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आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति खत्म, दोबारा परीक्षा का मिलेगा मौका, उसमें भी फेल तो प्रोमोशन नहीं

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आठवीं कक्षा तक के छात्रों को अनुत्तीर्ण ना करने की नीति खत्म करने की बुधवार (2 अगस्त) को मंजूरी दे दी।

Author नयी दिल्ली | August 3, 2017 09:53 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।(Express Photo: Gurjant Pannu)

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आठवीं कक्षा तक के छात्रों को अनुत्तीर्ण ना करने की नीति खत्म करने की बुधवार (2 अगस्त) को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल ने साथ ही देश में विश्व स्तर के 20 संस्थानों के निर्माण की मानव संसाधन विकास मंत्रालय की योजना को भी अपनी मंजूरी दे दी। इसे लेकर बाल निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार संशोधन विधेयक में एक प्रावधान बनाया जाएगा जिससे राज्यों को साल के अंत में होने वाली परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर छात्रों को पांचवीं और आठवीं कक्षा में रोकने की मंजूरी मिल जाएगी। हालांकि छात्रों को कक्षाओं में रोकने से पहले एक परीक्षा के जरिये सुधार का एक दूसरा मौका दिया जाएगा। विधेयक अब मंजूरी के लिए संसद में पेश किया जाएगा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के मौजूदा प्रावधान के तहत छात्र परीक्षा में उत्तीर्ण हुए बिना भी आठवीं कक्षा तक बढ़ते जा सकते हैं। यह एक अप्रैल, 2011 को लागू हुए अधिनियम के महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। नए कानून को मंजूरी दिलाने के लिए संसद में बिल को रखा जाएगा।

बता दें आरटीई के मौजूदा प्रावधान के अनुसार छात्रों को 8 कक्षा तक फेल होने के बाद भी अपने आप प्रमोट कर दिया जाता है। नो-डिटेंशन पॉलिसी, 1 अप्रैल 2010 को लागू किए गए आईटीई ऐक्ट के मुख्यों हिस्सों में से एक हैं। वहीं इसमें बदलाव कर दिए जाएंगे। इसके अलावा यूनिवर्सिटीज ग्रांट कमिशन (यूजीसी) ने इसी साल फरवरी महीने में नए रेग्यूलेशन पास कर 10 विश्व स्तरीय शिक्षण संस्थान बनाने की बात कही थी। कैबिनेट ने यूजीसी के इस प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है और इसके तहत 20 नए शिक्षण संस्थान बनाए जाएंगे। बीते महीने इस प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया था। शिक्षा संस्थान पब्लिक और प्राइवेट, दोनों सेक्टरों में बनाए जाएंगे। इन 20 यूनिवर्सिटी में से राज्य समर्थित 10 के लिए जल्द ही फंडिंग शुरू हो सकती है। हर संस्थान के लिए 500 करोड़ आविंटित किए जाएंगे।

 

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