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64 खानों पर बनीपकड़

एशिया में भी यह खेल 30 वर्ष बाद दूसरी बार हुआ है।

64 खानों पर बनीपकड़
तानिया सचदेव।

मनीष कुमार जोशी

भारत के लिए चेन्नई में सम्पन्न हुआ शतरंज ओलम्पियाड दुगनी खुशियां लाया। इस वैश्विक शतरंज प्रतियोगिता में भारत ने न के केवल दो कांस्य पदक जीते, बल्कि कम समय में इस आयोजन को सफल बनाया। शतरंज ओलम्पियाड पहली बार भारत में हुआ। एशिया में भी यह 30 वर्ष बाद दूसरी बार हुआ। इससे पहले 1992 में फिलिपींस के मनीला में हुआ था।

वैसे यह आयोजन रूस के मास्को शहर में होना था लेकिन रूस-यूक्रेन संकट के कारण इसका आयोजन भारत में कराना पड़ा। वैसे यह ओलम्पियाड कई मायनो में विवादों में रहा। आयोजन से पूर्व ही रूस और चीन ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान टीम भाग लेने पहुंच चुकी थी लेकिन उसने नाम वापस ले लिया। इन विवादों के बावजूद यह टूर्नामेंट बेहद सफल रहा।

इस आयोजन में हेमिल्टन रसेल कप के लिए कुल 188 और वेरा मेनचिक कप के लिए 162 टीमों ने भाग लिया। इसमें ओपन वर्ग में 937 और महिला वर्ग में 800 शातिरों सहित कुल 1737 खिलाड़ियों ने भाग लिया। दोनो वर्गों में एक देश के सर्वोत्तम संयुक्त परिणाम से नोना गैप्रिडाशविली ट्राफी दी जाती है। इस बार यह ट्राफी भारत ने हासिल की है। इस ओलम्पियाड में भारत के 30 खिलाडियो ने छह टीमों के रूप में भाग लिया, जिनमें तीन टीम ओपन वर्ग में और तीन टीम ने महिला वर्ग में भाग लिया। उज्बेकिस्तान ने नीदरलैंड को 2.5-1.5 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह शतरंज ओलम्पियाड में उज्बेकिस्तान की ओर से पहला समग्र पदक था। दूसरा स्थान आर्मेनिया ने हासिल किया जबकि तीसरे स्थान पर मेजबान भारत रहा।

ओपन वर्ग में उज्बेकिस्तान की टीम सबसे युवा थी। टीम की कप्तानी 17 वर्षीय नोदिरबेक अब्दुलसत्तोरोव कर रहे थे। महिला वर्ग में यूक्रेन ने स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उसका ओलम्पियाड में दूसरा स्वर्ण पदक था। इससे पहले वह 2006 में उसने इसी वर्ग में स्वर्ण पदक पाया था। जार्जिया ने रजत पदक जीता। इस वर्ग में भी कांस्य पदक भारत ने जीता। शतरंज ओलम्पियाड में यह भारत को दूसरा कांस्य है। इससे पहले 2014 के ओलम्पियाड में भारत ने कांस्य पदक जीता था।

महिला वर्ग में एक समय भारतीय टीम शीर्ष पर चल रही थी। ऐसा लग रहा था कि इस बार भारत कोई चमत्कारिक परिणाम देगा। इस बात की संभावना भी पूरी थी क्योंकि महिला वर्ग में भारत के पास तानिया सचदेव, आर रमेश, कौनेरू हम्पी और हरिका जैसी खिलाडी थीं। यूक्रेन और जार्जिया ने अंतिम राउंड ने बाजी मार ली। जार्जिया ने अप्रत्याषित परिणाम देते हुए रजत हासिल कर लिया। भारतीय शातिर अंतिम दौर में चूक गए। पोलैंड से हारने के बाद कौनेरू हम्पी ने अपने साथियो के साथ भारत की वापसी कराई परन्तु सातवीं वरीयता प्राप्त अमेरिका से भारत 1-3 से पराजित हो गया। अंतिम समय में तानिया सचदेव और भक्ति कुलकर्णी के हार जाने के बाद भारत को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। भारत की महिला टीम ने शतरंज ओलम्पियाड में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

ओपन वर्ग में कमाल के परिणाम रहे। अब तक की सबसे युवा टीम उज्बेकिस्तान ने अपने खेल से सबको चौंका दिया। टीम 11 वे राउंड तक अजेय रही। आर्मेनिया से टाई ब्रेक अपने पक्ष में खेला और फिर नीदरलैंड को 2.5-1.5 से हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया। उज्बेकिस्तान का नेतृत्व 17 वर्षीय अब्दुस्त्तोरोव कर रहे थे जो रैपिड चैस में मैग्नस कार्लसन को धूल चटा चुके हैं। टीम के सभी खिलाडी 20 साल की उम्र के आस पास थे।

सबसे वरिष्ठ शातिर की उम्र 27 साल थी। आर्मेनिया ने भी जबरदस्त खेलते हुए रजत पदक जीता। टीम के कप्तान गैबेरियल और राबर्ट के खेल ने उनको इस मुकाम तक पहुंचाया। टीम इंडिया की बी टीम जो युवा शातिरों से युक्त थी, ने चमत्कार करते हुए कांस्य पदक हासिल किया जबकि सीनियर टीम चैथे स्थान पर रही । भारत की बी टीम और मुख्य टीम दोनो अंत में कांस्य पदक के लिए मुकाबला कर रही थीं। इस प्रकार यह तो पहले ही तय हो गया था कि ओपन वर्ग का कांस्य पदक मेजबान के हाथ ही आएगा। युवा शातिरों ने वरिष्ठों को मात देकर काम्याबी हासिल की।

भारत में इस टूर्नामेंट ने कई नए खिलाडियों के लिए द्वार खोले हैं। दूसरे देशों के बीच यह संदेश गया है कि भारत में शतरंज की नई पौध नई चुनौती पेश कर रही है। महिला वर्ग में भक्ति कुलकर्णी का खेल अच्छा रहा। पुरुष वर्ग में भी भारत के युवा खिलाड़ियो ने भी छाप छोड़ी। उन्होने वरिष्ठ खिलाडियो को मात देकर कांस्य पदक जीता।

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