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अटल सरकार ने भी हटाया था सीबीआई डायरेक्‍टर, तब रिलायंस पर रेड के बाद हुआ था एक्‍शन

सूत्र बताते हैं कि तब धीरूभाई अंबानी ने पीएम से शिकायत की थी कि ऑफिशियल सेक्रेट एक्ट का मामला गृह मंत्रालय के तहत आता है तो फिर पीएमओ और डीओपीटी के तहत आने वाली सीबीआई ने कैसे उसके ठिकानों पर रेड मारी?

Author October 26, 2018 8:23 PM
अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई इन दिनों विवादों में है। केंद्र सरकार ने सीबीआई में नंबर वन और नंबर दो के अधिकारियों के बीच जंग छिड़ने के बाद दोनों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया है। हालांकि, सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना नहीं हटाए गए हैं लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब सीबीआई डायरेक्टर को हटाया गया है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी सीबीआई निदेशक त्रिनाथ मिश्रा को पद से हटाया जा चुका है। बात नवंबर 1998 की है, जब सीबीआई की टीम ने धीरूभाई अंबानी की कंपनी रिलायंस के ठिकानों पर छापेमारी की थी। 19 नवंबर, 1998 को सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर डीएल लाल की निगरानी में मुंबई के पॉस इलाके कफ परेड भवन और दिल्ली के ली मरेडियन होटल पर एकसाथ छापा मारा गया था। हालांकि, अंबानी परिवार को पहले ही इस रेड की भनक लग गई थी क्योंकि 21 दिनों पहले ही सीबीआई ने दिल्ली में रिलायंस के बड़े अधिकारी सुब्रमण्यम के ठिकानों पर भी रेड मारी थी।

ये छापेमारी ऑफिशियल सेक्रेट से जुड़ा था। सीबीआई इस बात की तहकीकात कर रही थी कि क्या भारत सरकार से जुड़ी कोई फाइल रिलायंस के दफ्तर में है या नहीं। सीबीआई को इसकी सूचना मिली थी कि सरकार के नीतिगत फैसलों से जुड़ी फाइल रिलायंस के पास है। छापेमारी के बाद सीबीआई की तरफ से दावा किया गया था कि पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े कागजात बरामद हुए हैं। हालांकि, रिलायंस सीबीआई रेड से इनकार करता रहा लेकिन बाद में उसने भी यह बात कबूल कर ली थी कि हां, उसके ठिकानों पर सीबीआई रेड पड़ी थी। तत्कालीन सूत्रों के मुताबिक जब रिलायंस के ठिकानों पर सीबीआई ने रेड मारी थी, तब धीरूबाई अंबानी ने सीधे पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को फोन लगा दिया।

सूत्र बताते हैं कि तब धीरूभाई अंबानी ने पीएम से शिकायत की थी कि ऑफिशियल सेक्रेट एक्ट का मामला गृह मंत्रालय के तहत आता है तो फिर पीएमओ और डीओपीटी के तहत आने वाली सीबीआई ने कैसे उसके ठिकानों पर रेड मारी? इस छापेमारी से पहले त्रिनाथ मिश्रा ने सरकार को विश्वास में नहीं लिया था। इसके चंद दिनों बाद मिश्रा को पद से हटा दिया गया था। जून 2013 में ओपेन मैग्जीन में छपे एक लेख के मुताबिक तब त्रिनाथ मिश्रा ने लिखा था कि उन्हें कहा गया था कि इस केस में ऐसा कीजिए। जब उन्होंने मना किया था तो कहा गया था कि देख लीजिए। बतौर मिश्रा, उन्होंने आखिरकार ये कहा कि मुझसे ऐसा नहीं होगा माफ कीजिए। इसके बाद उनकी सीबीआई डायरेक्टर पद से छुट्टी कर दी गई थी।

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से पहले इंदर कुमार गुजराल सरकार ने भी तत्कालीन सीबीआई निदेशक जोगिंदर सिंह को साल भर के अंदर ही पद से हटा दिया था। तब आरोप लगे थे कि बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में आरोपी बनाने की वजह से गुजराल सरकार ने जोगिन्दर सिंह को पद से हटाया है। उनकी जगह आर सी शर्मा को सीबीआई का निदेशक बनाया गया था। सीबीआई ने 23 जून 1997 को चारा घोटाले में लालू समेत 25 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था। इसके सात दिन बाद 30 जून, 1997 को जोगिन्दर सिंह को सीबीआई निदेशक पद से हटाकर गृह मंत्रालय में विशेष सचिव बना दिया गया था।

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