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जनसत्ता युवा: चॉकलेट पसंद करने वालों के लिए है यह करिअर

चॉकलेट बनाने या तैयार करने वाले को चॉकलेटियर कहते हैं। चॉकलेट बनाने के अलावा इनके कार्यों में कई और चीजें भी शामिल होती हैं, जैसे चॉकलेट को आकर्षक बनाना और उसे सजाने के लिए कलात्मक वस्तुओं का सहारा लेना आदि। चॉकलेट बनाना महज एक कला नहीं है, इसलिए इसको बनाने से जुड़े विज्ञान को समझना भी जरूरी है।

चॉकलेट बनाने में भी है करियर और अवसर।

चॉकलेट का नाम सुनते ही छोटे-बड़ों सभी का मन मचलने लगता है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि चॉकलेट के बेहतरीन स्वाद से हमें कौन परिचित कराता है। यह काम करते हैं चॉकलेट टेस्टर। इन पेशेवरों का काम तरह-तरह के चॉकलेट को चखकर (टेस्ट करके) उनकी गुणवत्ता को परखना होता है।

भारत में चॉकलेट का बाजार जिस तेजी से बढ़ रहा है। उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि इस क्षेत्र में युवाओं के लिए काफी संभावनाएं हैं। उपहार में चॉकलेट के आदान-प्रदान का चलन पिछले कुछ सालों में बहुत बढ़ा है। त्योहारों पर इसकी मांग आम दिनों की तुलना में कई गुना तक बढ़ जाती है। चेन्नई में रहने वाले एल नितिन चोर्डिया भारत के पहले सत्यापित चॉकलेट टेस्टर हैं।

चॉकलेट टेस्टर के रूप में काम करने के लिए किसी भी चॉकलेट बनाने वाली भारतीय या बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ जुड़ा जा सकता है। देश के सभी बड़े शहरों में बेकरियां तरह-तरह के चॉकलेट उत्पादों को बेच रही हैं, इसलिए यहां भी अच्छे वेतन पर नौकरी मिल सकती है। बड़े होटलों और रेस्तरां में भी इन पेशेवरों के लिए रोजगार के कई विकल्प उपलब्ध हैं। किसी ग्राहक को चॉकलेट के रंग, सुगंध और आकर्षक डिजाइन के बाद उसका स्वाद ही सबसे ज्यादा पंसद आता है। इसलिए एक अच्छे चॉकलेट टेस्टर के लिए जरूरी है कि वह चॉकलेट के स्वाद के साथ-साथ इन चीजों पर भी पूरा ध्यान दे। उसे बाजार में मौजूद अन्य चॉकलेट के स्वाद और गुणवत्ता के बारे में पता होना चाहिए।

चॉकलेट बनाने या तैयार करने वाले को चॉकलेटियर कहते हैं। चॉकलेट बनाने के अलावा इनके कार्यों में कई और चीजें भी शामिल होती हैं, जैसे चॉकलेट को आकर्षक बनाना और उसे सजाने के लिए कलात्मक वस्तुओं का सहारा लेना आदि। चॉकलेट बनाना महज एक कला नहीं है, इसलिए इसको बनाने से जुड़े विज्ञान को समझना भी जरूरी है। तैयार हुई चॉकलेट को थोड़े-थोड़े समय के अंतराल के बाद नए और आकर्षक स्वरूपों में पेश करना इनका प्रमुख कार्य है। इनके रोजमर्रा के कार्यों में चॉकलेट बनाने वाले यंत्रों की कार्यक्षमता को परखने से लेकर उपकरणों के रखरखाव, समय से चॉकलेट को तैयार करने और आखिर में तैयार हुए चॉकलेट की गुणवत्ता को परखने सरीखे कार्य शामिल होते हैं।

चॉकलेट के इतिहास, फ्लेवर और गुणों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि चॉकलेट से विभिन्न तरह के डेजर्ट, कैंडी और स्कल्पचर को तैयार कर सकें। बाजार में उपलब्ध कई तरह की चॉकलेट और उनके सही उपयोग के बारे में पता होना चाहिए। तीन तरह की चॉकलेट सफेद, मिल्क और डार्क की खूबी और उनसे आकर्षक और स्वादिष्ट उत्पाद बनाने का हुनर भी होना चाहिए।
करिअर बनाने के लिए सबसे जरूरी है कि किसी स्थापित चॉकलेटियर के साथ काम कर कार्य की बारीकियों को अच्छे से सीखा जाए, इसलिए इंटर्नशिप करके काम से जुड़े सभी स्तरों की जानकारी लेना लाभदायक होता है। इस तरह के प्रशिक्षण के बाद व्यावहारिक शिक्षा का ज्ञान भी जरूरी होता है। अनुभवी चॉकलेटियर शानदार और कलात्मक चॉकलेट पीस तैयार करते हैं।

चॉकलेट डिजाइनर
चॉकलेट बनाने के बाद उसे अलग-अलग ढंग से डिजाइन करना और आकार देना चॉकलेट डिजाइनर का काम होता है। चॉकलेट जितनी डिजाइनर और आकर्षक होगी, उतनी ही बाजार में उसकी मांग भी होगी। चॉकलेट तैयार करने के बाद चॉकलेट डिजाइनर उसे अलग-अलग सांचों में डालकर कई तरह आकार देते हैं। इसके अलावा चॉकलेट डिजाइनर को लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए भी चॉकलेट की डिजाइन के साथ नए-नए प्रयोग करने होते हैं। इस कड़ी में वह त्योहारों और मौसम का भी पूरा ध्यान रखते हैं। यही नहीं वह चॉकलेट उत्पादों की पैकिंग को आकर्षक बनाने के लिए जरूरी सुझाव और निर्देश भी देते हैं।

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