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जन धन खातों से 500 रुपये निकालने उमड़ पड़े लोग, लॉकडाउन को अंगूठा दिखा सास, बहू, बच्चे सभी लगे बैंक के आगे लाइन

कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में महिलाएं बच्चों और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ दिन भर बैंकों की कतार में खड़ी दिखाई दे रही हैं। इनमें से कुछ को पैदल आते हुए तो कुछ को साइकिल से आते हुए देखा जा सकता है।

पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के गायघाट में बैंक के आगे लाइन में खड़ी महिलाएं। (एक्सप्रेस फोटो- पार्थ पॉल)

चार बजे सुबह, 22 वर्षीय सस्वती दास अपनी सास पारुल (40) और 12 साल के बेटे के साथ पति के टोटो (ई-रिक्शा) से भारतीय स्टेट बैंक के कस्टमर सर्विस प्वाइंट पर उतरती हैं, ताकि वह बैंक की लाइन में आगे खड़ी हो सकें। यह नजारा पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के चंदपाड़ा इलाके की है। दोपहर तक दोनों महिलाएं (सास और बहू) अभी भी बैंक काउंटर से दूर खड़ी हैं। सस्वती के पति और बेटे दोनों टोटो में बैठकर उनका इंतजार कर रहे हैं।

सस्वती कहती हैं, “सरकार ने हमारे खातों में 500 रुपये भेजे हैं। हमें पैसों की जरूरत है। मेरे पति इस टोटो को चलाते हैं और उनके पास अभी कोई काम नहीं है।” वो बताती हैं कि लॉकडाउन से पहले उसके पति रोजाना 400 रुपये कमाते थे जो अब बंद है।

21 दिनों के लॉकडाउन से रोजमर्रे का काम बंद हो जाने की वजह से केंद्र सरकार ने गरीब परिवारों को मदद के लिए महिलाओं के जन धन खाते में 500-500 रुपये तीन महीने तक भेजने का ऐलान किया था। इसकी पहली किश्त 3 अप्रैल को खातों में आ गई। इसे ही निकालने के लिए देशभर में महिलाएं लॉकडाउन के बावजूद बैंकों के आगे कतार में खड़ी हो गई हैं।

पिछले कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में महिलाएं बच्चों और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ दिन भर बैंकों की कतार में खड़ी दिखाई दे रही हैं। इनमें से कुछ को पैदल आते हुए तो कुछ को साइकिल से आते हुए देखा जा सकता है। अधिकांश बैंकों ने इस राशि के निस्तारण के लिए ग्रामीण इलाकों में कस्टमर सर्विस प्वाइंट बना रखे हैं, जो एक कमरे के सेटअप से संचालित हो रहा है।

सस्वती दास ने बताया, “मैं कल भी यहां आई थी लेकिन मेरे काउंटर पर पहुंचने से पहले ही वो बंद हो गया। मेरी सास कल घर पर ही थी और मेरे बच्चों की देखभाल कर रही थी। खाना भी बना रही थी लेकिन आज हम दोनों यहां आए हैं। अगर हम दोनों को 500-500 रुपये मिल जाएंगे तो घर का राशन कुछ दिनों तक चल जाएगा।” दास ने बताया, “जब देश में लॉकडाउन लगा था, तब हमारे पास जितने भी पैसे थे, उससे राशन खरीदने दौड़ पड़े। अब लोग कह रहे हैं कि लॉकडाउन आगे बढ़ेगा। अब हमारे पास पैसे नहीं हैं।”
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