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कावेरी जल विवाद: अलग-अलग दावों के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तमिलनाडु-कर्नाटक

20 सितंबर को सुनाए गए आदेश में शीर्ष कोर्ट ने कर्नाटक को 27 सितंबर तक हर दिन तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का 6000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का निर्देश दिया था।
Author नई दिल्ली | September 26, 2016 23:13 pm
सुप्रीम कोर्ट के कर्नाटक सरकार को कावेरी नदी से जल छोड़ने के आदेश के खिलाफ बेंगलुरु में भड़की हिंसा में जलकर खाक हुई लॉरी। उसके आगे सफाई करती नगर निगम की एक महिला कर्मचारी। (REUTERS/Abhishek N. Chinnappa/14 Sep, 2016/File)

कर्नाटक सरकार ने सोमवार (26 सितंबर) को उच्चतम न्यायालय से कावेरी नदी का प्रतिदिन छह हजार क्यूसेक जल तमिलनाडु के लिए छोड़ने के उसके आदेश में संशोधन का अनुरोध करके कहा कि उसके जलाशयों में पर्याप्त जल नहीं है। दोनों राज्य अपनी अपनी चिंताओं को लेकर नई कानूनी लड़ाई में उलझ गए हैं। कर्नाटक ने शीर्ष अदालत के 20 सितंबर के आदेश में संशोधन का अनुरोध किया जबकि तमिलनाडु ने आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय और कावेरी जल विवाद निपटारा न्यायाधिकरण (सीडब्ल्यूडीटी) के निर्देशों का पालन किए जाने तक उसके पड़ोसी राज्य को नहीं सुना जाना चाहिए। इससे पहले, कर्नाटक ने कहा कि वह विभिन्न आधारों पर तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है जिसमें एक कारण यह है कि उसके जलाशयों में पर्याप्त जल नहीं है और इसलिए वह आदेश में संशोधन चाहता है।

शीर्ष अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर प्रभावित तमिलनाडु ने कहा कि कर्नाटक राज्य अपने कारण से न्यायाधीश के रूप में व्यवहार कर रहा है और इस अदालत के आदेश का पालन करने से इंकार करने के साथ इस अदालत के सामने मामला विचाराधीन होने के बावजूद पानी छोड़ना सुनिश्चित करने में जानबूझकर नाकाम रहा है। तमिलनाडु ने अपनी याचिका में कहा कि इस मामले में संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए इस अदालत के आदेश का सम्मान तथा पालन नहीं किया गया। तमिलनाडु ने कहा, ‘यह दोहराया जाता है कि कर्नाटक राज्य और इसके तंत्र आदेश का पालन करने को बाध्य हैं और ऐसा करने में नाकाम रहना अदालत के 20 सितंबर तथा पुराने आदेशों की अवमानना होगी।’ तमिलनाडु और कर्नाटक की याचिकाओं पर मंगलवार (27 सितंबर) को सुनवाई हो सकती है। शीर्ष अदालत ने 20 सितंबर को कर्नाटक को निर्देश दिया था कि वह 27 सितंबर तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन छह हजार क्यूसेक जल छोड़े, जो निगरानी समिति द्वारा तय मात्रा से दोगुना है।

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