पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को और ज्यादा ताकत और स्वायत्तता देने का विरोध किया है। चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि ”कभी-कभी पिंजरे में बंद तोता भी पिटबुल बन जाता है” और ऐसा निगरानी और नियंत्रण की कमी की वजह से होता है।
खुफिया ब्यूरो (आईबी) के पूर्व विशेष निदेशक यशोवर्धन आजाद द्वारा लिखित पुस्तक ‘Policing the Republic’ के विमोचन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में चिदंबरम ने यह टिप्पणी की।
इस कार्यक्रम में पुलिस सुधारों और पुलिस द्वारा की जाने वाली कथित ज्यादतियों पर चर्चा हुई।
चिदंबरम ने सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों को अधिक शक्तियां और स्वायत्तता देने के विचार को खारिज कर दिया। हालांकि, उन्होंने आंतरिक सुधारों की जरूरत पर सहमति जताई।
केंद्र में आकर खराब क्यों बन जाते हैं अधिकारी…
पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े एक सवाल के जवाब में वरिष्ठ कांग्रेस नेता चिदंबरम ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में थाना प्रभारी (एसएचओ) से लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तक एक पूरी व्यवस्था होती है। उन्होंने कहा, ”सीबीआई में बेहतरीन अधिकारी काम करते हैं, जिनमें से ज्यादातर राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं। वह राज्य में एक अच्छे अधिकारी होते हैं।”
चिदंबरम ने आगे कहा, ”वह केंद्र में आकर खराब अधिकारी क्यों बन जाते हैं? क्योंकि निगरानी और नियंत्रण की कमी होती है। पिंजरे में बंद तोता भी कभी-कभी पिटबुल बन सकता है।”
क्या है आजाद की किताब में?
यशोवर्धन आजाद ने अपनी किताब में सुरक्षा खतरों, तकनीक और राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के साथ व्यक्तिगत सुरक्षा में आए बदलावों का जिक्र किया है। इसमें रोमन सम्राटों की रक्षा करने वाले ‘प्रेटोरियन गार्ड’, चीन के ‘जिनवेई’, ऑटोमन साम्राज्य के ‘जनिस्सरी’ और मुगल शासकों के ‘अहदी’ से लेकर अमेरिका की ‘सीक्रेट सर्विस’ और भारत के ‘एसपीजी’ (विशेष सुरक्षा समूह) का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है।
आजाद ने किताब में बताया है कि भारत में विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) का गठन 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही बॉडीगार्ड द्वारा हत्या किए जाने के बाद हुआ था।
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