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टीवी डिबेट में बोलीं बीजेपी प्रवक्ता- राजनीति छोड़ सकते हैं भगवान श्रीराम को नहीं

जैसे-जैसे गुजरात चुनाव नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे विकास के मुद्दे और अन्य चुनावी मुद्दे गौण होते जा रहे हैं और हिन्दुत्व उन पर हावी होता जा रहा है।

बीजेपी के नेता तो अब यहां तक कह रहे हैं कि वो राजनीति छोड़ सकते हैं मगर भगवान श्री राम को नहीं छोड़ सकते।

जैसे-जैसे गुजरात चुनाव नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे विकास के मुद्दे और अन्य चुनावी मुद्दे गौण होते जा रहे हैं और हिन्दुत्व उन पर हावी होता जा रहा है। बीजेपी के नेता येन-केन प्रकारेण हिन्दुत्व की राह पकड़ रहे हैं। मामले में गर्माहट कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर पर उपजे विवाद ने पकड़ी, जब बीजेपी ने उनके धर्म पर सवाल खड़े किए। अब यही मुद्दा मीडिया जगत में बहस का विषय बन गया है। बीजेपी के नेता तो अब यहां तक कह रहे हैं कि वो राजनीति छोड़ सकते हैं मगर भगवान श्री राम को नहीं छोड़ सकते। इंडिया टुडे चैनल पर लाइव डिबेट में बीजेपी प्रवक्ता अनिला सिंह ने ये बातें कहीं। हालांकि उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सबका विकास, सबका साथ के सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम भी इसी का एक हिस्सा हैं।

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि देश के लोगों को अपने धर्म के प्रति आस्था दिखाने का अधिकार है। बीजेपी नेता यूपी नगर निकाय चुनावों में मिली जीत से भी गदगद नजर आईं और यह मानने से भी गुरेज नहीं किया कि वहां भी मंदिर लहर का फायदा बीजेपी को मिला है। बता दें कि कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी पर हर मुद्दे का साम्प्रदायीकरण करने का आरोप लगाया था।

बता दें कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार (29 नवंबर) को गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने जलाभिषेक किया था। उनके मंदिर जाने पर बाद में विवाद खड़ा हो गया था। मंदिर के रजिस्टर में उनकी गैर हिन्दू के तौर पर एंट्री की बात कही गई थी। राहुल गांधी के साथ-साथ राज्य सभा सांसद और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल की भी एंट्री गैर हिन्दू के तौर पर कराई गई थी। इस विवाद के बाद कांग्रेस की तरफ से सफाई दी गई कि राहुल जनेऊधारी हिन्दू हैं। इतना ही नहीं बाद में कपिल सिब्बल ने पीएम के हिन्दू होने पर सवाल खड़े किए तो अगले यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राजबब्बर ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को जैन करार दिया। इस तरह गुजरात चुनाव अब फिर से हिन्दुत्व के मुद्दे पर आ टिका है।

 

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