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कावेरी विवाद: कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने गतिरोध खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की

सिद्धारमैया ने मोदी को एक पत्र लिख कर कहा है कि यदि अशांति जारी रहती है तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था और आईटी कंपनी पर गंभीर असर पड़ेगा, जो देश में अपार राजस्व और विदेशी मुद्रा लाती है।

Author बेंगलुरु | September 9, 2016 9:53 PM
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया। (फाइल फोटो)

कावेरी का पानी तमिलनाडु को छोड़े जाने पर कर्नाटक में काफी नाराजगी के मद्देनजर राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार (9 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गतिरोध तोड़ने के लिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ‘कुछ घंटों की नोटिस पर’ बैठक बुलाने का अनुरोध किया। राज्य में कावेरी विवाद के तूल पकड़ने के बाद शुक्रवार को 12 घंटे के बंद के आह्वान के बीच सिद्धारमैया ने मोदी को एक पत्र लिख कर कहा है कि यदि अशांति जारी रहती है तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था और आईटी कंपनी पर गंभीर असर पड़ेगा, जो देश में अपार राजस्व और विदेशी मुद्रा लाती है।

यहां मीडिया को जारी पत्र में सिद्धारमैया ने कहा है, ‘इस पत्र के जरिए मैं आपसे आपके न सिर्फ प्रधानमंत्री होने के नाते, बल्कि समूची संघीय प्रणाली का प्रमुख होने के नाते गतिरोध दूर करने के लिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की (कुछ घंटों के नोटिस पर) एक बैठक बुलाने का अनुरोध करता हूं।’ उन्होंने दिसंबर 1995 का एक उदाहरण दिया जब इसी तरह के हालात में उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री से मुद्दे का हल करने का अनुरोध किया था। उन्होंने बताया, ‘उच्चतम न्यायालय ने 28 दिसंबर 1995 की तारीख वाले आदेश में प्रधानमंत्री से अपने आदेश का क्रियान्वयन कर मुद्दे का हल करने का अनुरोध किया था, जिसे तब सभी पक्ष पूरी तरह से संतुष्ट हुए थे।’

शीर्ष न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए कर्नाटक सरकार मंगलवार से तमिलनाडु को 15,000 क्यूसेक पानी छोड़ रहा है जिससे कावेरी बेसिन में स्थित जिलों में विरोध प्रदर्शन होने लगे हैं और इसका केंद्र मांडया बन गया है। सिद्धारमैया ने अपने पत्र में इस तथ्य की ओर प्रधानमंत्री का फौरन ध्यान आकृष्ट किया है कि पानी छोड़ने के न्यायालय के अंतरिम आदेश पर कावेरी बेसिन, खासतौर पर बेंगलुरु में अत्यधिक नाराजगी है। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराज्यीय सीमा, बीलीगुंडुलू में कावेरी का 15,000 क्यूसेक पानी रोजाना छोड़ा जाता रहा तो इससे न सिर्फ बेंगलुरु शहर के बाशिंदे बल्कि कावेरी बेसिन के किसान भी पानी से पूरी तरह से वंचित हो जाएंगे जिससे उनका फसल प्रभावित होगा।

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