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कायरेन डिसूजा : 13 हजार फुट ऊंचे पहाड़ दर्रे पर रचा इतिहास

डिसूजा के नाम कई कीर्तिमान पहले से ही जुड़ चुके हैं। वे ‘अल्ट्रा एंड ट्रेल रनिंग’ के लिए भारत की राष्ट्रीय टीम के सदस्य रहे। उन्होंने ‘वर्ल्ड ट्रेल सीरीज चैंपियनशिप’ और 24 घंटे दौड़ के लिए हुई चैंपियनशिप में भाग लिया। ग्रीस में 246 किलोमीटर की ऐतिहासिक दौड़ में चयनित होने वाले वे एकमात्र भारतीय हैं।

नागपुर के धावक कायरेन डिसूजा

नागपुर के धावक कायरेन डिसूजा ने मनाली के 13 हजार फुट ऊंचे हामटा व रोहतांग टॉप को 19 घंटे में पार कर नया रेकार्ड बनाया है। डिसूजा ने रात 12 बजे मनाली से अपना अभियान शुरू किया। सुबह होने तक डिसूजा 13 हजार फुट ऊंचे हामटा जोत के पार जा पहुंचे। पूरा दिन हामटा से छतड्डू और छतड्डू से दौड़ते हुए रोहतांग पार कर शाम सात बजे मनाली में दस्तक दी। कायरेन भारत के एकमात्र ‘अल्ट्रामैराथन धावक’ हैं।

मनाली पहुंचने पर धावक डिसूजा का जोरदार स्वागत किया गया। डिसूजा की मदद करने को उनकी पूरी टीम साथ रही। डिसूजा ने इस दौड़ को मनाली के अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण खेल संस्थान की देखरेख में पूरा किया गया। इस दौड़ को शुरू करने से पहले हर कोई कह रहा था कि यह नामुमकिन है, क्योंकि ट्रैकर और स्थानीय लोग कम से कम चार दिन में चढ़ाई को पूरा करते हैं। लेकिन डिसूजा ने मात्र 19 घंटों में 126 किलोमीटर लंबे पहाड़ की चढ़ाई दौड़कर पूरी कर ली। इस अभियान से पहले डिसूजा ने इस पर्वत को पार करने का कड़ा अभ्यास किया। एक साथ दो दर्रे पार करना अपने आप में हैरान करने वाला कीर्तिमान है। हामटा व रोहतांग दर्रा 13 हजार फुट से भी ऊंचे हैं।

कीर्तिमान रचने वाले डिसूजा की टीम के सदस्य रहे प्रशांत भट्ट, आदित्य बिक्रम पांडे, मोहित शर्मा, उत्कर्ष मित्तल, अभिलाष महाजन, राहुल रावत, क्षितिज गुप्त व शुक्ला गुप्ता को अलग-अलग काम बांटे गए थे। सबने तालमेल निभाया। डिसूजा अपने कीर्तिमान का श्रेय अपनी टीम के सदस्यों को देते हैं।

उनकी टीम की तैयारी पूरी हो जाने के बाद आधी रात 12 बजे डिसूजा ने मनाली से दौड़ना शुरू किया और अलेउ, प्रीणी, सेथन होते हुए वे हामटा जोत पहुंचे। धावक ने बिना रुके हामटा पार कर लाहुल की ओर छतड्डू में दस्तक दी। छतड्डू से सड़क से होते हुए डिसूजा ग्राम्फु पहुंचे, जहां से रोहतांग दर्रे को पार कर शाम सात बजे मनाली बाजार पहुंच गए। इससे पहले भी डिसूजा ने जून में 16 हजार फीट ऊंचे फ्रेंडशिप पीक को 12 घंटे में चढ़ने में सफलता पाई है।

वे कहते हैं कि देश के युवाओं को दौड़ के प्रति प्रेरित करना मेरे इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य है। साथ ही ट्रैकिंग की ओर भी लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। देश में लंबी दूरी की दौड़, एडवेंचर स्पोर्ट्स और पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए नई संभावनाएं खोजने के लिए तथा हिमालय एवं प्रकृति को साफ व स्वच्छ रखने के लिए अभियान चलाए जाने की जरूरत है।

डिसूजा के नाम कई कीर्तिमान पहले से ही जुड़ चुके हैं। वे ‘अल्ट्रा एंड ट्रेल रनिंग’ के लिए भारत की राष्ट्रीय टीम के सदस्य रहे। उन्होंने ‘वर्ल्ड ट्रेल सीरीज चैंपियनशिप’ और 24 घंटे दौड़ के लिए हुई चैंपियनशिप में भाग लिया। ग्रीस में 246 किलोमीटर की ऐतिहासिक दौड़ में चयनित होने वाले वे एकमात्र भारतीय हैं। फ्रांस में आयोजित ‘यूटीएमवी सीसीसी एज’ श्रेणी में उन्होंने दूसरा स्थान पाया। फ्रांस में आयोजित ‘ऐगेर अल्ट्रा’ में सातवां स्थान पाया। वे चीन में ‘एडिंग स्काई अल्ट्रा’ में आठवां स्थान पा चुके हैं।

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