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कावेरी पर मचे बवाल से PM नरेंद्र मोदी दुखी, कहा- हिंसा से हो रहा है गरीब का नुकसान

कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक में जारी हिंसा और तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों राज्यों के लोगों से संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है।

Author नई दिल्ली/बेंगलुरु। | September 13, 2016 5:22 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (FILE PHOTO)

कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक में जारी हिंसा और तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों राज्यों के लोगों से संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है। साथ ही नागरिक जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखने के लिए कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘कावेरी के पानी के बंटवारे पर जिस तरह के हालात कर्नाटक और तमिलनाडु में बने हैं, वो बहुत दुखद हैं। मुझे व्यक्तिगत पीड़ा है।’ किसी भी समस्या का हल हिंसा से नहीं निकाला जा सकता। लोकतंत्र में समाधान संयम और आपसी बातचीत से ही निकलता है।

पीएम मोदी ने आगे लिखा- ‘इस विवाद का हल केवल कानूनी दायरे में ही संभव है। कानून तोड़ना विकल्प नहीं हो सकता। पिछले दो दिन से जिस तरह की हिंसा और आगजनी हो रही है उसमें नुकसान किसी गरीब का ही हो रहा है, हमारे देश की ही संपत्ति का हो रहा है।’ पीएम मोदी ने कर्नाटक और तमिलनाडु की जनता से अपील करते हुए कहा कि संवेदनशीलता दिखाने के साथ ही अपने नागरिक कर्तव्यों को भी याद रखें। मुझे भरोसा है कि आप राष्ट्रहित और राष्ट्रनिर्माण को सर्वोपरि समझेंगे और हिंसा, तोड़फोड़-आगजनी के बजाय संयम, सद्भावना और समाधान को प्राथमिकता देंगे।

गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद को लेकर बेंगलुरु में तनाव की स्थिति बनी हुई है। सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए शहर में 15000 सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। पुलिस ने हिंसा को लेकर 300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। हिंसा में सोमवार रात पुलिस फायरिंग में एक शख्स की मौत भी हो गई है। राज्य सरकार ने मरने वाले शख्स के परिवार को 10 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद मामले में सुनवाई करते हुए सोमवार को अपने फैसले के थोड़ा बदलाव करते हुए कर्नाटक राज्य को राहत दी थी। कोर्ट ने कर्नाटक सरकार से 20 सितंबर तक हर दिन 12 हजार क्यूसेक पानी तमिलनाडु को देने के लिए कहा था। बता दें कि इससे पहले कोर्ट ने 5 सितंबर को कर्नाटक को 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश सुनाया था। कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश को वापस लेने की अपील की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया था।

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