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दस्तकारों के जीवन में बदलाव और विरासत को सहेजने का अभियान

एसके मिश्रा का कहना है कि ग्रामीण विरासत और विकास एक दूसरे के पूरक हैं।

एस के मिश्रा। फाइल फोटो।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के प्रमुख सचिव रहे एसके मिश्रा वर्तमान में ‘इंडियन ट्रस्ट फार रूरल हैरिटेज एंड डेवलपमेंट’ यानी आइटीआरएचडी के माध्यम से हजारों दस्तकारों के जीवन और रहन-सहन में बदलाव ला रहे हैं। मिश्रा का कहना है कि ग्रामीण विरासत और विकास एक दूसरे के पूरक हैं। बिना एक के दूसरे के बारे में सोचा नहीं जा सकता है।

90 साल के एसके मिश्रा कहते हैं कि मैंने लंबे समय तक केंद्र और राज्य सरकारों में काम किया। सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्ति मिलना एक प्रक्रिया है लेकिन मैं सेवानिवृत्त होकर खाली नहीं बैठ सकता। उन्होंने कहा कि मुझे समाज से बहुत कुछ मिला है और मैं भी समाज को कुछ देना चाहता हूं। मिश्रा ‘इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चरल हैरिटेज’ यानी इनटेक के करीब 10 साल प्रमुख रहे। इसके बाद 2011 में कुछ लोगों के साथ मिलकर आइटीआरएचडी की स्थापना की।

केंद्र सरकार में पर्यटन, नागरिक उड्डयन और कृषि सचिव और हरियाणा के तीन मुख्यमंत्रियों के प्रमुख सचिव रहे मिश्रा ने बताया कि इनटेक का काम विशेष रूप से शहरी इलाकों में था और ग्रामीण इलाकों तक उसकी पहुंच नहीं थी। उन्होंने बताया कि इस दूरी को पाटने के लिए हमने आइटीआरएचडी की शुरुआत की।

मिश्रा ने बताया कि हम ग्रामीण विरासत और दस्तकारों (बुनकर, कुम्हार, गायक आदि) के लिए का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड आदि में हैं। इनमें आजमगढ़, हरिहरपुर, निजामाबाद और मुबारकपुर गांवों के दस्तकार हमसे जुड़े हुए हैं। मिश्रा ने बताया कि झारखंड के मालुती गांव में टेराकोटा के 108 मंदिर थे जिनमें से अभी 62 मंदिर बचे हुए हैं। इन मंदिरों का आइटीआरएचडी संरक्षण कर रहा है। यह कार्य झारखंड की सरकार से मिला है जिस पर नौ करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। यह कार्य जल्द ही पूरा हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि झारखंड की राजधानी रांची में एक बिरसा मुंडा जेल है। सरकार ने हमें इस जेल का संरक्षण करने के लिए कहा था। हमें इस कार्य को सिर्फ दस महीने पूरा करके दे दिया। इस जेल को राज्य सरकार ने संग्रहालय में बदल दिया है। मिश्रा ने बताया कि हरियाणा के नूंह जिले में शेख मुसा की 700 साल पुरानी दरगाह का संरक्षण भी आइटीआरएचडी ने ही किया है।

मिश्रा ने बताया कि आइटीआरएचडी कई साल से आजमगढ़ महोत्सव करा रहा है। इस महोत्सव में सैकड़ों दस्तकारों और कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने आते हैं। इस दौरान उन्हें अच्छा मुनाफा होता है। उन्होंने बताया कि दस्तकारों और कलाकारों के आने-जाने, रहने आदि का सभी खर्च आइटीआरएचडी वहन करता है और पूरा लाभ दस्तकारों और कलाकारों को दे दिया जाता है। उन्होंने बताया कि इससे उन्हें न केवल पहचान मिलती है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। उन्होंने बताया कि हमें यह देखकर बहुत संतोष होता है कि दस्तकार अपने घरों को नया बनवा रहे हैं। वे मोटरसाइकिल खरीद रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं। इससे उनके जीवन में बड़े स्तर पर बदलाव आ रहा है।

मिश्रा ने बताया कि नोएडा में बन रहे हवाईअड्डे के आसपास के क्षेत्र का हम जल्द ही दौरा करेंगे। उन्होंने बताया कि इस दौरान हवाईअड्डे के आसपास गांवों में मौजूद विरासतों का पता लगाएंगे ताकि उनका संरक्षण किया जा सके। इसके अलावा भी कुछ और प्रोजेक्ट शुरू किए जाने हैं। उन्होंने बताया कि आइटीआरएचडी को निजी कंपनियों के सीएसआर फंड के अलावा अपने सदस्यों और सरकार की ओर से भी आर्थिक सहायता मिल जाती है।

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