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CBI प्रमुख का पद संभालने के बाद आलोक वर्मा ने पहले ट्रांसफर रोके और अब किए तबादले

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, पांच अधिकारियों में जेडी अजय भटनागर, डीआईजी एमके सिन्हा, डीआईजी तरुण गौबा, जेडी मुरुगेसन और एडी एके शर्मा शामिल हैं।

Author Updated: January 10, 2019 6:30 PM
केंद्र सरकार ने रिश्वतखोरी के आरोपों पर सीबीआई डायरेक्टर को इससे पहले फोर्स लीव पर भेजा था। (फाइल फोटोः पीटीआई)

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) प्रमुख का पद संभालने के बाद आलोक वर्मा ने गुरुवार (10 जनवरी, 2019) को कुछ और अधिकारियों के तबादला कर दिए। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, वर्मा ने पांच अधिकारियों के तबादले किए, जिनमें जेडी अजय भटनागर, डीआईजी एमके सिन्हा, डीआईजी तरुण गौबा, जेडी मुरुगेसन और एडी एके शर्मा के नाम हैं। रोचक बात है कि इन पांचों में एमके सिन्हा वह अफसर हैं, जिन्होंने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी में नंबर-दो अधिकारी राकेश अस्थाना (स्पेशल डायरेक्टर) की जांच से इन्कार कर दिया था।

दरअसल, अस्थाना के खिलाफ जांच की निगरानी कर रहे एजेंसी के डीआईजी एम के सिन्हा ने जांच का जिम्मा संभालने से खुद को अलग कर लिया था। न्यूज एजेंसी भाषा से अधिकारियों ने कहा, “पद संभालने वाले सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के तबादलों के ताजा आदेश में सिन्हा को बैंकिंग, रक्षा एवं धोखाधड़ी शाखा (बीएसएफसी) और ‘एसी तीन’ इकाई का जिम्मा सौंपा गया था।

यही इकाई अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में जांच कर रही है। सिन्हा ने बीएसएफसी इकाई का जिम्मा संभाल लिया, लेकिन वर्मा और अस्थाना के बीच जारी टकराव को लेकर हालिया घटनाक्रम के कारण उन्होंने अस्थाना मामले की जांच कर रही ‘एसी तीन’ इकाई से खुद को अलग कर लिया।”

इससे पहले, वर्मा ने तत्कालीन अंतरिम निदेशक एम.नागेश्वर राव के जारी किए अधिकतर ट्रांसफर आदेशों को निरस्त कर दिया था। बुधवार (नौ जनवरी, 2019) को वर्मा ने फोर्स लीव के बाद लगभग 77 दिनों बाद कार्यभार संभाला था। बता दें कि घूस के आरोपों पर आलोक वर्मा को केंद्र सरकार ने जबरन छुट्टी पर भेज रखा था। उनकी जगह नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बनाया गया था। पर मंगलवार को मोदी सरकार के उसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया। हालांकि, वर्मा की दफ्तर में वापसी तो हुई, लेकिन फिलहाल वह अहम नीतिगत फैसले नहीं ले सकेंगे।

ऐसा तब तक रहेगा, जब तक पीएम के नेतृत्व वाली उच्चाधिकार समिति उन पर फैसला नहीं ले लेती। इस समिति में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई, उनके प्रतिनिधि और सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता होगा। वर्मा के भविष्य का फैसला करने के लिए गुरुवार को इस उच्चाधिकार समिति ने दूसरी बार बैठक की। समिति के अन्य सदस्यों में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और न्यायमूर्ति ए के सीकरी हैं। न्यायमूर्ति सीकरी देश के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की तरफ से उपस्थित हुए। अधिकारियों के अनुसार, पैनल की बुधवार को हुई बैठक बेनतीजा रही थी। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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