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जानवरों से समस्या: नरेंद्र मोदी के मंत्री रहे नेता ने यूपी प्रभारी बनते ही सुझाया यह फॉर्मूला, बोले- गुजरात में आजमाया था

नई जिम्मेदारी सौंपे जाने पर उन्होंने बताया- मेरा पूरा ध्यान राष्ट्रवाद और बूथ से लेकर राज्य स्तर के कार्यकर्ता में उर्जा भरने पर रहेगा।

Author December 28, 2018 2:18 PM
गोरधन झड़फिया को हाल ही में यूपी बीजेपी चीफ बनाया गया है। (एक्सप्रेस फोटोः भूपेंद्र राणा)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तब गुजरात के मुख्यमंत्री) की कैबिनेट में मंत्री रहे नेता गोरधन झड़फिया ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनते ही सूबे में जानवारों की समस्या हल करने के लिए एक फॉर्मूला सुझाया है। उन्होंने कहा है कि 10 हेक्टेयर खेती की जमीन के कुछ समूह बनाकर उसकी फेंसिंग (बाड़े बनाने) पर 50 फीसदी सब्सिडी दी जा सकती है। यह काम पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर हो सकता है। यह फॉर्मुला इससे पहले गुजरात में आजमाया जा चुका है।

झड़फिया के हवाले से ‘ईटी’ की रिपोर्ट में कहा गया, “गुजरात में जानवरों की समस्या से हम इसी फॉर्मुले के जरिए सफलता से निपट सके थे।” नए बीजेपी यूपी प्रभारी के मुताबिक, यूपी के लोग काफी समय से इस समस्या के बारे में उन्हें बता रहे थे। वह इसी पर बोले, “गुजरात में हमने 10 हेक्टेयर की जमीन पर कुछ समूह बनाए और उनकी चारदीवारी बनाने के लिए 50 फीसदी की सब्सिडी दी। यह चीज पीपीपी के जरिए हुई। यहां तक कि इस साल भी इसी काम के लिए 700 करोड़ रुपए से अधिक का बजट आवंटित किया गया। अब मैं यूपी सरकार का ध्यान इसी चीज पर दिलाऊंगा।”

नई जिम्मेदारी सौंपे जाने पर उन्होंने बताया- मेरा पूरा ध्यान राष्ट्रवाद और बूथ से लेकर राज्य स्तर के कार्यकर्ता में उर्जा भरने पर रहेगा। समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जैसी पार्टियां सांप्रदायिक माहौल खराब करने के लिए अस्तित्व और पहचान को लेकर राजनीति करेंगी। ऐसे में हम उनसे राष्ट्रवाद के जरिए लड़ेंगे।

बता दें कि झड़फिया किसी दौर में नरेंद्र मोदी के आलोचक रहे थे। साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उन्हें बीजेपी ने यूपी में पार्टी प्रभारी बनाया है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि पूर्व में जो कुछ भी हुआ, वह गुजरा कल था। राष्ट्र हित के लिए वे सारी चीजें भुला दी जानी चाहिए।

झड़फिया, मोदी के साथ लगभग 30 साल तक साथ काम कर चुके हैं। वह साल 2002 में गोधरा दंगों के समय गुजरात के गृह मंत्री थे। साल 2014 में उनकी पार्टी बीजेपी में शामिल हुई थी, जिसके बाद से वह निजी चीजों को राष्ट्रहित के लिए किनारे रखने के मकसद से आगे बढ़ रहे हैं।

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