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‘हम मस्जिद में नमाज अदा कर रहे थे, पुलिस वाले आए और हमें घसीटकर बाहर निकाला, आईकार्ड दिखाया फिर भी कोई असर नहीं’, केरल के छात्र ने सुनाई पुलिस बर्बरता की कहानी

केरल के एक छात्र मुबश्शिर ने कहा, 'उस वक्त हम नमाज पढ़ रहे थे जब पुलिस मस्जिद में दाखिल हुई और हमें घसीटकर बाहर ले गई। हमारी पिटाई की गई। मैंने आईडी कार्ड भी दिखाया मगर इससे उनपर कोई फर्क नहीं पड़ा। एक छात्र के रूप में हम बाहरी लोगों द्वारा किए गए कृत्यों का समर्थन नहीं करते हैं।'

Author , नई दिल्ली | Updated: December 16, 2019 8:59 AM
15 दिसंबर को जामिया में जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया रविवार (15 दिसंबर, 2019) को संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के विरोध का केंद्र बन गया। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए परिसर के भीतर आंसू गैस के गोले दागे। कथित तौर पर छात्रों को लाइब्रेरी और मस्जिद से बाहर खींचकर उनके साथ मारपीट की गई। छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई दक्षिणी दिल्ली के कुछ हिस्सों में हिंसा भड़कने के बाद हुई जहां एक हजार से अधिक प्रदर्शनकारी पुलिस के साथ भिड़ गए और मथुरा रोड, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, जामिया, नगर और सराय जुलेना में कम से छह बसों और पचास से ज्यादा वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।

जामिया के छात्रों और स्थानीय निवासियों द्वारा कैंपस के बाहर बीते शुक्रवार को संशोधित कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ झड़प के बाद और 27 लोगों को हिरासत में लेने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में यह दूसरा मामला है। बता दें कि CAA के विरोध में देश में तीसरे दिन पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शन हुए जहां 15 रेलवे स्टेशनों और दो लोकल ट्रेनों में तोड़फोड़ की गई। विरोध-प्रदर्शन के चलते असम में इंटरनेट बंद रहा, जहां पिछले एक सप्ताह से कानून के विरोध में भारी विरोध हुआ।

इस बीच दिल्ली में जामिया के छात्रों ने लोगों का समर्थन जुटाने के लिए सामुदायिक मार्च निकालने की योजना बनाई और स्थानीय निवासियों को संशोधित कानून के बारे में जानकारी दी। जिसमें हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, ईसाइयों, जैनियों और पारसियों को नागरिकता देने का प्रावधान है जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 तक देश में दाखिल हुए। हालांकि कानून में मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया।

उल्लेखनीय है कि जैसे ही भीड़ भड़की, इस बीच प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने लोगों के बीच बैचनी बढ़ाई और जोर देकर कहा कि वे आज ही संसद का घेराव करेंगे। हिंसा तब खासी भड़क गई जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने रिंग रोड तक पहुंचने की कोशिश की, मगर पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया।

इसी दौरान जामिया के परिसर में शाम के करीब 6:45 बजे तब तनाव खासा बढ़ गया जब पुलिस ने चार-पांच छात्रों को बाहर निकाला और बस में ले जाने से पहले उन्हें लाठियों से बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। आंसू गैंस के गोले दागे गए। करीब सात बजे 1000 के लगभग छात्रों को हवा में हाथ उठाए एक लाइन में परिसर से बाहर निकाला गया। छात्रों को कहना है कि उन्हें लाइब्रेरी से लाया गया था। इसी बीच जामिया प्रशासन ने प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया और कहा कि स्थानीय निवासी पत्थरबाजी और आगजनी में शामिल थे।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर नजमा अख्तर कहती है कि कैंपस में हंगामा करने की पुलिस की कार्रवाई गलत थी। आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। इससे छात्र खासे डर गए।

बातचीत में केरल के एक छात्र मुबश्शिर ने कहा, ‘उस वक्त हम नमाज पढ़ रहे थे जब पुलिस मस्जिद में दाखिल हुई और हमें घसीटकर बाहर ले गई। हमारी पिटाई की गई। मैंने आईडी कार्ड भी दिखाया मगर इससे उनपर कोई फर्क नहीं पड़ा। एक छात्र के रूप में हम बाहरी लोगों द्वारा किए गए कृत्यों का समर्थन नहीं करते हैं।’

ऐसे ही एक अन्य छात्र अजकर कहते हैं, ‘हम में से कुछ लोग कैंटीन में चाय पी रहे थे। छात्रों का एक प्रोटेस्ट मार्च कैंपस में घुसा और इसी बीच पुलिस वहां आई। इसमें मस्जिद भी शामिल है।’ 20 वर्षीय स्नातक के छात्र तहरीन कहते हैं, ‘150 के करीब छात्र लाइब्रेरी में पढ़ रहे थे तभी वहां दाखिल हुई। हमने देखा कि उन्होंने कई छात्रों को बुरी तरह पीटा। मगर हमें हवा में हाथ कर बाहर आने के लिए क्यों कहा गया? हम अपराधी नहीं हैं।’

जानना चाहिए की झड़प में यूनिवर्सिटी के घायल हुए बीस छात्रों को नजदीकी फैमिली हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जबकि कम से कम 80 छात्रों को अल शिफा हॉस्पिटल में ले जाया गया।

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