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लाल किले पर बवाल का मामला, नौ नेताओं समेत कई पर मामले दर्ज, सरहदों पर लौटे किसान, हिंसा में 19 लोग गिरफ्तार, 50 हिरासत में

दर्ज मामलों में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत, सरदार वीएम सिंह, जगतार सिंह बाजवा और तेजिंदर सिंह विर्क समेत कुल नौ नेताओं को उत्पात मचाने का जिम्मेदार ठहराया गया है।

farmers violence in delhiमंगलवार को नई दिल्ली के मुकरबा चौक पर दिल्ली पुलिस और किसानों के बीच झड़प। (फोटो प्रवीण खन्ना इंडियन एक्सप्रेस)

किसानों के ट्रैक्टर जुलूस के दौरान दिल्ली में जगह-जगह हिंसा और लाल किले परिसर पर कब्जा व ध्वज स्तंभ पर निशान साहिब फहराने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। दूसरी ओर, किसान दिल्ली के विभिन्न सीमा क्षेत्रों पर अपने प्रदर्शन स्थलों पर लौट गए हैं। किसान संगठनों ने बुधवार को बैठक कर धरना-प्रदर्शनों के अगले कार्यक्रम का एलान किया।

किसानों ने एक फरवरी को अपना संसद मार्च रद्द कर दिया है। उसकी जगह 30 जनवरी को देश भर में आम सभाएं व भूख हड़ताल आयोजित करने का एलान किया है। दूसरी ओर, पुलिस ने हिंसा के आरोप में 19 लोगों को गिरफ्तार व 50 को हिरासत में लिया है। इस हिंसा में 394 पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हुए हैं। हिंसा में 25 अपराधिक मामले दर्ज किए हैं।

भारतीय किसान यूनियन के नौ नेताओं समेत कई लोगों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। दर्ज मामलों में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत, सरदार वीएम सिंह, जगतार सिंह बाजवा और तेजिंदर सिंह विर्क समेत कुल नौ नेताओं को उत्पात मचाने का जिम्मेदार ठहराया गया है। पुलिस ने इनके खिलाफ कुल 16 धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कहा कि समयपुर बादली में दर्ज प्राथमिकी में टिकैत, यादव, दर्शन पाल और चढूनी समेत 37 किसान नेताओं के नाम हैं और उनकी भूमिका की जांच की जाएगी।

गणतंत्र दिवस के दिन राष्ट्रीय ध्वज और किसान यूनियनों के झंडों के साथ ही लाठी-डंडे लिए ट्रैक्टरों पर सवार हजारों किसान मंगलवार को पुलिस के अवरोधक तोड़कर दिल्ली में दाखिल हुए। ट्रैक्टर सवार कई प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ते हुए लालकिले तक पहुंचे और परिसर पर कब्जा कर लिया। वहां ध्वज-स्तंभ पर चढ़ एक युवक ने निशान साहिब फहरा दिया। गणतंत्र दिवस परेड के आयोजन के बाद तय मार्ग पर किसानों को ट्रैक्टर परेड की अनुमति दी गई थी, लेकिन कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी बेकाबू हो गए। पुलिसकर्मियों से झड़प हुई और लाठीचार्ज किया गया, कई जगह पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। आइटीओ पर एक ट्रैक्टर के पलट जाने से एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई।

बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के कारण एक फरवरी को संसद मार्च का अपना कार्यक्रम रद्द करने का एलान किया। हालांकि, उनका कहना है कि आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेताओं ने यह आरोप लगाया कि असामाजिक तत्वों ने कृषि कानूनों के खिलाफ उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को नष्ट करने के लिए हिंसा की साजिश रची थी, जिसे सरकार व पुलिस का संरक्षण प्राप्त था। बुधवार रात बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि किसान एक फरवरी को संसद मार्च नहीं करेंगे। किसान नेताओं ने लाल किले की घटना पर माफी भी मांगी। हालांकि, हिंसा में शामिल लोगों मोर्चा के लोग नहीं थे।

किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि तीस जनवरी को देश भर में आम सभाएं व भूख हड़ताल आयोजित की जाएंगी, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। बुधवार को दिन भर चले मंथन के बाद गणतंत्र दिवस के हिंसा के लिए केंद्र सरकार और पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आंदोलन मजबूत हुआ है और वे अपनी मांग पर अड़े है कि तीनों कृषि कानूनों की पूर्ण वापसी के बगैर वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे। किसान नेता शिवकुमार ने हिंसा के संबंध में कहा कि हमारे पास वीडियो हैं, हम पर्दाफाश करेंगे कि किस प्रकार हमारे आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रची गई।

किसान नेताओं ने कहा कि हमने बारीकी से पूरी घटना को देखा है। आइटीओ और लाल किला में हुई हिंसा के बाद केवल 16 पुलिस वालों को एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया जिनमें से पांच को मामूली जख्म था और उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। उन्होंने पुलिस के दावे को खारिज कर दिया और यहां तक कहा कि उनके 15 साथी लापता हैं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरे दिल्ली में हिंसा करने वाले 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें लाल किला पर हिंसा और तिरंगे का अपमान करने वाले कुछ आरोपी भी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने बुधवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि हिंसा में दिल्ली पुलिस के 394 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिसमें अधिकारी और अर्द्धसैनिक बल के जवान भी शामिल हैं। घायलों में दो की हालत बेहत नाजुक बनी हुई है, जिनका आइसीयू में इलाज चल रहा है।

श्रीवास्तव ने बताया कि हिंसा के मामले में बुधवार तक 25 अपराधिक मामले दर्ज किए थे। आगामी दिनों में सबूतों के आधार पर और भी मामले दर्ज किए जाएंगे। पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। इनमें 307 (हत्या का प्रयास), 147 (दंगों के लिए सजा), 353 (किसी व्यक्ति द्वारा एक लोक सेवक/सरकारी कर्मचारी को अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोकना) और 120बी (आपराधिक साजिश) शामिल हैं।

पुलिस ने किसान नेताओं के खिलाफ गाजीपुर थाने में तीन मामले दर्ज कराए हैं। पहला मामला इसी थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर संजीव कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया है। संजीव ने अपने बयान में बताया है कि 26 जनवरी को भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष सरकार वीएम सिंह, भाकियू तराई क्षेत्र के अध्यक्ष तेजिंदर सिंह विर्क, उधम सिंह नगर, उत्तराखंड के जगतार सिंह बाजवा, भाकियू अंबावत ग्रुप के ऋषिपाल अंबावत, भाकियू अमरोहा के हरपाल सिंह, जाट महासभा बागपत के अध्यक्ष विनोद कुमार, तोमर और बब्बन ग्रुप के अध्यक्ष वहां मौजूद थे।

पुलिस ने किसानों के साथ बैठक कर तय किया था कि सीमित संख्या में किसान और 12 बजे के बाद ही तय रूट से ट्रैक्टर मार्च शुरू करेंगे। लेकिन किसान नेता बार-बार पुलिस को उकसाकर बॉर्डर पार करने का प्रयास कर रहे थे। दूसरा मामला सब इंस्पेक्टर प्रशांत चंदेला ने कराया। गाजीपुर में ही तीसरा मामला कल्याणपुरी थाने के एटीओ इंस्पेक्टर राजीव रंजन ने दर्ज कराया।

