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कावेरी जल विवाद: कर्नाटक तत्काल सुनवाई की मांग लेकर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, राज्य में तनाव का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने पांच सितंबर को एक अंतरिम आदेश में कर्नाटक सरकार से तमिलनाडु को अगले 10 दिन तक प्रतिदिन 15,000 क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने को कहा था।

Author नई दिल्ली | Updated: September 11, 2016 3:48 PM
कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कर्नाटक बंद के दौरान कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं ने टायर जलाकर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया। (PTI Photo by Shailendra Bhojak/ 9 Sep, 2016)

तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से 15,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बजाय 1,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का आदेश दिए जाने की मांग करने वाली अपनी अपील पर तत्काल सुनवाई का आग्रह करते हुए कर्नाटक ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। शनिवार (10 सितंबर) देर शाम दायर किए गए आवेदन में उच्चतम न्यायालय के पांच सितंबर को दिए गए आदेश में बदलाव की मांग भी की गई है। पांच सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु के किसानों को तत्काल राहत देने के तौर पर 15,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का आदेश दिया था। कर्नाटक ने उच्चतम न्यायालय जाने का निर्णय ऐसे समय पर लिया जब कावेरी निगरानी समिति की सोमवार (12 सितंबर) को बैठक होने वाली है जिसमें तमिलनाडु तथा अन्य राज्यों के लिए कावेरी नदी से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा पर फैसला किया जाएगा। आवेदन में मांग की गई है कि 10 दिन के बजाय उच्चतम न्यायालय को केवल छह दिन तक पानी देने के लिए कहना चाहिए क्योंकि व्यापक आंदोलन तथा हर दिन हो रहे 500 करोड़ रुपए के नुकसान के मद्देनजर कर्नाटक खुद चिंताजनक स्थिति से गुजर रहा है।

संपर्क करने पर अधिवक्ता वी एन रघुपति ने बताया ‘हम प्रयास कर रहे हैं कि मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।’ मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है क्योंकि छुट्टियों के कारण अदालतें अगले दो दिन बंद रहेंगी। आवेदन में कर्नाटक ने कहा है कि जनता का गहरा दबाव है और राज्य पुलिस को सार्वजनिक संपत्ति को क्षतिग्रस्त होने से रोकने में बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। आवेदन में कहा गया है ‘आपके द्वारा दी गई व्यवस्था से कर्नाटक के पूरे दक्षिणी हिस्से में तनाव पैदा हो गया है और जनजीवन बाधित हो गया है। किसानों का आंदोलन चल रहा है क्योंकि उनकी सूची फसल को तमिलनाडु में किसानों की फसल के समकक्ष रख दिया गया है। तमिलनाडु में चावल की फसल होती है जिसके लिए कर्नाटक में होने वाली हल्की फसलों की तुलना में दोगुना पानी की जरूरत होती है।’

आगे आवेदन में कहा गया है कि लोग, खास कर मैसूर, हासन, मान्ड्या और बेंगलुरु जिलों में किसान सड़कों पर आ गए हैं जिससे आयकर और सेवा कर के रूप में राजस्व देने वाले तथा देश में 60 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा का विनिमय करने वाले बेंगलुरु का आईटी उद्योग प्रभावित हुआ है। आवेदन में सुरक्षा एजेंसियों से मिली उस जानकारी का भी जिक्र है जिसमें कहा गया है कि अगर पानी का बहाव आगे जारी रखा गया तो स्थिति हाथ से निकल सकती है। समझा जाता है कि यह आवेदन प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर के समक्ष पेश किया जाएगा जो इस पर विचार करेंगे और अगर तत्काल सुनवाई की जरूरत हुई तो इसे उस पीठ के समक्ष भेजा जाएगा जिसने पांच सितंबर को अंतरिम व्यवस्था दी थी। उच्चतम न्यायालय ने पांच सितंबर को एक अंतरिम आदेश में कर्नाटक सरकार से तमिलनाडु को अगले 10 दिन तक प्रतिदिन 15,000 क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने को कहा था, जिससे कुछ हद तक तमिलनाडु के किसानों की दशा सुधर सकती है।

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