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‘कितने भूख से तो कितने पैदल चलते-चलते मर गए, पीएम केअर्स फंड से कितनों प्रवासी मजदूरों को दिए गए पैसे?’ कपिल सिब्बल ने पीएम से पूछे सवाल

लॉकडाउन खोलने को लेकर सिब्बल ने कहा कि चार घंटे में लॉकडाउन लागू करने वाली सरकार को अब मालूम नहीं किस रास्ते जाना है। सिब्बल ने कहा कि पहले एक एडवाइज़री आती है फिर दूसरी... सरकार के पास प्रवासी मजदूरों का आंकड़ा नहीं है।

कपिल सिब्बल ने पीएम केयर फ़ंड को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछे हैं। (pc-ANI)

कोरोना संकट के बीच सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेजी पर है। कांग्रेस वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने पीएम केयर फ़ंड को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछे हैं। सिब्बल ने पूछा है कि पीएम केयर्स फंड से प्रवासियों को कितना पैसा दिया गया। लॉकडाउन खोलने को लेकर सिब्बल ने कहा कि चार घंटे में लॉकडाउन लागू करने वाली सरकार को अब मालूम नहीं किस रास्ते जाना है। सिब्बल ने कहा कि पहले एक एडवाइज़री आती है फिर दूसरी… सरकार के पास प्रवासी मजदूरों का आंकड़ा नहीं है।

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा “मैं पीएम मोदी से पूछना चाहता हूं, ‘क्या आप हमें बता सकते हैं कि आपने अपने पीएम केयर फंड से मजदूरों को कितना पैसा दिया?’ मैं उनसे इस सवाल का जवाब देने का अनुरोध करता हूं। इस अवधि के दौरान कई लोगों की मृत्यु हो गई, कुछ की मृत्यु चलते-चलते हो गई, कुछ की ट्रेन में मृत्यु हो गई, कुछ की भूख से मृत्यु हो गई।”

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कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में कितने मजदूर हैं सरकार को यह भी नहीं पता है। सिब्बल ने बताया “देश में करीब 12 करोड़ प्रवासी मजदूर हैं, सरकार के पास ये डेटा नहीं है। 14 मई तक 73 लोगों की मुखमरी से मौत हुई है। सिब्बल ने न्यायाधीशों के तबादलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ टिप्पणी करने पर जजों का तबादला किया गया है। सिब्बल ने कहा कि अगर आप पत्रकार को वल्चर कहेंगे तो मतलब आप अपना कल्चर भूल गए हैं। ये कहना भी सही नहीं कि कुछ हाईकोर्ट समांतर सरकार चला रही है। इस तरह की दलील सरकार का घमंड दिखाती है। कई जजों को बदल दिया जाता है, बेंच बदल जाती है, कोर्ट को इन सब बातों का संज्ञान लेना चाहिए।


पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भूखमरी के इंडेक्स में 117 देशों में से भारत की 102वीं रैंक है। यदि सरकार अपने एजेंडे से इतर इस पर काम करती, तो आज यह हालात नहीं होती। लेकिन, सरकार तो गरीबों से सोशल डिस्टेंसिंग कर रही है।

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