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वायुसेना के लिए 83 तेजस विमानों की खरीद को मंजूरी

सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लगाई 48 हजार करोड़ रुपए के स्वदेशी रक्षा खरीद सौदे पर मुहर

Indian airforceरक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा पिछले मार्च में दिए गए तेजस एमके -1 ए आदेश को सीसीएस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक बैठक में मंजूरी दी थी।

सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने बुधवार को भारतीय वायुसेना के बेड़े के लिए 83 स्वदेशी एडवांस तेजस एमके-1ए जेट विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी। लगभग 48,000 करोड़ रुपए का यह सबसे बड़ा स्वदेशी रक्षा खरीद सौदा होगा। इस सौदे को भारतीय रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के लिए अहम माना जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बारे में जानकारी दी। इससे पहले रक्षा मंत्रालय ने 40 तेजस जेट की खरीद को मंजूरी दे दी थी। अब देश के पास कुल 123 एडवांस तेजस जेट हो जाएंगे।

राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, ‘यह सौदा भारतीय रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए गेम चेंजर होगा।’ रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, मंत्रिमंडल ने हिंदुस्तान एअरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से भारतीय वायु सेना के लिए 83 तेजस विमान खरीदने को मंजूरी प्रदान कर दी। इस सौदे के तहत 73 हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस एमके-1ए विमान और 10 तेजस एमके-1 प्रशिक्षण विमान शामिल हैं।

इन 123 जेट के अतिरिक्त भारत सरकार 170 तेजस एमके-2 की खरीद को मंजूरी देने पर विचार कर रही है, जो कि उन्नत इंजन और तकनीक से युक्त होगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2029 तक सभी 83 विमानों को वायुसेना को सौंपने का लक्ष्य है। इन 83 विमानों से वायुसेना की कम से कम छह स्क्वाड्रन बन जाएंगी। एक स्क्वाड्रन में 16-18 लड़ाकू विमान होते हैं। ये 83 एमके-1ए लड़ाकू जेट पुराने सौदे वाले एमके-1 से ज्यादा मारक क्षमता वाले हैं। तेजस स्वदेशी चौथी पीढ़ी का ‘टेललेस कंपाउंड डेल्टा विंग’ विमान है। यह ‘फ्लाई बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम’, ‘इंटीग्रेटेड डिजिटल एवियोनिक्स’, ‘मल्टीमॉड रडार’ से लैस लड़ाकू विमान है और इसके निर्माण में ‘कंपोजिट मैटेरियल’ का इस्तेमाल किया गया है। तेजस चौथी पीढ़ी के सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों के समूह में सबसे हल्का और सबसे छोटा है।

मंत्रालय के अनुसार, यह भारतीय वायु सेना (आइएएफ) की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण होगा। यह 50 फीसद की स्वदेशी सामग्री के साथ लड़ाकू विमानों की श्रेणी की पहली भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित है। बयान में कहा गया है कि मंत्रिमंडल ने परियोजना के तहत वायु सेना द्वारा बुनियादी ढांचे के विकास को भी मंजूरी दे दी है, ताकि वे अपने आधार डिपो में इसकी मरम्मत या रखरखाव से जुड़ी संरचनाएं जुटा सकें।

तेजस एमके-1ए : खासियत

1-तेजस एमके-1ए स्वदेश में डिजाइन, विकसित और निर्मित अत्याधुनिक चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है
2-यह विमान इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए सक्रिय एरे (एईएसए) रडार, दृश्यता के दायरे से बाहर (बीवीआर), मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक सूट (ईडब्लू) और हवा में ईंधन भरने की क्षमता (एएआर) से लैस है
3-इन 83 लड़ाकू विमानों से भारतीय वायुसेना की कम से कम छह स्क्वाड्रन बन जाएंगी। एक स्क्वाड्रन में 16-18 लड़ाकू विमान होते हैं।
4-यह लगभग सभी मामलों में चीन और पाकिस्तान द्वारा मिग-21 की नकल कर बनाए गए थंडरबर्ड से बेहतर है।
5-तेजस की सर्वाधिक गति 1.6 मैक (ध्वनि की रफ्तार से तेज) है। तेजस का अधिकतम थ्रस्ट 9163 केजीएफ है।
6-इस जेट पर दो आर-73 हवा से हवा में मार करने वाले प्रक्षेपास्त्र, दो 1000 पाउंड क्षमता के बम, एक लेजर डेजिग्नेशन पॉड और दो ड्रॉप टैंक्स हैं।
7-एक तेजस की लागत लगभग 300 करोड़ है। इसका इंजन अमेरिकी है, रडार और हथियार प्रणाली इजरायली और इजेक्शन सीट ब्रिटेन की है।
8-तेजस का वजन 12 टन है और इसकी लंबाई 13.2 मीटर है। इसके पंख का फैलाव 8.2 मीटर है जबकि ऊंचाई 4.4 मीटर है और रफ्तार 1350 किमी प्रति घंटा है। दुश्मनों के विमानों से निपटने के लिए इस्तेमाल होने वाले इसका मिशन कंप्यूटर भारतीय तकनीक पर आधारित है।

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