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कार सेवकों के वेश में आतंकियों ने गिराया बाबरी ढाँचा, ख़ुफ़िया रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने नहीं लिया था ऐक्शन- जज ने फैसले में लिखा

न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई का आपराधिक साजिश रचने का आरोप 5 दिसंबर 1992 को स्थानीय खूफिया एजेंसियों द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट के कारण कमजोर हो गया था।

babri demolition case decision lal krishna advaniकोर्ट ने बाबरी विध्वंस मामले में आपराधिक साजिश की बात से इंकार कर दिया है। (एक्सप्रेस फोटो)

अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी 32 अभियुक्तों को बरी कर दिया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार यादव ने अपने फैसले में आरोपियों द्वारा विवादित ढांचा गिराने के लिए कोई साजिश रचने की बात को नकार दिया और सरकार पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा कि विवादित ढांचा गिराए जाने में पाकिस्तानी एजेंसियों के शामिल होने की खूफिया रिपोर्ट के बावजूद सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि ‘आरोपियों के खिलाफ सीबीआई का आपराधिक साजिश रचने का आरोप 5 दिसंबर 1992 को स्थानीय खूफिया एजेंसियों द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट के कारण कमजोर हो गया था। खूफिया रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी के सदस्य विवादित स्थल में घुसपैठ कर सकते हैं और ढांचे को गिरा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट में कहा गया था कि, “पाकिस्तान में बना विस्फोटक दिल्ली होते हुए अयोध्या पहुंच गया है। वहीं दूसरी रिपोर्ट के अनुसार, करीब 100 देश-विरोधी लोग, जिनमें जम्मू कश्मीर के ऊधमपुर इलाके से भी कई लोग अयोध्या आए।”

कोर्ट ने कहा कि “अहम खूफिया रिपोर्ट मिलने के बावजूद सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया। अभियोजन पक्ष के गवाह ने भी स्वीकार किया है कि समाज विरोधी और आतंकी कारसेवकों के भेष में विवादित स्थल पर पहुंचे थे, जिनके चलते विवादित ढांचा गिराया गया। ऐसा ही खूफिया रिपोर्ट में भी कहा गया है।”

अपने फैसले में सीबीआई की विशेष अदालत के जज ने कहा कि सीबीआई इस मामले में निश्चयात्मक साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। गवाहों के बयान से यह स्पष्ट होता है कि अशोक सिंघल कारसेवकों को विवादित ढांचा गिराने से रोक रहे थे क्योंकि वहां भगवान राम की मूर्तियां भी रखी थी।

अदालत ने अखबार की खबरों को साक्ष्य मानने से इंकार कर दिया। जज ने कहा कि अखबारों में छपी खबरों की मूल प्रति संकलित नहीं की गई और कोर्ट में सिर्फ अखबार की कटिंग को पेश किया गया।

कोर्ट ने ये भी कहा कि पेश की गई वीडियो कैसेट्स को भी सील नहीं किया गया था और इनमें भी काफी एडीटिंग पायी गई। इसी तरह साध्वी ऋतंभरा के भाषण के टेप को भी सील नहीं किया गया। कोर्ट ने ये भी माना कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास था और कई तो घटनास्थल पर भी मौजूद नहीं थे।

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