जातिगत जनगणना के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने फिर केंद्र सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी पर प्रहार किया हैं। कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने एक X पोस्ट में कहा कि जातिगत जनगणना का मतलब सिर्फ जातियों की गिनती नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा बार-बार मांग उठाने के बावजूद मोदी सरकार द्वारा जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप में ड्रॉपडाउन सूची के बजाय ओपन-एंडेड सवाल रखना एक बेहद गंभीर खामी है।
इसी पोस्ट में केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा, “लगता है प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि जनगणना में एक ही जाति के अलग-अलग नाम, उपजातियां और वर्तनी दर्ज हों ताकि जातिगत जनगणना की पूरी प्रक्रिया विफल हो जाए।”
‘सरकार ने नहीं दिया राहुल गांधी के पत्र का जवाब’
जयराम रमेश ने आग लिखा, “कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सही तरीके से जातिगत जनगणना कराने की पार्टी की प्रमुख मांगों के साथ इस विषय पर संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा, जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।”
उन्होंने कहा कि दोनों वरिष्ठ नेताओं ने 20 अगस्त को लिखे इस पत्र में जातिगत जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी। पत्र में मांग की गई थी कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने।
जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम जोड़ें: हरीश चौधरी
कांग्रेस पार्टी ने नेता हरीश चौधरी ने मंगलवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मांग की कि केंद्र सरकार जाति जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम शामिल करे। उन्होंने कहा कि यह जनगणना तेलंगाना में किए गए सर्वेक्षण की तर्ज पर कराई जानी चाहिए।
हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जाति जनगणना के मुख्य मकसद से भटक रही है। उन्होंने हरीश चौधरी ने कहा, ”जनगणना फॉर्म में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए अलग प्रावधान है लेकिन ओबीसी श्रेणी के लिए कोई अलग कॉलम नहीं है। ओबीसी श्रेणी के लिए एक विशेष कॉलम होना ही चाहिए।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि पर्वतीय इलाकों में जनगणना अभी जारी है और देश के बाकी हिस्सों में यह फरवरी से शुरू होगी। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब भी ओबीसी के लिए अलग कॉलम जोड़ने का समय है।
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सरकार का कहना है कि जातियों की गिनती के लिए लोगों से खुले तौर पर उनकी जाति पूछना ही सबसे सही तरीका है। इससे सरकार खुद किसी जाति की पहचान तय करने वाली संस्था नहीं बनेगी। हालांकि इस तरीके से एक बड़ी चुनौती भी सामने आती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
