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जस्टिस कर्णन ने CJI खेहर समेत सुप्रीम कोर्ट के सात जजों से मांगा 14 करोड़ हर्जाना, सीबीआई को कहा- करो 20 जजों की जांच रिपोर्ट संसद को दो

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के जज सीएम कर्णन की सभी न्यायिक और प्रशासनिक शक्तियां छीन ली हैं फिर भी उन्होंने स्वतः संज्ञान लेते हुए जारी किया आदेश।

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सीएस कर्णन की सभी न्यायिक शक्तियां समाप्त कर दी हैं।

सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर और एवं छह अन्य वरिष्ठतम जजों के खिलाफ स्यू मोटो आर्डर (स्वतंः संज्ञान लेते हुए दिया गया आदेश) जारी करते हुए हर्जाने के दौर 14 करोड़ रुपये देने का आदेश जारी कर दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही जस्टिस कर्णन की सभी न्यायिक शक्तियां छीन ली थीं। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की पीठ ने जस्टिस कर्णन के अवमानना के एक मामले में अदालत में न पेश होने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया था।

न्यायिक शक्तियों से वंचित किये जा चुके जस्टिस कर्णन ने अपने स्यू मोटो फैसले में सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के 20 मौजूदा जजों के खिलाफ जांच करके रिपोर्ट संसद को सौंपने का आदेश भी दिया है। अदालत जस्टिस कर्णन के खिलाफ 10 मार्च को गिरफ्तारी वारंट जारी किया था और उन्हें 31 मार्च तक अदालत में पेश करने के लिए कहा था। जस्टिस कर्णन पहले ही सुप्रीम कोर्ट के दो समन की अनदेखी करते हुए अदालत में गैर-हाजिर रह थे।  मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस खेहर ने कहा था कि उनकी मौजूदगी मुकदमे की कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।

सभी न्यायिक शक्तियां छीन लिए जाने के बावजूद जस्टिस कर्णन ने बुधवार (15 मार्च) को ये आदेश जारी किया। गुरुवार (16 मार्च) को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस समेत सात जजों की पीठ को इस बाबत एक पत्र भी भेजा। जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आरोप लगाया कि उन्हें दलित होने के कारण परेशान किया जा रहा है। इससे पहले जस्टिस कर्णन उस समय भी विवाद में घिर गये थे जब उन्होंने कोलेजियम द्वारा ट्रांसफर किए जाने पर खुद ही इस पर रोक लगाने का आदेश दे दिया।

वीडियो: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- "5 साड़ी चुराने वाले को 1 साल जेल की सजा, करोड़ों रुपए लेकर भागने वाले का क्या?"

 

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