताभ सिंह ने नागेश्वर राव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उनकी नियुक्ति का विरोध किया था। लेकिन तत्कालीन सीबीआई निदेशक अनिल सिन्हा ने इस विरोध को दरकिनार कर दिया था। चेन्नई में नियुक्ति के दौरान भी स्टेट बैंक की एक जमीन की खरीद-फरोख्त के एक मामले में भी शिकायत हुई थी। इसी आधार पर डीएमके चीफ एमके स्टालिन ने भी नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाए जाने का विरोध किया था।

प्रशांत भूषण ने भी नागेश्वर राव पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उल्लेखनीय है कि मोईन कुरैशी केस के चलते सीबीआई में इन दिनों काफी उठा-पटक का दौर चल रहा है। सीबीआई के दोनों शीर्ष अधिकारियों पर रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं और सरकार ने फिलहाल दोनों को हटा दिया है। इसके बाद ही नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाया गया है। हालांकि इस फैसले के खिलाफ सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। फिलहाल सीबीआई के दोनों शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ सीवीसी द्वारा जांच की जा रही है।

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