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MP-MLA की संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक न करे चुनाव आयोग, सीबीडीटी की सलाह

साल 2013 में सीबीडीटी ने चुनाव आयोग के अनुरोध पर सभी उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामे की स्क्रूटनी (छानबीन) करने का फैसला किया था। इसमें यह पता करना था कि उम्मीदवार ने चुनावी हलफनामे में अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा सही दिया है या नहीं।

Election Commission, Political Party, Political parties in India, Elections Indai, CBDT, Note Ban, Party Fund, Party Donation, RTI, Electoral Reform, India, Jansattaचुनाव आयोग के दफ्तर की तस्वीर।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि सांसद या विधायकी के चुनाव में उम्मीदवारों द्वारा हलफनामे में दिए गए संपत्ति के ब्यौरे को सार्वजनिक नहीं किया जाय। दरअसल, पिछले साल नवंबर 2017 और इस साल अप्रैल में चिट्ठी लिखकर चुनाव आयोग ने सीबीडीटी से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा था कि क्या आयकर महानिदेशक (जांच) द्वारा उम्मीदवारों की संपत्ति की छानबीन रिपोर्ट को सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत आयोग सार्वजनिक कर सकता है। इंडियन एक्सप्रेस ने उस चिट्ठी के आधार पर लिखा है कि आयोग ने तर्क दिया था कि चूंकि सत्यापन रिपोर्ट एक जांच रिपोर्ट नहीं है इसलिए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 24 के तहत उसे प्रकट करने से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है। आयोग का यह भी कहना था कि कुछ संगठनों को इस कानून के तहत छूट हासिल है। इसमें आयकर महानिदेशक (डीजीआईटी) भी शामिल है।

चुनाव आयोग का यह भी कहना है कि उम्मीदवारों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना आम मतदाताओं के लिए हितकर है। इसके साथ ही इन सूचनाओं के आधार पर चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों के लिए जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 125ए के तहत प्राथमिकी दर्ज कराना भी आसान होगा अगर चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी ने गलत चुनावी हलफनामा सौंपा है। हालांकि, सीबीडीटी ने पिछले महीने अपने जवाब में आयोग को लिखा है कि सत्यापन रिपोर्ट का भी खुलासा करना व्यवहारिक नहीं है क्योंकि यह आयकर अधिनियम की धारा 138 का उल्लंघन है। बता दें कि आयकर अधिनियम की धारा 138 किसी भी आयकर दाता का विवरण सार्वजनिक करने से न केवल रोकता है बल्कि ऐसा करनेवालों को दंडित करना का भी प्रावधान करता है।

दरअसल, साल 2013 में सीबीडीटी ने चुनाव आयोग के अनुरोध पर सभी उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामे की स्क्रूटनी (छानबीन) करने का फैसला किया था। इसमें यह पता करना था कि उम्मीदवार ने चुनावी हलफनामे में अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा सही दिया है या नहीं। साथ ही उसका विवरण आयकर को सौंपे पुराने विवरण से मिलता है या नहीं। हालांकि, सीबीडीटी को सभी उम्मीदवारों के विवरण की छानबीन नहीं करना था। आयोग के साथ सीबीडीटी ने तय किया था कि जिस उम्मीदवार का हलफनामा छानबीन के लिए भेजा जाएगा, उसे ही सीबीडीटी देखेगी। पिछले दिनों इसी तरह एक उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में कुल पांच करोड़ की संपत्ति का खुलासा किया था लेकिन उसने अपने पैन नंबर का जिक्र नहीं किया था।

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