पश्चिम बंगाल में हार के कुछ समय बाद ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) विभाजन के कगार पर है। पार्टी में 4 मई को ही असंतोष की शुरुआत हो गई थी जब यह स्पष्ट हो गया कि टीएमसी हारने वाली है, जिसके बाद कुछ नेताओं ने नेतृत्व की आलोचना करना शुरू कर दिया था। तब तक यह पूरी तरह से विद्रोह नहीं था।

असहमति के पहले संकेत दो दिन बाद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के आवास पर हुई एक बैठक में भी मिले, जब पूर्व मुख्यमंत्री ने उपस्थित सभी विधायकों से खड़े होकर अपने भतीजे और दूसरे नंबर के नेता अभिषेक बनर्जी के लिए तालियां बजाने को कहा। एक विधायक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “ममता बनर्जी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं थीं। जब उन्होंने हमें खड़े होने को कहा तो कई वरिष्ठ विधायक खड़े नहीं हुए लेकिन उन्होंने कुछ कहा भी नहीं।”

इसके अलावा नेतृत्व द्वारा फाल्टा के प्रभावशाली नेता जहांगीर खान के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने के फैसले को लेकर भी असंतोष था , जिन्हें अभिषेक का करीबी माना जाता है। उन्होंने पार्टी से परामर्श किए बिना अपने निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्निर्वाचन से अपना नाम वापस ले लिया था।

अभिषेक बनर्जी को TMC नेताओं ने बताया अहंकारी

एक वरिष्ठ टीएमसी विधायक ने कहा, “अभिषेक बनर्जी बेहद अहंकारी थे। इतनी शर्मनाक हार के बाद भी जब उनसे जहांगीर खान के बारे में पार्टी की कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बस इतना कहा, ‘पार्टी का ट्वीट देखिए।’ ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने की घोषणा भी कर दी। इसके बाद ही विद्रोह की नींव पड़ी।”

टीएमसी सूत्रों के अनुसार, इसी दौरान बागी विधायकों ने विद्रोह करना शुरू किया। इस साजिश के केंद्र में उलुबेरिया पुरबा के विधायक और पूर्व राज्यसभा सांसद ऋतब्रता बनर्जी थे जिन्हें अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता (एलओपी) के रूप में मान्यता दी है। एक सूत्र के मुताबिक, पिछले हफ्ते ऋतब्रता के दिल्ली दौरे के बाद इस योजना को और गति मिली जहां उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की।

ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं हैं लेकिन अभिषेक के नेतृत्व को बर्दाश्त नहीं कर सकते

एक बागी विधायक ने बताया, “दिल्ली से लौटने के बाद योजना में तेजी आई। ऋतब्रता ने विधायकों के छात्रावास और कोलकाता के एक निजी होटल में एक के बाद एक कई बैठकें बुलाईं। सभी विधायकों को ऐसे नेतृत्व के खिलाफ एकजुट होने के लिए फोन आने लगे। हालांकि, हमारा मुख्य निशाना अभिषेक बनर्जी थे। हम ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं हैं लेकिन हम अभिषेक के नेतृत्व को अब और बर्दाश्त नहीं कर सकते।”

अल्पसंख्यक समुदाय से संबंध रखने वाले एक अन्य विधायक ने कहा, “ममता बनर्जी यह समझने को तैयार नहीं हैं कि हम पार्टी के खिलाफ नहीं हैं। हम भाजपा के साथ नहीं जा सकते और भाजपा के खिलाफ लड़ाई में हमें ममता बनर्जी की जरूरत है।” अभिषेक और राजनीतिक सलाहकार फर्म IPAC पर निशाना साधते हुए एक वरिष्ठ विधायक ने कहा, “हस्ताक्षर विवाद में अभिषेक बनर्जी ने जो किया उससे हमें बहुत अपमान हुआ है। वरिष्ठ विधायक इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। हमें ममता बनर्जी से कोई समस्या नहीं है लेकिन हम अभिषेक या किसी भी एजेंसी को पार्टी के कामकाज में दखल देने की अनुमति नहीं देंगे।”

दक्षिण 24 परगना के कुलपी से टीएमसी की विधायक बरनाली धारा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमारे पास इस समूह के साथ जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मैं वैसे तो राजनीति में सक्रिय नहीं हूं और जनता के लिए काम करने के लिए विधायक बनी थी। मुझे लगा कि इस समूह के साथ जाने से मैं ऐसा कर पाऊंगी। हमारे कार्यकर्ताओं को हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और हमें प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल रही है। बुधवार को प्रशासनिक बैठक के बाद मुख्यमंत्री हमारे साथ बैठे और उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि वे प्रशासन से बात करेंगे। मुझे लगता है कि अगर मैं इस गुट के साथ रहती हूं तो मुझे प्रशासन से भी मदद मिल जाएगी।”

ममता बनर्जी का आरोप- दिल्ली में उनकी पार्टी को तोड़ने की साजिश रची गई

सोमवार को टीएमसी ने ऋतब्रत और साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया और स्पीकर को पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी दी। इसी बीच ममता बनर्जी ने भी सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि दिल्ली में उनकी पार्टी को तोड़ने की साजिश रची गई है।

फेसबुक लाइव पर टीएमसी अध्यक्ष ने कहा, “जो व्यक्ति पहले सीपीएम में था (ऋतब्रत बंदोपाध्याय), वही यह सब कर रहा है। हमने दूसरों को टिकट से वंचित करके उसे टिकट दिया। जिन लोगों को टिकट नहीं मिला, उनसे मैं माफी मांगती हूं। हमारे 2,500 पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई, हजारों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस हमारे विधायकों को धमका रही है और उन्हें घर से बाहर न निकलने के लिए कह रही है। पुलिस विधायकों से कह रही है कि वे उस व्यक्ति (ऋतब्रता बनर्जी) का समर्थन करें जिसे हमने निष्कासित किया है और हमारी पार्टी को तोड़ दें।”

अब बंगाल में पार्टी की कमजोर स्थिति को देखते हुए टीएमसी में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि एक सप्ताह के भीतर संसदीय दल में फूट पड़ सकती है। एक वरिष्ठ टीएमसी सांसद ने कहा, “भाजपा नेता हमारे विधायक दल को तोड़ने के बाद चुप नहीं बैठेंगे। अभिषेक बनर्जी संसद में भी घिर जाएंगे। हमें उम्मीद है कि हमारे दो-तिहाई सांसद बहुत जल्द बगावत करेंगे। यह टीएमसी के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। एकनाथ शिंदे और अजीत पवार की तरह , बागी टीएमसी सांसदों को भी चुनाव चिन्ह और पार्टी के नाम पर अधिकार मिल जाएगा।”

कौन हैं ऋतब्रत बनर्जी? ममता की टीएमसी में कर दिए दो फाड़

बागवती विधायकों के गुट ने ऋतब्रत को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है, जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष ने नेता विपक्ष भी स्वीकार कर लिया है। अहम बात यह है कि ऋतब्रत बनर्जी, ममता बनर्जी को तो अपनी नेता और मार्गदर्शक मान रहे हैं लेकिन असली बगावत उनके भतीजे के खिलाफ कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें