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कावेरी जल विवाद: कर्नाटक के लिए ‘न्याय’ की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर पूर्व पीएम देवगौड़ा

उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक को छह अक्तूबर तक तमिलनाडु को कावेरी नदी का 6000 क्यूसेक पानी छोड़ने और केन्द्र से कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन करने को कहा है।
Author बेंगलुरु | October 1, 2016 16:39 pm
राज्य सचिवालय में विधान सौध के सामने महात्मा गांधी की प्रतिमा के निकट अनशन पर बैठे पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा। (Source: ANI/Twitter)

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा ने कावेरी नदी का पानी छोडने को लेकर तमिलनाडु के साथ जारी विवाद में कर्नाटक के लिए ‘न्याय’ की मांग को लेकर शनिवार (1 अक्टूबर) को अपना अनशन शुरू किया। जनता दल (सेक्युलर) के 83 वर्षीय सुप्रीमो यहां राज्य सचिवालय में विधान सौध के सामने महात्मा गांधी की प्रतिमा के निकट अनशन पर बैठे हैं। उच्चतम न्यायालय के शुक्रवार (30 सितंबर) आए आदेश की पृष्ठभूमि में गौड़ा का यह निर्णय अचानक सामने आया। उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक को छह अक्तूबर तक तमिलनाडु को कावेरी नदी का 6000 क्यूसेक पानी छोड़ने और केन्द्र से कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन करने को कहा है।

अनशन शुरू करने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवगौड़ा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘हम न्याय चाहते हैं। इंसानों के जीवित रहने के लिए पेयजल आवश्यक है।’ केन्द्र सरकार से कर्नाटक को न्याय मिलने तक अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने पर जोर देते हुए गौड़ा ने कहा कि उनका अभी भी प्रधानमंत्री में ‘भरोसा’ है कि वह मुद्दे को सुलझा लेंगे। गौड़ा ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश को लेकर शनिवार दिन में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में वह हिस्सा नहीं लेंगे। उच्चतम न्यायालय का फैसला राज्य के लिए एक झटका के रूप में सामने आया है। गौड़ा से मिलने के लिए आए गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने हमेशा राज्य के हितों के लिए लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि ‘मैं उम्मीद करता हूं कि (भूख हड़ताल) न्यायपालिका की आंखे खोलेगा।’

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