ईद से पहले बंगाल सरकार द्वारा पशु वध पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा फैसला सुरक्षित रख लिया गया। इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि इस्लाम में बलिदान इब्राहिम के बलिदान से जुड़ा है।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “हमने आज अपने पार्टी विधायक अखरुज्जमान के माध्यम से एक याचिका दायर की। हमारी बहुत विस्तृत सुनवाई हुई जो तीन घंटे से अधिक चली और सभी बिंदुओं पर चर्चा हुई। 1950 का अधिनियम पशु वध नियंत्रण कानून है जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि पशुओं पर नियंत्रण रखना है जो कि 1950 की स्थिति थी ताकि पशुपालन और दूध उत्पादन प्रभावित न हो।”

महुआ ने आगे कहा, “इसके अलावा यह केवल नगरपालिका क्षेत्रों तक ही सीमित था। पंचायत क्षेत्रों में इस अधिनियम का कोई प्रावधान नहीं है। इस्लाम में, बलिदान इब्राहिम के बलिदान से जुड़ा है, जो अपने बच्चे का भी बलिदान करने को तैयार थे। पशु का स्वस्थ होना आवश्यक है। अगर आप 14 वर्ष के किसी बीमार, अपंग या अन्य अनुपयुक्त पशु को लेते हैं तो वह बलिदान के लिए भी उपयुक्त नहीं है। यहां तक ​​कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम भी धार्मिक बलिदान को छूट देता है और पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम भी धारा 12 के तहत छूट प्रदान करता है। इसलिए, हमने मुद्दों के पूरे दायरे पर बहस की और यह एक बहुत विस्तृत चर्चा थी। हमें आज शाम तक आदेश मिलने की उम्मीद है।”

कलकत्ता उच्च न्यायालय का पशु वध पर फैसला

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अगले सप्ताह मनाए जाने वाले ईद उल अजहा के दौरान पशु वध पर पश्चिम बंगाल सरकार की हालिया अधिसूचना को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ताओं ने बकरीद पर कुर्बानी करने के लिए पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के तहत छूट का अनुरोध किया है।

एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने अदालत के समक्ष दलील दी कि यह अधिनियम 1950 में बनाया गया था, जब कृषि घरेलू पशुओं पर निर्भर थी लेकिन वर्तमान में खेती के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिनियम की धारा 12 धार्मिक उद्देश्यों के लिए छूट प्रदान करती है। भट्टाचार्य ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में मवेशियों की संख्या में अच्छी वृद्धि हुई है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने लगाई पशु वध पर रोक

इन याचिकाओं का विरोध करते हुए, राज्य और केंद्र के वकीलों ने कहा कि कुछ प्रतिबंध लगाने वाली अधिसूचना अधिनियम के प्रावधानों और इस उच्च न्यायालय के 2018 और 2022 के निर्णयों के अनुसार जारी की गई थी। उन्होंने बताया कि अधिसूचना में दिए गए प्रावधानों के अनुसार, मवेशियों की उम्र और स्वास्थ्य की जांच कानून के अनुसार की जानी चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर अधिकारियों से ‘स्वास्थ्य प्रमाणपत्र’ प्राप्त किए बिना पशु वध पर रोक लगा दी है और निर्देशों का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। राज्य ने यह भी स्पष्ट किया है कि खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध प्रतिबंधित होगा।

आरजी कर रेप केस: कलकत्ता हाईकोर्ट ने SIT गठित करने का दिया आदेश

पश्चिम बंगाल के आरजी कर रेप और मर्डर केस की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई के संयुक्त निदेशक (पूर्वी क्षेत्र) की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। कोलकाता हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आरोपों को दबाने की जांच रिपोर्ट 25 जून तक दाखिल की जाए। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

(भाषा के इनपुट के साथ)