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CAA के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को देशद्रोही नहीं ठहरा सकते, हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि वे एक कानून का विरोध करना चाहते हैं हम उन्हें देशद्रोही नहीं कह सकते। साथ ही कोर्ट ने महाराष्ट्र के बीड में विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने के खिलाफ अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को निरस्त कर दिया।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: February 15, 2020 9:36 AM
देश के अलग-अलग हिस्सों में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। (PTI Photo/R Senthil Kumar)

देश के कई हिस्सों में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इस कानून का विरोध कर रहे प्रर्दशनकारियों को कुछ लोग देशद्रोही भी कहा रहे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों को देशद्रोही नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि वे एक कानून का विरोध करना चाहते हैं हम उन्हें देशद्रोही नहीं कह सकते। साथ ही कोर्ट ने महाराष्ट्र के बीड में विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने के खिलाफ अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को निरस्त कर दिया है।

कोर्ट ने कहा कि एक आंदोलन को केवल इस आधार पर नहीं दबाया जा सकता कि वे सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि नौकरशाहों को ध्यान में रखना चाहिए कि जब लोग यह मनाने लगे कि विशेष अधिनियम उनके अधिकारों पर हमला है, ऐसे में वे उस अधिकार की रक्षा करने के लिए बाध्य हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि रेखांकित कीजिये कि अदालत यह पता लगाने के लिए नहीं है कि क्या इस तरह के अधिकार का प्रयोग कानून और व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा।

जो अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए एक स्थान पर बैठने की अनुमति मांग रहे थे उन याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए अदालत ने कहा कि उनसे लिखित में लिया गया है कि देश, किसी भी धर्म, राष्ट्र की एकता और अखंडता के खिलाफ कोई नारे नहीं लगाए जाएंगे। पीठ ने कहा, ‘इस तरह के आंदोलन से सीएए के प्रावधानों की अवज्ञा का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता। इसलिए अदालत से ऐसे व्यक्तियों के शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन शुरू करने के अधिकार पर विचार करने की अपेक्षा की जाती है। यह अदालत कहना चाहती है कि इन लोगों को केवल इसलिए गद्दार, देशद्रोही नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह एक कानून का विरोध करना चाहते हैं। यह केवल सीएए की वजह से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का कार्य होगा।’

अदालत 45 वर्षीय बीड निवासी इफ्तेखार शेख द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पिछले महीने एक पुलिस निरीक्षक के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर आंदोलन की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। पीठ ने बीड जिले के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) और बीड में मजलगांव शहर पुलिस द्वारा पारित दो आदेशों को रद्द कर दिया। पुलिस ने आंदोलन की इजाजत न देने के लिए एडीएम के आदेश का हवाला दिया था। पीठ ने कहा, ‘भारत को प्रदर्शन के कारण स्वतंत्रता मिली जो अहिंसक थे और आज की तारीख तक इस देश के लोग अंहिसा का रास्ता अपनाते हैं। हम बहुत भाग्यशाली है कि इस देश के लोग अब भी अहिंसा में विश्वास रखते हैं।’

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