ताज़ा खबर
 

जाति एक सच्चाई है, लेकिन बिहार चुनाव में विकास बड़ा मुद्दा है: जद(यू)

जदयू ने कहा, जाति एक सच्चाई है। पिछड़ी जातियां हैं और अगड़ी जातियां हैं लेकिन बिहार चुनाव में विकास ज्यादा बड़ा मुद्दा है। बिहार में हमने जो काम किया है..

Author नई दिल्ली | September 30, 2015 9:07 PM
नीतीश ने कहा था, ‘जाति एक सच्चाई है। पिछड़ी जातियां हैं और अगड़ी जातियां हैं। मैं यह नहीं मानता की जाति ही सब कुछ है। विकास ज्यादा बड़ा मुद्दा है।’’ (पीटीआई फोटो)

सहयोगी राजद प्रमुख लालू प्रसाद की कथित जातिगत टिप्पणी को लेकर उठे विवाद के बीच जनता दल यू ने आज संतुलन बनाने का प्रयास करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक न्याय के साथ समावेशी विकास बिहार के चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले महागठबंधन का चुनावी मुद्दा है।

जदयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘जाति एक सच्चाई है। पिछड़ी जातियां हैं और अगड़ी जातियां हैं। मैं यह नहीं मानता की जाति ही सब कुछ है। विकास ज्यादा बड़ा मुद्दा है। बिहार में हमने जो काम किया है उन कार्यों के आधार पर हम जनता के बीच जाना चाहते हैं।’’

लालू प्रसाद के उस बयान के बारे में बार बार पूछे जाने पर कि बिहार चुनाव में अगड़े और पिछड़ों के बीच सीधा मुकाबला है, सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि गठबंधन के नेता नीतीश कुमार हैं। जदयू नेता ने कहा, ‘‘नेतृत्व नीतीश कुमार का है। नीतीश के नेतृत्व का मतलब है विकास और इस मामले में उनके विचार। अगर हमारी सरकार सत्ता में वापस आयी तो यह सरकार उसी तरह न्यूनतम साझा कार्यक्रम के आधार पर चलेगी जैसे कि पिछले दस साल के दौरान नीतीश कुमार का शासन चला है। नीतीश कुमार सुशासन और विधिसम्मत शासन के मुद्दों पर विभिन्न वर्गों के समर्थन से सत्ता में आये थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘चुनावों के दौरान विभिन्न दल एक साथ आते हैं। इनमें से कुछ का जाति आधार होता है। लेकिन बिहार में चुनाव विकास के मुद्दे पर होगा। बिहार में विकास जाति से बड़ा मुद्दा है। मैं इस बात से सहमत हूं कि जो लोग अलग बात करते हैं उन्हें विकास के मुद्दे पर भी बात करनी होगी।’’

जदयू के राज्यसभा सदस्य पवन वर्मा ने कहा कि विकास नीतीश कुमार का पहला और अंतिम मुद्दा है लेकिन बिहार में कोई सामाजिक न्याय को भी नहीं भूल सकता क्योंकि राज्य में वंचित वर्गों की एक बड़ी आबादी है।

जदयू नेताओं की ये टिप्पणियां पार्टी के अंदर के उस अहसास को जाहिर करती है कि जाति के मुद्दे पर ज्यादा जोर दिये जाने से चुनाव में गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान पहुंच सकता है

रविवार को राघोपुर में अपना प्रचार अभियान शुरू करते हुए राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने बिहार विधानसभा चुनाव को पिछड़ी और अगड़ी जातियों के बीच सीधा मुकाबला बताया था और यादवों तथा अन्य पिछड़ा वर्गों से धर्मनिरपेक्ष गठबंधन का समर्थन करने का आह्वान किया था। अपनी इस टिप्पणी को लेकर लालू चुनाव आयोग के निशान पर आ गये हैं।

बिहार जदयू अध्यक्ष ने हालांकि प्रसाद के बयान पर कोई सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा, ‘‘मैं नहीं मानता कि जातिवाद बड़ा मुद्दा है। नीतीश कुमार ने विकास की बड़ी रेखा खींची है वह लोगों का विश्वास जीत सकते हैं।’’

सिंह ने साथ ही याद दिलाया कि लालू प्रसाद ऊंची जातियों के गरीब लोगों को आरक्षण देने की भी बात करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजद नेता के बयान को संपूर्णता में देखे जाने की जरूरत है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App