कांग्रेस के उकसाने पर दिल्ली में हुई हिंसा : जावडेकर
भारतीय जनता पार्टी ने गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसान ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा की भर्त्सना करते हुए कांग्रेस पर किसानों को उकसाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने मांग की है कि इसके लिए कांग्रेस और राहुल गांधी को देश के लोगों से माफी मांगी चाहिए। साथ ही जिन लोगों ने किसानों को उकसाया है, उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत लाल किले पर अपने झंडे का अपमान सहन नहीं करेगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने पार्टी मुख्यालय पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में जिस तरह से हिंसा हुई, उसकी जितनी भर्त्सना की जाए उनकी कम है। कांग्रेस के नेताओं के उकसाने की वजह से ये हिंसा हुई। उन्होंने कहा कि जब पंजाब से अंतिम लड़ाई का एलान किया गया था तो वहां की कांग्रेस सरकार ने आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया? क्यों उन्हें दिल्ली आने दिया गया?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी किसानों का सिर्फ समर्थन नहीं कर रहे थे बल्कि उनको उकसा रहे थे। कांग्रेस और युवा कांग्रेस की ओर से किए जा रहे कई ट्वीट इसका प्रमाण है। जावडेकर ने संवाददाता सम्मेलन में कई ट्वीट का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि एक किसान की मौत पर कांग्रेस की ओर से ट्वीट किया गया कि पुलिस की बर्बरता के चलते एक किसान मरा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस किसानों की इस टैÑक्टर परेड को अहिंसक बता रही थी। उन्होंने सवाल किया कि लाल किले और नांगलोई में जो हुआ क्या वह अहिंसक था? पुलिसकर्मियों को डंडों, तलवारों और पत्थरों से पीटा गया और करीब तीन सौ पुलिसकर्मी घायल हैं, क्या वे अहिंसा की वजह से घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास भी तरह के हथियार थे लेकिन दिल्ली पुलिस पूरे संयम के साथ इस स्थिति से निपटी और जल्द ही कानून व्यवस्था की स्थिति को भी काबू में कर लिया।

जावडेकर ने कहा कि किसानों से सरकार ने दस दौर की बात की है। उन्होंने कहा कि एमएसपी, मंडी और मालिकाना हक जैसा था, वैसा ही है। ये तीनों कानून किसानों को और विकल्प देंगे। सरकार ने तो इन कानून को साल-डेढ़ साल स्थगित करने तक की बात कही है। लेकिन कांग्रेस अपनी राजनीति के चलते कोई समझौता होने देना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति के लिए इतना नीचे गिरेगी कि 26 जनवरी को किसानों को उकसाएगी, ऐसा किसी ने नहीं सोचा था। उन्होंने कहा कि हम इस तरह की राजनीति की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं।

दीप सिद्धू से कोई संबंध नहीं : सनी
भाजपा सांसद सनी देओल ने स्पष्ट किया है कि उनका या उनके परिवार का अभिनेता दीप सिद्धू से कोई संबंध नहीं है। सिद्धू दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले पर पहुंचे प्रदर्शनकारियों में शामिल थे। देओल ने कहा कि उन्होंने पहले भी स्पष्ट किया है कि उनका सिद्धू के साथ कोई संबंध नहीं है।

दूसरी ओर, अपराधी से सामाजिक कार्यकर्ता बने लखबीर सिंह उर्फ लाखा सिधाना ने ट्रैक्टर परेड की हिंसा से बुधवार को खुद को अलग करते हुए कहा कि उसने और कुछ अन्य किसान नेताओं ने राष्ट्रीय राजधानी में सिर्फ बाहरी रिंग रोड तक मार्च किया था। सनी देओल ने मंगलवार रात किए ट्वीट में कहा, ‘मैंने छह दिसंबर को ट्विटर के जरिए पहले ही स्पष्ट किया था कि मेरा या मेरे परिवार का दीप सिद्धू से कोई संबंध नहीं है।’ देओल ने यह भी कहा कि 26 जनवरी को लाल किले पर हुई घटनाओं से वह काफी दुखी हैं।

पंजाबी फिल्मों के अभिनेता सिद्धू लाल किला पहुंचे प्रदर्शनकारियों में शामिल थे, जहां धार्मिक झंडा लगाया गया था। देओल ने 2019 का लोकसभा चुनाव जब गुरदासपुर सीट से लड़ा था, तब सिद्धू उनके सहयोगी थे। भाजपा सांसद देओल ने पिछले साल दिसंबर में सिद्धू के किसान आंदोलन में शामिल होने के बाद उनसे दूरी बना ली थी।

गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर परेड के दौरान लालकिले पर प्रदर्शनकारियों द्वारा धार्मिक झंडा फहराए जाने की घटना के दौरान मौजूद रहे सिद्धू ने मंगलवार को प्रदर्शनकारियों के कृत्य का यह कह कर बचाव किया कि उन लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज नहीं हटाया और केवल प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर ‘निशान साहिब’ को लगाया था। ‘निशान साहिब’ सिख धर्म का प्रतीक है और इस झंडे को सभी गुरुद्वारा परिसरों में लगाया जाता है। सिद्धू ने मंगलवार की शाम फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में दावा किया कि वह कोई योजनाबद्ध कदम नहीं था और उसे कोई सांप्रदायिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए जैसा कट्टरपंथियों द्वारा किया जा रहा है।

पिछले कई महीनों से किसान आंदोलन से जुड़े सिद्धू ने कहा, ‘जब लोगों के वास्तविक अधिकारों को नजरअंदाज किया जाता है तो इस तरह के एक जन आंदोलन में गुस्सा भड़क उठता है।’ उन्होंने कहा, ‘आज की स्थिति में वह गुस्सा भड़क गया।’ तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा में शामिल लोगों से मंगलवार को खुद को अलग कर लिया और आरोप लगाया कि कुछ ‘असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ कर ली है, अन्यथा आंदोलन शांतिपूर्ण था।’ संयुक्त किसान मोर्चा में किसानों के 41 संघ शामिल हैं।

दूसरी ओर, गैंगस्टर से सामाजिक कार्यकर्ता बने लखबीर सिंह उर्फ लाखा सिधाना ने गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा से बुधवार को खुद को अलग करते हुए कहा कि उसने और कुछ अन्य किसान नेताओं ने राष्ट्रीय राजधानी में सिर्फ बाहरी रिंग रोड तक मार्च किया था। सिधाना ने कहा कि यह जांच का विषय है कि इतनी सुरक्षा के बावजूद लोग वहां तक कैसे पहुंच गए। सिधाना ने कहा, ‘मंगलवार को हुई घटनाओं से मैं दुखी हूं लेकिन मैं इनमें शामिल नहीं हूं। कोई वीडियो, तस्वीर या अन्य साक्ष्य नहीं हैं जो यह दिखाएं कि मैंने लोगों को भड़काया। हमने अपने किसान नेताओं के साथ शांतिपूर्ण तरीके से बाहरी रिंग रोड की तरफ मार्च किया। लाल किले की तरफ जाने का हमारा कभी कोई एजंडा नहीं था।’

दिल्ली-जयपुर राजमार्ग खाली करने का अल्टीमेटम
दिल्ली में ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा का असर किसानों के आंदोलन पर दिखना शुरू हो गया है। बुधवार सुबह दिल्ली-जयपुर राजमार्ग के पास 11 से अधिक पंचायतों की ओर से बैठक की गई। पंचायतों ने राष्ट्रीय राजमार्ग 48 के मसानी बैराज पर चार जनवरी से धरने पर बैठे किसानों को 24 घंटे में सड़क खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है।

इस दौरान पंचायत प्रतिनिधियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हाईवे खाली करने को लेकर बहस भी हुई, लेकिन पुलिस ने बीच बचाव कर मामला शांत करा दिया। करीब 30 किलोमीटर दूर हरियाणा-राजस्थान सीमा पर 13 दिसंबर से धरने पर बैठे किसानों के खिलाफ पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया गया। एसोसिएशन ने जय किसान आंदोलन के संयोजक एवं खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का नेतृत्व कर रहे योगेंद्र यादव का पुतला जलाकर लाल किला पर हुई घटना का विरोध दर्ज कराया है।

बुधवार को गांव डूंगरवास में आस-पास के गांवों के ग्रामीणों की मसानी के सरपंच कैप्टन लाला राम की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में गांव डूंगरवास, मसानी, जोनावास, तीतरपुर, निगानियावास, खरखड़ा, रसगण, जीतपुरा व निखरी आदि गांव के ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि एक महीने से आंदोलनकारियों ने दिल्ली-जयपुर हाईवे को बंधक बनाया हुआ है, जिस कारण आसपास के ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। हाईवे का ट्रैफिक गांव से गुजर रहा है जिससे गांवों के लिंक रोड और पानी की पाइप लाइनें टूट चुकी हैं। वाहनों की टक्कर से बिजली के खंभे टूट गए हैं।

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