कोविड का खेलाः दफनाए जाने के 15 दिन बाद वृद्धा घर लौट आई

अस्पताल में भर्ती पत्नी नहीं मिली तो मुतइला ने अफसरों से कहा। अफसरों ने नर्स से कहा। नर्स ने कहा, शायद मर गई। थोड़ी देर बाद बूढ़े पति को एक सीलबंद शव थमा दिया। बूढ़े ने उसे बिना देखे ही दफना दिया। लेकिन वह शव किसी और का था।

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PPE किट में कैद शव को पत्नी समझ करा दिया अंतिम संस्कार, 18 दिन बाद घर लौटी तो उड़े होश(सांकेतिक फोटो – पीटीआई)

मरने के 16 दिन के बाद मुतइला गदैया की पत्नी गिरिजम्मा लौट आई लेकिन इस बीच मुतैया के पुत्र की मौत हो चुकी थी। कोविड का यह खेला आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में हुआ। मुतइला की पत्नी और पुत्र दोनों कोरोना वाइरस की चपेट में आ गए थे।

जगइयापेट तालुका स्थित क्रिश्चियनपेट गांव में रहने वाले मुतइला की सत्तर वर्षीय पत्नी कोविड से संक्रमित हो गई थी। उसको 12 मई को विजयवाड़ा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती कराने के बाद मुतइला रोज अस्पताल जाने लगा। वह वृद्धा को देखता और डॉक्टरों से हालचाल लेकर लौट आता। लेकिन 15 मई को जब वह अस्पताल पहुंचा तो उसकी पत्नी बेड में मिली नहीं। उसने कोविड वार्ड में यहां-वहां दूसरे बेड देखे मगर उसकी वृद्ध पत्नी का कोई अता-पता न मिला। थक-हार कर उसने अस्पताल के अधिकारियों के पास जाकर दुखड़ा रोया। अधिकारियों ने ड्यूटी पर तैनात नर्स को बुलाया। नर्स ने कुछ देर सोचा और फिर बोली कि शायद वृद्ध महिला की मृत्यु हो गई।

अस्पताल वाले कुछ देर भागदौड़ करते रहे और फिर मुतइला से बोले कि शव मिल गया है। मॉर्चरी में रखा था। कुछ देर बाद अस्पताल वालों ने मुतइला को कोविड नियमों के तहत एक सीलबंद मुर्दा शरीर यह कहते हुए थमा दिया कि यही तुम्हारी बीवी है। दुखी मुतइला शव को लेकर किसी तरह अपने गांव पहुंचा और कुछ देर के रोने-धोने के बाद मृत शरीर रीति-रिवाज के मुताबिक दफना दिया गया।

एक हफ्ते बाद मुतइला को खबर मिली कि खम्माम जिले में रहने वाले उसके पुत्र रमेश (35) की भी कोविड से मृत्यु हो गई है। पहले पत्नी और उसके बाद पुत्र के निधन से मुतइला बुरी तरह टूट गया। लेकिन रीति-रिवाज तो निभाने ही पड़ते हैं। सो पहली मई को गिरिजम्मा और उसके पुत्र रमेश की याद में गांव में एक मेमोरियल सर्विस का आयोजन किया गया। लेकिन, इसके अगले दिन दो मई की सुबह चमत्कार हो गया। घर की कुंडी खड़की और जब दरवाजा खोला गया तो मुतइया के सामने उसकी सत्तर साल की बूढ़ी पत्नी गिरिजम्मा खड़ी थी।

वह पति को देखते ही भड़क उठी कि उसे लेने कोई अस्पताल क्यों नहीं आया। बोली, वो तो अस्पताल वाले भले थे जिन्होंने उसे 3000 रुपए दिए और कहा कि तुम ठीक हो गई हो। अब घर जाओ। लेकिन वृद्धा की स्वस्थ होने की खुशी ज्यादा देर तक न टिक पाई। पति ने जब बताया कि पुत्र की मौत हो गई है तो वह फूट-फूट कर रोने लगी।

मुतइया ने बताया कि कोविड नियमों के तहत सीलबंद मृत शरीर को खोला नहीं गया था। हमने मान लिया कि मरने वाली हमारी पत्नी है। उसे दफना दिया। पुलिस ने बताया कि मुतइला ने अस्पताल के खिलाफ लापरवाही का अभी तक कोई मामला नहीं दर्ज कराया है। तो वह दफनाया गया वह शरीर किसका था? यह कोई नहीं जानता। हो सकता है कि अस्पताल की मेहरबानी से दफनाए गए शव के वारिसों ने किसी अन्य शव की अंत्येष्टि कर दी हो।

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