उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब बस पांच महीने बचे हैं और सत्ताधारी बीजेपी एक सकारात्मक माहौल बनाए रखने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस दिशा में बहुत ज्यादा मेहनत कर रहे हैं, जबकि पार्टी का एक धड़ा युवाओं की बेचैनी, बेरोजगारी और जातिगत तनाव जैसे मुद्दों को लेकर चिंतित दिख रहा है।
भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी के अंदर कुछ आंतरिक मतभेद हैं। हालांकि, दो बार के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की लोकप्रियता बरकरार है, भले ही उन्होंने 2027 के चुनावों में पार्टी की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए राज्य भर के विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं तक पहुंचने और रोजगार संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस महीने की शुरुआत में, उन्होंने उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सर्विसेज कॉर्पोरेशन का शुभारंभ किया, जिसका घोषित उद्देश्य राज्य में 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों की रक्षा करना और उन्हें लाभ पहुंचाना है।
पिछले महीने सीएम ने छह महीने में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने के अपने फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने अब तक अपने साढ़े नौ साल के कार्यकाल में 9.3 लाख से ज्यादा नौकरियां दी हैं। हाल के महीनों में, आदित्यनाथ सरकार ने पुलिस और शिक्षकों की भर्ती के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। साथ ही, स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ और कॉर्पोरेट व तकनीकी संस्थानों में छात्रों के लिए स्टाइपेंड वाली इंटर्नशिप की शुरुआत की है।
इसके अलावा, सरकार ने उन परिवारों की पहचान करने के लिए केंद्रीकृत परिवार कार्ड भी शुरू किए हैं जिनमें कोई भी सदस्य सरकारी या निजी क्षेत्र में कार्यरत नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी की चुनौतियां
भारतीय जनता पार्टी के सामने प्रमुख चुनौतियों में से एक है जातिगत विभाजन का बढ़ता दायरा और इसके कारण पैदा हुआ सामाजिक-राजनीतिक तनाव। एक राज्य स्तरीय पार्टी नेता ने कहा, “ओबीसी समूहों के बीच बीच को ऊंची जाति की पार्टी मानने की धारणा फिर से मजबूत हो रही है, वहीं अधिकारियों के बीच जातिगत आधार पर व्हाट्सएप समूह भी मौजूद हैं जो इस तरह के डर को हवा देते हैं। यहां तक कि ऊंची जातियां भी ठाकुर-ब्राह्मण के आधार पर बंटी हुई हैं। इन दोनों समुदायों के मंत्रियों के बीच गहराते मतभेद भी एक मुद्दा है।”
बीजेपी नेता ने कहा, “रोजगार की कमी की भावना, यानी यह धारणा कि अत्यधिक योग्य व्यक्ति ऐसी नौकरियों में हैं जो उनके कौशल का सही उपयोग नहीं करतीं, इस धारणा को भी बल देती है कि नौकरियां नहीं हैं।” उन्होंने आगे कहा कि इससे शिक्षा और एजुकेशन सिस्टम में कथित अनियमितताओं को लेकर जेन-जी के बीच बढ़ती निराशा में और इजाफा होता है।
यूजीसी के समानता संबंधी नियम ने ऊंची जातियों के एक वर्ग में असंतोष पैदा कर दिया है, जिससे उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले बीजेपी के लिए एक नई समस्या खड़ी हो गई है। ये नियम देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लाए गए थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन पर रोक लगा दी थी।
हालांकि, इन सब बातों के बावजूद, आदित्यनाथ की सबसे बड़ी खूबी कानून-व्यवस्था को लेकर उनका रिकॉर्ड और महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता है। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, “प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) और मुख्यमंत्री दोनों ही महिला मतदाताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। सरकार महिलाओं के लिए और भी योजनाएं शुरू करने वाली है, जिससे उनका समर्थन आधार और मजबूत होगा।”
विपक्ष के लिए सबसे बड़ी बाधा अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी और राहुल गांधी के नेतृत्व में अल्पसंख्यकों और युवाओं के बीच अपनी बढ़ती लोकप्रियता का लाभ उठाने की कोशिश कर रही कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान है। दोनों सहयोगी दलों के लिए सीटों के सुचारू बंटवारे पर सहमति बनाना एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है।
यूपी जीत से विपक्ष की स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर होगी मजबूत
उत्तर प्रदेश में जीत से राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की स्थिति मजबूत होगी। लेकिन हार समाजवादी पार्टी के लिए विनाशकारी साबित होगी, क्योंकि वह राज्य में पिछले एक दशक से सत्ता से बाहर है। राहुल गांधी द्वारा जाति जनगणना पर हालिया जोर, इसकी गणना के लिए वर्तमान पद्धति पर सवाल उठाना और ‘जितनी आबादी उतना हक’ (जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व) सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण पर 50% की सीमा हटाने की उनकी मांग ने बीजेपी के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी ने अपने ओबीसी समर्थक आधार को बरकरार रखने के प्रयासों को तेज कर दिया है।
विपक्ष ने सरकार की सिलेक्शन कमेटियों पर यह आरोप भी लगाया है कि वे एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए कानूनी तौर पर आरक्षित खाली जगहों पर उन्हें नौकरी देने से इनकार करने के लिए अक्सर उपयुक्त नहीं पाया गया वाक्यांश का इस्तेमाल करती हैं।
बीजेपी नेता ने क्या बताया?
एक ब्राह्मण बीजेपी नेता ने कहा, “ऊंची जातियों और ओबीसी दोनों में भावनाएं भड़क उठी हैं। ब्राह्मण खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं, वे खुलकर अपनी बात रख रहे हैं और बीजेपी में उनके समुदाय के नेता दबाव में हैं। उनका सवाल यह है, सपा ने यादवों और मुसलमानों के लिए बहुत कुछ किया, बसपा ने दलितों के लिए, तो बीजेपी ने हमारे लिए क्या किया है।”
अखिलेश का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) का मुद्दा और इन वर्गों को एकजुट करने के लिए उनकी पार्टी के प्रयास उत्तर प्रदेश चुनावों में विपक्ष की संभावनाओं को मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, सपा और कांग्रेस के बीच परिचालन और वैचारिक मतभेद सीट-बंटवारे के समझौते को जल्दी से जल्दी अंतिम रूप देने और बीजेपी के खिलाफ एक एकजुट मोर्चा बनाने में बाधा पैदा कर सकते हैं।
जहां एक ओर अल्पसंख्यकों के बीच राहुल की लोकप्रियता अखिलेश को अपने इस मुख्य आधार को मजबूत करने के लिए कांग्रेस पर निर्भर बनाएगी, जिससे कांग्रेस को अधिक सीटें हासिल करने का मौका मिलेगा, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को चुनावों में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की स्थिति को संभालने के लिए सपा पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
यह भी पढ़ें: 115 विधानसभा सीटें, 38 हजार करोड़ का दांव…2027 यूपी चुनाव से पहले योगी का मेगा मिशन, सपा-कांग्रेस के गढ़ों पर नज़र
फरवरी 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। वह लगातार प्रदेश के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर रहे हैं। मई से अब तक योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 75 में से 44 से ज्यादा जिलों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों के दौरान उन्होंने 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े अलग-अलग विकास कार्यों का उद्घाटन किया या उनकी आधारशिला रखी। इन 115 सीटों में से करीब 58 फीसदी पर 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी समाजवादी पार्टी (SP)-कांग्रेस गठबंधन आगे रहा था। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
