CAG report on Boeing P-8I aircraft criticised Defence ministry for made Spanish plane costlier than US aircraft - मनमोहन सरकार ने स्‍पेनिश विमान की कीमत बढ़ा दी ताकि अमेरिकी एयरक्राफ्ट सस्‍ता लगे : सीएजी - Jansatta
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मनमोहन सरकार ने स्‍पेनिश विमान की कीमत बढ़ा दी ताकि अमेरिकी एयरक्राफ्ट सस्‍ता लगे : सीएजी

CAG की रिपोर्ट में एक और रक्षा खरीद में अनियमितता की बात सामने आई है। इसमें कहा गया है कि स्‍पेनिश कंपनी के मुकाबले अमेरिकी कंपनी बोइंग के P-8I विमान को जानबू्झकर सस्‍ता दिखाया गया, ताकि अमेरिकी विमान कंपनी को हजारों करोड़ रुपये मूल्‍य के रक्षा करार का ठेका मिल जाए। मनमोहन सिंह की सरकार ने वर्ष 2009 में बोइंग के साथ 8 P-8I विमान खरीदने का समझौता किया था।

Author नई दिल्‍ली | August 8, 2018 3:54 PM
CAG ने P-8I विमान खरीद में गड़बड़ी की बात कही है। (फाइल फोटो)

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हुए एक और रक्षा घोटाले को उजागर किया है। सीएजी की रिपोर्ट में पनडुब्‍बी और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को तबाह करने में सक्षम पी-8आई (P-8I पॉसीडॉन लॉन्‍ग रेज मैरीटाइम एंटी-सबमरीन वारफेयर) टोही विमानों की खरीद में व्‍यापक वित्‍तीय अनियमितता की बात कही गई है। तत्‍कालीन यूपीए सरकार ने नौसेना के लिए वर्ष 2009 में अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग से 8 P-8I एयरक्राफ्ट खरीदने का करार किया था। यह सौदा 2.1 बिलियन डॉलर (14,417 करोड़ रुपये) में तय हुआ था। वर्ष 2015 तक सभी विमानों की आपूर्ति भी कर दी गई थी। सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में हजारों करोड़ रुपये मूल्‍य के इस रक्षा करार पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इसके अनुसार, तत्‍कालीन सरकार ने स्‍पेन की रक्षा कंपनी ईएडीएस सीएएसए के विमान की कीमत को जानबू्झकर बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया, ताकि अमेरिकी कंपनी बोइंग को इसका ठेका मिल जाए। संसद में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी बोइंग के साथ ऑफसेट एग्रीमेंट भी किया गया था, जिसपर आज तक अमल नहीं किया गया है। नौसेना के पूर्व प्रमुख अरुण प्रकाश ने सीएजी रिपोर्ट की आलोचना की है। बता दें क‍ि यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब मुख्‍य विपक्षी पार्टी कांग्रेस राफेल डील को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस आरोप है कि मौजूदा सरकार ने बढ़ी हुई कीमतों के साथ यह करार किया है।

‘स्‍पेनिश कंपनी के लिए अतिरिक्‍त प्रावधान’: सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय के कदम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट का कहना है कि रक्षा विभाग ने स्‍पेनिश रक्षा कंपनी EADS CASA के लिए 20 साल का प्रोडक्‍ट सपोर्ट कॉस्‍ट का प्रावधान जोड़ दिया था। लिहाजा, प्रति विमान इसकी कीमत काफी ज्‍यादा हो गई थी। इस तरह यह ठेका अमेरिकी कंपनी बोइंग को दे दिया गया था। रिपोर्ट की मानें तो बोइंग के साथ हुए करार में इस क्‍लॉज का उल्‍लेख ही नहीं है। हालांकि, बाद में बोइंग ने प्रोडक्‍ट सपोर्ट देने के लिए अलग से करार किया था। सीएजी ने इस प्रक्रिया को गलत करार दिया है। फिलहाल नौसेना के बेड़े में 12 P-8I विमान हैं। अगले दशक तक 24 P-8I विमानों का बेड़ा तैयार करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है।

मोदी सरकार ने भी 4 P-8I विमानों के लिए किया करार: नरेंद्र मोदी की सरकार ने भी मनमोहन सरकार की गलतियों को दोहराया है। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा NDA सरकार ने UPA सरकार द्वारा तय कीमत पर ही जुलाई 2016 में बोइंग के साथ 4 और P-8I विमान खरीद का करार किया है। यह समझौता 1 बिलियन डॉलर (6,865 करोड़ रुपये) का है। P-8I टोही विमानों की दूसरी खेप वर्ष 2020 तक मुहैया कराई जाएगी। सीएजी की रिपोर्ट में इन विमानों की तकनीकी क्षमताओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अनुसार, विमान में लगे रडार की क्षमता अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा पनडुब्‍बी को तबाह करने वाले ‘प्राइमरी ऑफेंसिव वेपन’ से जुड़ा करार अब तक अंजाम तक नहीं पहुंच सका है।

ऑफसेट करार पर अब तक अमल नहीं: P-8I विमान खरीद समझौते के तहत बोइंग के साथ 641.26 मिलियन डॉलर (3,127.43 करोड़ रुपये) का ऑफसेट क्‍लॉज भी जोड़ा गया था। इसके अंतर्गत बोइंग को तीन हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा मूल्‍य का रक्षा उपकरण भारत से खरीदना है। इसपर अगस्‍त 2016 तक अमल हो जाना चाहिए था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। रक्षा मंत्रालय द्वारा तय ऑफसेट क्‍लॉज के तहत बोइंग को रक्षा करार के कुल मूल्‍य का 30 फीसद तक रक्षा उपकरण भारत से खरीदना था।

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