ताज़ा खबर
 

CBI केसः CJI का सवाल- छुट्टी पर डायरेक्टर को भेजने से पहले सेलेक्शन कमेटी से क्यों नहीं ली गई सलाह?

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) विवाद में गुरुवार (छह दिसंबर) को सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई हुई।

CBI Case, CBI Controversy, CBI Director, Alok Verma, Force Leave, Narendra Modi Government, Decision, SC, Hearing, CJI, Ranjan Gogoi, Question, Difficulty, Consult, Selection Committee, Divest, Power, CBI Director, CBI News, New Delhi, India News, National News, Hindi Newsपीएम मोदी, मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस सीकरी के बीच दूसरी बैठक में भी नहीं निकला हल

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) विवाद में गुरुवार (छह दिसंबर) को सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई ने सवाल उठाया कि वर्मा को फोर्स लीव पर भेजने से पहले सरकार ने सेलेक्शन कमेटी से क्यों नहीं पूछा? ऐसा करने में उसे क्या दिक्कत थी। बकौल गोगोई, “सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विवाद आधी रात को नहीं हुआ था। ऐसे में सरकार ने चयन समिति से सलाह-मशविरा किए बगैर सीबीआई डायरेक्टर को अचानक हटाने का फैसला क्यों लिया?”

उन्होंने आगे सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा- आखिर सरकार को 23 अक्टूबर की आधी रात को किस चीज ने प्रेरित किया था, जो उसने सीबीआई डायरेक्टर से उनके अधिकार छीन (अस्थाई तौर पर) लिए थे। वर्मा जब कुछ ही महीनों में रिटायर होने वाले हैं, तो फिर कुछ और महीने तक इंतजार क्यों नहीं किया गया और इस संबंध में चयन समिति की राय क्यों नहीं ली गई।

जवाब में मेहता बोले, “केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) इस मामले में नतीजे पर पहुंची कि उस दौरान असाधारण परिस्थितियां पैदा हो गई थीं, जिनके लिए असाधारण उपाय अपनाने पड़ते हैं। सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारी (वर्मा और राकेश अस्थाना) आमने-सामने आ गए थे। वे अन्य गंभीर मामलों की जांच कराने के बजाय एक-दूसरे के खिलाफ ही मामलों की जांच करा रहे थे।”

वहीं, अटॉर्नी जनरल के.के.वेणुगोपाल ने कोर्ट में कहा, “वर्मा का ट्रांसफर नहीं हुआ है। उनकी तरफ से यह बनावटी तर्क है कि उनको ट्रांसफर किया गया। असल में वह ट्रांसफर नहीं था। दोनों ही अधिकारियों से उनके प्रभार और अधिकार छीन लिए गए थे।”

बता दें कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के डायरेक्टर और दूसरे नंबर के अधिकारी राकेश अस्थाना इन (स्पेशल डायरेक्टर) दिनों फोर्स लीव पर चल रहे हैं। दोनों ने एक दूसरे के ऊपर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों के आरोप सामने आने के बाद जमकर बवाल मचा और संस्थान की छवि पर भी प्रभाव पड़ा।

केंद्र ने इसी बात का हवाला देते हुए सीवीसी की सिफारिशों पर इन दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया था। वर्मा की जगह पर नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाया गया था। हालांकि, इस फैसले पर बाद में सीबीआई के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक मामले की जांच चलेगी।

उधर, वर्मा के वकील फली नरीमन ने कहा- कैसे भी हालात होते, उन्हें चयन समिति से पूछना चाहिए था। इस मामले में ट्रांसफर का वह मतलब नहीं है जो कि निकाला जा रहा है। एक जगह से दूसरी जगह भेजने के अलावा भी ट्रांसफर के कई मतलब होते हैं। संविधान के अनुसार जिस तरह सीजेआई की जगह पर कार्यवाहक सीजेआई नहीं हो सकता। वैसी ही स्थिति सीबीआई निदेशक के मामले में भी है।

Next Stories
1 बुलंदशहर हिंसा: ‘मारो-मारो, इसकी बंदूक निकालो’, इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या के आखिर खौफनाक पल
2 मिशेल: UAE से मोदी राज में तीसरा प्रत्यर्पण, मनमोहन काल में हुए थे 9
3 IRCTC Train 18: पहली बार इस रूट पर चलेगी देश की सबसे तेज ट्रेन, प्लेन जैसी यात्रा का होगा अनुभव
ये पढ़ा क्या?
X